{"_id":"5c1d3d25bdec2256eb0d1287","slug":"61545420069-panipat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ीन साल से कम उम्र के आयु के बच्चों का नहीं होगा स्कूलों में एडमिशन, अभिभावकों, छात्रों व अधपकों ने बताया अच्छा फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ीन साल से कम उम्र के आयु के बच्चों का नहीं होगा स्कूलों में एडमिशन, अभिभावकों, छात्रों व अधपकों ने बताया अच्छा फैसला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन साल से कम आयु के बच्चों का नहीं होगा स्कूलों में एडमिशन, अभिभावकों, छात्रों व अध्यापकों ने बताया अच्छा फैसला पानीपत। सरकार की तरफ से कक्षा 1 और 2 के छात्रों को होमवर्क से निजात दिलाने वाले सर्कुलर के बाद हरियाणा सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। सरकार ने निजी व प्ले वे स्कूल के ऊपर शिकंजा कसते हुए फैसला लिया है कि 3 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी स्कूल में एडमिशन नहीं दिया जाएगा। साथ ही शिक्षा विभाग द्वारा सभी जिले के शिक्षा अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखकर सुनिश्चित कर दिया गया है। यह भी निर्देश दिए हैं कि पहली कक्षा से पहले केवल दो ही क्लास पढ़ाई जाएंगी। साथ ही प्लेवे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए उन स्कूलों में केवल दो ही कक्षा पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वहीं 3 साल से कम आयु के बच्चे का एडमिशन स्कूल में लेने को एनसीईआरटी व एनसीपीसीआर के नियमों का उल्लंघन बताया। अभिभावकों ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया व कहा कि स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा ऐसे फैसले लेना बेहद जरूरी है।
पहले नर्सरी के बाद आती थी सीधी पहली क्लास, अब लगते हैं 4 साल : शर्मा
अध्यापक गौरव शर्मा ने कहा कि पहले नर्सरी क्लास के बाद सीधा पहली क्लास में दाखिला होता था, लेकिन धीरे-धीरे नर्सरी के बाद एलकेजी, यूकेजी क्लास सलेब्स में जोड़ी गई। अब नर्सरी से पहले भी प्री नर्सरी को जोड़ दिया गया जिससे बच्चे को पहली क्लास तक पहुंचने में ही 4 साल लग जाते हैं। इस कारण मां-बाप छोटी उम्र में ही बच्चों को स्कूल भेजने लगते हैं। इससे बच्चों की शारीरिक ग्रोथ पर असर पड़ता है व प्राइवेट स्कूलों के धंधे के कारण मां बाप का पैसा भी खराब होता है।
अच्छा फैसला, बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ता था असर : गरिमा
गरिमा शर्मा ने कहा कि सरकार का यह अच्छा फैसला है। कम उम्र में स्कूल में दाखिला लेने के बाद बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर असर पड़ता है। प्रतिस्पर्धा के दौर में हर मां-बाप चाहता है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा ग्रहण करे व दो ढाई साल की उम्र में ही बच्चे को प्री नर्सरी क्लास में भेजना शुरू कर देते हैं। एडमिशन के लिए कम से कम 3 वर्ष करना सरकार का अच्छा फैसला है।
विज्ञापन
गूगल बनाने के चक्कर में कम उम्र में भेज देते हैं स्कूल : शमशेर
अध्यापक शमशेर सिंह ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को गूगल बनाने के चक्कर में स्कूल में भेज देते हैं व प्राइवेट स्कूल जमकर पैसे वसूलते हैं। यह सब केवल प्रतिस्पर्धा के कारण हो रहा है। सरकार का यह फैसला अच्छा है।
परिवार की जगह स्कूल ही हो गई थी प्राथमिक पाठशाला : अजय शर्मा
सीए अजय शर्मा ने कहा कि बच्चों की प्राथमिक शिक्षा उनकी मां बाप के पास ही होनी चाहिए। स्कूल में घर जैसा माहौल कभी भी नहीं हो सकता। चाहे प्ले वे स्कूल कितने भी कोशिश क्यों न कर ले। पिछले कुछ वर्षों से परिवार की जगह स्कूल ही प्राथमिक पाठशाला बन गया था। सरकार के इस कदम को सख्ती से लागू किया गया तो यकीनन प्रभावशाली रहेगा।
