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अनिल विज के सस्पेंड करने के आदेशों के खिलाफ हाई कोर्ट में पहुंचे प्रदूषण कंट्रोल नियंत्रक अधिकारी, बोले: विज की कमेटी को किसी को
Updated Sun, 09 Sep 2018 12:07 AM IST
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विज ने किया था आरओ को सस्पेंड, हाईकोर्ट से मिला स्टे, सरकार और मंत्री से मांगा जवाब
-वर्धमान स्पिनर्स पर कार्रवाई न होने से नाराज मंत्री ने प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड के जिला अधिकारी को सस्पेंड करने के दिए थे निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। कष्ट निवारण समिति के अध्यक्ष व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के सस्पेंड करने के आदेश के खिलाफ पानीपत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला अधिकारी हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में दायर की कि अपनी अपील में मंत्री विज के आदेशों को नियमों के विपरीत बताते हुए कहा कि उन पर गलत ढंग से कार्रवाई की गई है, क्योंकि कमेटी के पास उनको सस्पेंड करने का ऐसा अधिकार नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सरकार और मंत्री अनिल विज से जवाब तलब किया है, वहीं हाईकोर्ट में जिला अधिकारी के पहुंचने के बाद सरकार भी हरकत में आई। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के सभी डीसी को निर्देश दिया है कि जिस भी अधिकारी को मंत्री सस्पेंड करें उनकी रिपोर्ट शाम तक उनके मुख्यालय पहुंच जानी चाहिए।
बता दें कि 31 अगस्त को कष्ट निवारण समिति की बैठक में भैंसवाल गांव स्थित वर्धमान स्पिनर्स पर कार्रवाई न करने से नाराज स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल को सस्पेंड करने के निर्देश दिए थे। फिलहाल भूपेंद्र चहल को कोर्ट से स्टे मिल गया है और वह पानीपत के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला अधिकारी के रूप में काम करते रहेंगे।
ये है पूरा मामला:
भैंसवाल गांव में स्थित वर्धमान स्पिनर्स के खिलाफ गांव के ही बलबीर सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दी थी कि फैक्टरी से प्रदूषित बाहर आता है। वह इसकी शिकायत विजय जैन व हेमंत जैन को करते हैं तो वह उन्हें झूठे केसों में फंसाने की धमकी देते हैं। प्रदूषित पानी से उनकी फसल खराब हो रही है। उन्होंने इसकी शिकायत आरओ भूपेंद्र चहल को भी की थी, लेकिन उन्होंने समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की और दोनों पक्षों का आपस में समझौता करवा दिया। 31 अगस्त को कष्ट निवारण समिति की बैठक में जब ये मामला उठा तो शिकायतकर्ता की शिकायत पर मंत्री अनिल विज से आरओ से फैक्टरी पर हुई कार्रवाई के बारे में पूछा था। आरओ मीटिंग में कहते रहे कि सर दोनों पक्षों का समझौता करवा दिया है। अब फैक्टरी को नोटिस दिए गए हैं। इस कार्रवाई से नाराज मंत्री विज ने डीसी को तुरंत आरओ भूपेंद्र चहल को सस्पेंड करने के निर्देश दे दिए थे।
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आरओ के सस्पेंशन की रिपोर्ट नहीं भेजी मुख्यालय
डीसी सुमेधा कटारिया ने कई दिन तक आरओ भूपेंद्र चहल की सस्पेंशन की रिपोर्ट मुख्यालय में नहीं भेजी थी। इसी पर आरओ भूपेंद्र चहल को कोर्ट में जाने का समय मिल गया और उन्होंने हाईकोर्ट में अपनी अपील दायर कर दी। इसी अपील पर कोर्ट ने सरकार व मंत्री अनिल विज से इस संबंध रिपोर्ट मांगी है।
बोर्ड को केंद्रीय टीम भी लगा चुकी है फटकार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मई माह में पानीपत की औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया था। इस दौरान 141 उद्योगों से सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे गए थे। अब तक 44 उद्योगों के सैंपल फैल हो चुके हैं और उनको बंद करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। 34 फैक्टरियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी हुए हैं। केंद्रीय टीम ने जिला प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड को फटकार लगाते हुए नियमित रूप से डाइंग यूनिट की जांच करने के निर्देश दिए थे। अब तक नियंत्रक बोर्ड ने 15 फैक्टरियों को ही सील किया है।
आरओ ने कोर्ट में ये दी दलीलें
-शिकायतकर्ता ने पत्र देकर कहा था कि वह अपनी शिकायत पर एक्शन नहीं चाहता।
-वर्धमान स्पिनर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
-28 अगस्त को वहां से सैंपल भी लिए गए थे।
-वर्धमान स्पिनर्स को बंद करने की सिफारिश भी भेजी गई थी।
-कमेटी को उनको सस्पेंड करने का ऐसा कोई अधिकार नहीं है।
- अनिल विज के आदेशों को खारिज किया जाए।
-अनिल विज ने ऐसे आदेश देकर सर्विस रूल्स के प्रोविजन को बाईपास किया है।
मैंने सस्पेंड होने के निर्देशों के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मुझे स्टे मिल गया है। मैं काम करता रहूंगा।
-भूपेंद्र चहल, प्रदूषण एवं नियंत्रक बोर्ड
सरकार के आदेश मिल गए हैं, इसी के अनुरूप काम होंगे
सरकार की ओर से सस्पेंशन की रिपोर्ट उसी दिन मुख्यालय भेजने के निर्देश मिल गए हैं। इसी के अनुरूप काम होंगे।
-सुमेधा कटारिया, जिला उपायुक्त
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विज ने किया था आरओ को सस्पेंड, हाईकोर्ट से मिला स्टे, सरकार और मंत्री से मांगा जवाब
-वर्धमान स्पिनर्स पर कार्रवाई न होने से नाराज मंत्री ने प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड के जिला अधिकारी को सस्पेंड करने के दिए थे निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। कष्ट निवारण समिति के अध्यक्ष व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के सस्पेंड करने के आदेश के खिलाफ पानीपत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला अधिकारी हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में दायर की कि अपनी अपील में मंत्री विज के आदेशों को नियमों के विपरीत बताते हुए कहा कि उन पर गलत ढंग से कार्रवाई की गई है, क्योंकि कमेटी के पास उनको सस्पेंड करने का ऐसा अधिकार नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सरकार और मंत्री अनिल विज से जवाब तलब किया है, वहीं हाईकोर्ट में जिला अधिकारी के पहुंचने के बाद सरकार भी हरकत में आई। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के सभी डीसी को निर्देश दिया है कि जिस भी अधिकारी को मंत्री सस्पेंड करें उनकी रिपोर्ट शाम तक उनके मुख्यालय पहुंच जानी चाहिए।
बता दें कि 31 अगस्त को कष्ट निवारण समिति की बैठक में भैंसवाल गांव स्थित वर्धमान स्पिनर्स पर कार्रवाई न करने से नाराज स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल को सस्पेंड करने के निर्देश दिए थे। फिलहाल भूपेंद्र चहल को कोर्ट से स्टे मिल गया है और वह पानीपत के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिला अधिकारी के रूप में काम करते रहेंगे।
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ये है पूरा मामला:
भैंसवाल गांव में स्थित वर्धमान स्पिनर्स के खिलाफ गांव के ही बलबीर सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दी थी कि फैक्टरी से प्रदूषित बाहर आता है। वह इसकी शिकायत विजय जैन व हेमंत जैन को करते हैं तो वह उन्हें झूठे केसों में फंसाने की धमकी देते हैं। प्रदूषित पानी से उनकी फसल खराब हो रही है। उन्होंने इसकी शिकायत आरओ भूपेंद्र चहल को भी की थी, लेकिन उन्होंने समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की और दोनों पक्षों का आपस में समझौता करवा दिया। 31 अगस्त को कष्ट निवारण समिति की बैठक में जब ये मामला उठा तो शिकायतकर्ता की शिकायत पर मंत्री अनिल विज से आरओ से फैक्टरी पर हुई कार्रवाई के बारे में पूछा था। आरओ मीटिंग में कहते रहे कि सर दोनों पक्षों का समझौता करवा दिया है। अब फैक्टरी को नोटिस दिए गए हैं। इस कार्रवाई से नाराज मंत्री विज ने डीसी को तुरंत आरओ भूपेंद्र चहल को सस्पेंड करने के निर्देश दे दिए थे।
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आरओ के सस्पेंशन की रिपोर्ट नहीं भेजी मुख्यालय
डीसी सुमेधा कटारिया ने कई दिन तक आरओ भूपेंद्र चहल की सस्पेंशन की रिपोर्ट मुख्यालय में नहीं भेजी थी। इसी पर आरओ भूपेंद्र चहल को कोर्ट में जाने का समय मिल गया और उन्होंने हाईकोर्ट में अपनी अपील दायर कर दी। इसी अपील पर कोर्ट ने सरकार व मंत्री अनिल विज से इस संबंध रिपोर्ट मांगी है।
बोर्ड को केंद्रीय टीम भी लगा चुकी है फटकार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मई माह में पानीपत की औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया था। इस दौरान 141 उद्योगों से सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे गए थे। अब तक 44 उद्योगों के सैंपल फैल हो चुके हैं और उनको बंद करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। 34 फैक्टरियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी हुए हैं। केंद्रीय टीम ने जिला प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड को फटकार लगाते हुए नियमित रूप से डाइंग यूनिट की जांच करने के निर्देश दिए थे। अब तक नियंत्रक बोर्ड ने 15 फैक्टरियों को ही सील किया है।
आरओ ने कोर्ट में ये दी दलीलें
-शिकायतकर्ता ने पत्र देकर कहा था कि वह अपनी शिकायत पर एक्शन नहीं चाहता।
-वर्धमान स्पिनर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
-28 अगस्त को वहां से सैंपल भी लिए गए थे।
-वर्धमान स्पिनर्स को बंद करने की सिफारिश भी भेजी गई थी।
-कमेटी को उनको सस्पेंड करने का ऐसा कोई अधिकार नहीं है।
- अनिल विज के आदेशों को खारिज किया जाए।
-अनिल विज ने ऐसे आदेश देकर सर्विस रूल्स के प्रोविजन को बाईपास किया है।
मैंने सस्पेंड होने के निर्देशों के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मुझे स्टे मिल गया है। मैं काम करता रहूंगा।
-भूपेंद्र चहल, प्रदूषण एवं नियंत्रक बोर्ड
सरकार के आदेश मिल गए हैं, इसी के अनुरूप काम होंगे
सरकार की ओर से सस्पेंशन की रिपोर्ट उसी दिन मुख्यालय भेजने के निर्देश मिल गए हैं। इसी के अनुरूप काम होंगे।
-सुमेधा कटारिया, जिला उपायुक्त