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एनएचएमकर्मी दो दिन की हड़ताल पर, पहले दिन ही लड़खड़ाई सेहत व्यवस्था, मरीजों को दवा तक नहीं मिल सकी
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:19 AM IST
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एनएचएमकर्मी दो दिन की हड़ताल पर, पहले दिन ही लड़खड़ाई सेहत व्यवस्था, मरीजों को दवा तक नहीं मिल सकी
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। एनएचएमकर्मी मांगों को लेकर सोमवार को दो दिन की हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पीएचसी, सीएचसी से लेकर सिविल अस्पताल तक सेहत सुविधाएं लड़खड़ा गईं। मरीजों को पीजीआई तक जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस तक नहीं चल सकी और मरीजों को अस्पताल में आने पर ओपीडी की पर्ची तक को भटकना पड़ा। ऐसे में सिविल अस्पताल की सामान्य दिनों से करीब चार सौ ओपीडी कम हुई। इन मरीजों को भी स्टोर में दवा लेने के लिए भटकना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंबुलेंस व मरीजों की सुविधाओं को लेकर किए वैकल्पिक प्रबंध भी नाकाफी रहे।
एनएचएम कर्मचारी मंगलवार को हरियाणा एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले दो दिन की हड़ताल पर चले गए। एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाते ही सिविल अस्पताल में ओपीडी बुकिंग कार्य से लेकर सिविल अस्पताल का इलाज व दवा स्टोर और एंबुलेंस तक ठप हो गई। मरीजों को ओपीडी की पर्ची न मिलने पर भी परेशानी उठानी पड़ी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने यहां पर सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई, लेकिन वे भी सभी मरीजों की ओपीडी की पर्ची नहीं बना सके। सिविल अस्पताल के जानकार सूत्रों की माने तो मंगलवार को मात्र 550 ओपीडी हुई, जबकि सामान्य दिनों में ओपीडी की संख्या करीब 850 तक रहती है।
जनरल वार्ड से लेकर जच्चा-बच्चा वार्ड तक में रही परेशानी
सिविल अस्पताल में ओपीडी वार्ड की पर्ची बनाने में ही नहीं जनरल वार्ड से लेकर जच्चा-बच्चा वार्ड तक मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी। मिली जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल में एनएचएम के 75 कर्मचारी हैं। इनमें 24 नर्स हैं। इनमें से नौ कर्मचारी लेबर व छह जच्चा-बच्चा वार्ड में हैं। इसके अलावा नौ कर्मचारी बर्न व जनरल वार्ड में हैं। इसके अलावा एनएचएम के कर्मचारी स्टोर में दवा देने, आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने और अधिकारियों के दैनिक कामकाज में नियुक्त हैं।
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न एंबुलेंस मिली और न ही ठीक से दवा मिली
एनएचएम कर्मचारी संघ की हड़ताल के चलते स्टोर पर दवा और पीजीआई खानपुर व रोहतक रेफर किए जाने वाले मरीजों को एंबुलेंस भी नहीं मिल सकी। एंबुलेंसकर्मी भी हड़ताल पर रहे। वहीं सिविल अस्पताल के स्टोर पर भी मरीजों को दवा नहीं मिल सकी। ओपीडी कराने वाले 550 मरीजों व उनके तीमारदारों को दवा लेने में भी परेशानी उठानी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार एंबुलेंसों का प्रबंध किया गया, लेकिन वे भी इतना सहारा नहीं बन सकी।
मरीज बोले हड़ताल के चलते उठानी पड़ी परेशानी
चावला कॉलोनी कुटानी रोड निवासी मोनिका मनोचा अपने पति को दवा दिलाने लेकर आई थी। मोनिका मनोचा ने बताया कि उसको पहले तो ओपीडी की पर्ची बनवाने में परेशानी उठानी पड़ी। वह पर्ची बनवाकर ओपीडी वार्ड में पहुंची तो डॉक्टर चाय पीने गए हुए थे। डॉक्टर ने आकर दवा लिखी। वह दवा लेने अस्पताल के स्टोर पर पहुंची तो उसको वहां पर दवा नहीं मिल सकी। उसको हड़ताल के चलते वीरवार को ही दवा मिलने की बात कही गई। उसको मुश्किल से तीन बजे दवा मिल पाई। तहसील कैंप विष्णु कॉलोनी निवासी सुनीता ने बताया कि वह मंगलवार को सिविल अस्पताल में बीमारी की दवा लेने आई थी। उसको दोपहर तक भी दवा नहीं मिल सकी। उसको मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया।
कर्मचारियों ने सिविल अस्पताल स्थित पार्क में बैठक कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और रोष प्रकट किया। प्रधान हरिओम देशवाल ने कहा कि कर्मचारियों ने 25 व 26 अक्तूबर को हड़ताल पर जाना तय था, लेकिन मुख्यमंत्री 22 अक्तूबर को बैठक कर उनकी मांगों को लागू करने का आश्वासन दिया था। 17 नवंबर को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के साथ बैठक में कर्मचारियों को एक सप्ताह में सातवां वेतन आयोग के अनुसार वेतन बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी करने का आश्वासन दिया। लेकिन स्वास्थ्य निदेशक ने बाकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारी स्थायी सेवा सुरक्षा प्रदान करने समेत 22 मांग हैं।
एनएचएम के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल पर चले गए हैं। उनकी हड़ताल की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते किसी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं को ठप नहीं होने दिया गया। मरीजों को हर संभव सुविधा व इलाज देने का प्रयास किया गया है।
डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ, पानीपत।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। एनएचएमकर्मी मांगों को लेकर सोमवार को दो दिन की हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से पीएचसी, सीएचसी से लेकर सिविल अस्पताल तक सेहत सुविधाएं लड़खड़ा गईं। मरीजों को पीजीआई तक जाने के लिए सरकारी एंबुलेंस तक नहीं चल सकी और मरीजों को अस्पताल में आने पर ओपीडी की पर्ची तक को भटकना पड़ा। ऐसे में सिविल अस्पताल की सामान्य दिनों से करीब चार सौ ओपीडी कम हुई। इन मरीजों को भी स्टोर में दवा लेने के लिए भटकना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंबुलेंस व मरीजों की सुविधाओं को लेकर किए वैकल्पिक प्रबंध भी नाकाफी रहे।
एनएचएम कर्मचारी मंगलवार को हरियाणा एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले दो दिन की हड़ताल पर चले गए। एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाते ही सिविल अस्पताल में ओपीडी बुकिंग कार्य से लेकर सिविल अस्पताल का इलाज व दवा स्टोर और एंबुलेंस तक ठप हो गई। मरीजों को ओपीडी की पर्ची न मिलने पर भी परेशानी उठानी पड़ी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने यहां पर सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई, लेकिन वे भी सभी मरीजों की ओपीडी की पर्ची नहीं बना सके। सिविल अस्पताल के जानकार सूत्रों की माने तो मंगलवार को मात्र 550 ओपीडी हुई, जबकि सामान्य दिनों में ओपीडी की संख्या करीब 850 तक रहती है।
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जनरल वार्ड से लेकर जच्चा-बच्चा वार्ड तक में रही परेशानी
सिविल अस्पताल में ओपीडी वार्ड की पर्ची बनाने में ही नहीं जनरल वार्ड से लेकर जच्चा-बच्चा वार्ड तक मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी। मिली जानकारी के अनुसार सिविल अस्पताल में एनएचएम के 75 कर्मचारी हैं। इनमें 24 नर्स हैं। इनमें से नौ कर्मचारी लेबर व छह जच्चा-बच्चा वार्ड में हैं। इसके अलावा नौ कर्मचारी बर्न व जनरल वार्ड में हैं। इसके अलावा एनएचएम के कर्मचारी स्टोर में दवा देने, आधार कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने और अधिकारियों के दैनिक कामकाज में नियुक्त हैं।
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न एंबुलेंस मिली और न ही ठीक से दवा मिली
एनएचएम कर्मचारी संघ की हड़ताल के चलते स्टोर पर दवा और पीजीआई खानपुर व रोहतक रेफर किए जाने वाले मरीजों को एंबुलेंस भी नहीं मिल सकी। एंबुलेंसकर्मी भी हड़ताल पर रहे। वहीं सिविल अस्पताल के स्टोर पर भी मरीजों को दवा नहीं मिल सकी। ओपीडी कराने वाले 550 मरीजों व उनके तीमारदारों को दवा लेने में भी परेशानी उठानी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार एंबुलेंसों का प्रबंध किया गया, लेकिन वे भी इतना सहारा नहीं बन सकी।
मरीज बोले हड़ताल के चलते उठानी पड़ी परेशानी
चावला कॉलोनी कुटानी रोड निवासी मोनिका मनोचा अपने पति को दवा दिलाने लेकर आई थी। मोनिका मनोचा ने बताया कि उसको पहले तो ओपीडी की पर्ची बनवाने में परेशानी उठानी पड़ी। वह पर्ची बनवाकर ओपीडी वार्ड में पहुंची तो डॉक्टर चाय पीने गए हुए थे। डॉक्टर ने आकर दवा लिखी। वह दवा लेने अस्पताल के स्टोर पर पहुंची तो उसको वहां पर दवा नहीं मिल सकी। उसको हड़ताल के चलते वीरवार को ही दवा मिलने की बात कही गई। उसको मुश्किल से तीन बजे दवा मिल पाई। तहसील कैंप विष्णु कॉलोनी निवासी सुनीता ने बताया कि वह मंगलवार को सिविल अस्पताल में बीमारी की दवा लेने आई थी। उसको दोपहर तक भी दवा नहीं मिल सकी। उसको मायूस होकर वापस लौटना पड़ा।
सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया।
कर्मचारियों ने सिविल अस्पताल स्थित पार्क में बैठक कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और रोष प्रकट किया। प्रधान हरिओम देशवाल ने कहा कि कर्मचारियों ने 25 व 26 अक्तूबर को हड़ताल पर जाना तय था, लेकिन मुख्यमंत्री 22 अक्तूबर को बैठक कर उनकी मांगों को लागू करने का आश्वासन दिया था। 17 नवंबर को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के साथ बैठक में कर्मचारियों को एक सप्ताह में सातवां वेतन आयोग के अनुसार वेतन बढ़ोतरी की अधिसूचना जारी करने का आश्वासन दिया। लेकिन स्वास्थ्य निदेशक ने बाकी मांगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारी स्थायी सेवा सुरक्षा प्रदान करने समेत 22 मांग हैं।
एनएचएम के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर दो दिन की हड़ताल पर चले गए हैं। उनकी हड़ताल की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के चलते किसी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं को ठप नहीं होने दिया गया। मरीजों को हर संभव सुविधा व इलाज देने का प्रयास किया गया है।
डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ, पानीपत।