आदेशों का उल्लंघन होने पर होगी विभागीय कार्रवाई : नरवाल
शिक्षा निदेशालय ने निजी व प्ले वे स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए 3 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी स्कूल में एडमिशन नहीं दिए जाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखकर सुनिश्चित कर दिया गया है। यह भी निर्देश दिए हैं कि पहली कक्षा से पहले केवल दो ही क्लास पढ़ाई जाएगी। साथ ही प्लेवे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए उन स्कूलों में केवल दो ही कक्षा पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। नियमों कार उल्लंघन करने पर एनसीईआरटी व एनसीपीसीआर द्वारा नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बिजेंद्र नरवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
विज्ञापन
पहले नर्सरी के बाद आती थी सीधी पहली क्लास, अब लगते हैं 4 साल : शर्मा
अध्यापक गौरव शर्मा ने कहा कि पहले नर्सरी क्लास के बाद सीधा पहली क्लास में दाखिला होता था, लेकिन धीरे-धीरे नर्सरी के बाद एलकेजी, यूकेजी क्लास सलेब्स में जोड़ी गई। अब नर्सरी से पहले भी प्री नर्सरी को जोड़ दिया गया जिससे बच्चे को पहली क्लास तक पहुंचने में ही 4 साल लग जाते हैं। इस कारण मां-बाप छोटी उम्र में ही बच्चों को स्कूल भेजने लगते हैं। इससे बच्चों की शारीरिक ग्रोथ पर असर पड़ता है व प्राइवेट स्कूलों के धंधे के कारण मां बाप का पैसा भी खराब होता है।
विज्ञापन
अच्छा फैसला, बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर पड़ता था असर : गरिमा
गरिमा शर्मा ने कहा कि सरकार का यह अच्छा फैसला है। कम उम्र में स्कूल में दाखिला लेने के बाद बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर असर पड़ता है। प्रतिस्पर्धा के दौर में हर मां-बाप चाहता है कि उनका बच्चा अच्छी शिक्षा ग्रहण करे व दो ढाई साल की उम्र में ही बच्चे को प्री नर्सरी क्लास में भेजना शुरू कर देते हैं। एडमिशन के लिए कम से कम 3 वर्ष करना सरकार का अच्छा फैसला है।
विज्ञापन
गूगल बनाने के चक्कर में कम उम्र में भेज देते हैं स्कूल : शमशेर
अध्यापक शमशेर सिंह ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को गूगल बनाने के चक्कर में स्कूल में भेज देते हैं व प्राइवेट स्कूल जमकर पैसे वसूलते हैं। यह सब केवल प्रतिस्पर्धा के कारण हो रहा है। सरकार का यह फैसला अच्छा है।
परिवार की जगह स्कूल ही हो गई थी प्राथमिक पाठशाला : अजय शर्मा
सीए अजय शर्मा ने कहा कि बच्चों की प्राथमिक शिक्षा उनकी मां बाप के पास ही होनी चाहिए। स्कूल में घर जैसा माहौल कभी भी नहीं हो सकता। चाहे प्ले वे स्कूल कितने भी कोशिश क्यों न कर ले। पिछले कुछ वर्षों से परिवार की जगह स्कूल ही प्राथमिक पाठशाला बन गया था। सरकार के इस कदम को सख्ती से लागू किया गया तो यकीनन प्रभावशाली रहेगा।
आदेशों का उल्लंघन होने पर होगी विभागीय कार्रवाई : नरवाल
शिक्षा निदेशालय ने निजी व प्ले वे स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए 3 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी स्कूल में एडमिशन नहीं दिए जाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखकर सुनिश्चित कर दिया गया है। यह भी निर्देश दिए हैं कि पहली कक्षा से पहले केवल दो ही क्लास पढ़ाई जाएगी। साथ ही प्लेवे स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए उन स्कूलों में केवल दो ही कक्षा पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। नियमों कार उल्लंघन करने पर एनसीईआरटी व एनसीपीसीआर द्वारा नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
बिजेंद्र नरवाल, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत।