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Panipat News: एक साल में एसएनसीयू वार्ड से 24 प्रतिशत बच्चे रेफर, पांच प्रतिशत की मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Apr 2024 02:39 AM IST
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24 percent children referred from SNCU ward in one year, five percent died
पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल के जीवनदायनी एसएनसीयू वार्ड के एक साल के आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। एक साल में एसएनसीयू वार्ड से 24 प्रतिशत नवजातों को हायर हेल्थ सेंटर में रेफर करना पड़ा है। हर 10 में से दो से अधिक नवजात रेफर हो रहे हैं। 10 प्रतिशत नवजातों को परिजन यहां के डॉक्टरों के इलाज से असंतुष्ट होकर उन्हें यहां से डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों में ले गए। एक साल में 22 नवजात यहां मौत से जंग हार गए। जैसे ही ये रिपोर्ट सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा की टेबल पर पहुंची उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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जानकारी के अनुसार एसएनसीयू वार्ड में 31 मार्च 2023 से 31 मार्च 2023 तक 1422 नवजातों को दाखिल कराया गया । इनमें से 900 बच्चों को स्वस्थ होने के बाद एसएनसीयू वार्ड से भेज दिया गया। 1422 में से 22 नवजातों की यहां मौत हो गई। 143 बच्चों को परिजन लामा कर दूसरे हेल्थ सेंटर में ले गए। 1422 में से 351 नवजातों को यहां से रेफर किया गया है। फिलहाल एसएनसीयू वार्ड में 12 नवजात दाखिल हैं। इनकी देखभाल चार डॉक्टर व आठ स्टाफ नर्स तीन शिफ्टों में कर रहे हैं। एसएनसीयू वार्ड के गंभीर हालत को देखते हुए पांच दिन पहले समालखा अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना को यहां का इंचार्ज बनाया गया है।
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इस कारण हो रही बच्चों की मौत
नागरिक अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड से पिछले छह माह में रेफरल एकाएक बढ़ गया। मुख्यालय ने बच्चों के रेफरल पर सिविल सर्जन से जवाब तलब कर लिया। एसएनसीयू वार्ड के डॉक्टरों पर कमीशन के लिए बच्चों को निजी अस्पतालों में भेजने के आरोप लगे । सिविल सर्जन ने इस मामले की जांच डिप्टी सिविल सर्जन को सौंप दी। उन्होंने डॉक्टरों को बच्चे यहां से रेफर न करने के कड़े निर्देश दिए। एसएनसीयू वार्ड में वेंटिलेटर नहीं थे। इसलिए बच्चों की हालत गंभीर होती गई । अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार डॉक्टर बच्चों को रेफर नहीं कर सकते थे। वेंटिलेटर के अभाव में कई नवजातों की मौत हो गई थी।
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डॉक्टरों पर जान बूझकर भी नवजातों को रेफर करने के आरोप-
डॉक्टरों पर कमिशनखोरी में भी नवजातों को यहां रेफर करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि डॉक्टर निजी अस्पतालों में नवजातों को भेजते हैं। वहां से इन्हें मोटा कमिशन मिलता है। नवजातों का डाटा निजी अस्पतालों में भेजा जाता है। वहां से एजेंट आकर नवजातों के परिजनों को बहलाकर यहां से बच्चों को निजी अस्पताल में लेकर जाते हैं। इसके लिए स्टाफ को कमिशन मिलता है।

एसएनसीयू वार्ड में सख्ती की गई
एसएनसीयू वार्ड से रेफरल कम करने का प्रयास है। डॉक्टरों को वेंटिलेटर चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। बच्चों की मौत की समीक्षा भी चल रही है। रेफरल मामलों की जांच भी की जा रही है।
डॉ. जयंत आहूजा, सिविल सर्जन पानीपत।
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