गोल्डन ब्वाय के गांव का हाल: खंडरा में आठवीं तक का ही सरकारी स्कूल, आगे पढ़ाई को तरस जाती हैं बेटियां
2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज ने गोल्ड जीता था। इसके बाद सरकार ने गांव के लिए पांच करोड़ रुपये की ग्रांट पास की थी, जो आज तक प्राप्त नहीं हुई।
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ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा के गांव खंडरा में बेटियों की शिक्षा के हालात बदतर हैं। गांव की 20 से 30 फीसदी बेटियों को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ रही है। इसका बड़ा कारण गांव का राजकीय स्कूल का सिर्फ आठवीं कक्षा तक होना है। 8वीं के बाद पढ़ाई करने के लिए लड़कियों को तीन किलोमीटर का सफर पैदल तय कर गांव शेरा जाना पड़ता है। इसके बाद छह किलोमीटर दूर गांव मतलौडा में राजकीय स्कूल है।
गांव खंडरा के ग्रामीणों का कहना है कि तीन किलोमीटर पैदल सफर तय करना कठिन है। बेटियों की सुरक्षा की चिंता भी रहती है। उनका कहना है कि गांव का स्कूल अपग्रेड होता है तो वह बेटियों को गांव में ही पढ़ा सकेंगे। हालांकि संपन्न परिवार गांव से 100 मीटर दूर खुले निजी संस्कृति स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, वह अपने बच्चों की शिक्षा आगे जारी नहीं रख पा रहे हैं।
गांव के मौजूदा स्कूल में भी दो से तीन फुट तक घास खड़ी है, सफाई तक नहीं होती है। ग्रामीणों का कहना है कि 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज ने गोल्ड जीता था। इसके बाद सरकार ने गांव के लिए पांच करोड़ रुपये की ग्रांट पास की थी, जो आज तक प्राप्त नहीं हुई।
गांव शेरा जाने के लिए नहीं कोई साधन
नीरज के गोल्ड से गांव का उद्धार होगा, नहीं छोड़नी पड़ेगी शिक्षा
नीरज के गोल्ड लाने से खंडरा की पहचान पानीपत में नहीं बल्कि पूरे देश में हो गई है। अब प्रशासन हमारे गांव की तरफ ध्यान देगा। नीरज के गोल्ड से गांव का उद्धार होगा। उम्मीद है अब स्कूल अपग्रेड भी होगा और बेटियों को गांव में ही शिक्षा मिलेगी। उन्हें शिक्षा नहीं छोड़नी पड़ेगी। -रूधा, बुजुर्ग
कॉमनवेल्थ में नीरज को गोल्ड मिलने के बाद अलॉट हुई ग्रांट आज तक नहीं आई
कॉमनवेल्थ गेम्स में नीरज के गोल्ड मेडल जीतने के बाद सरकार की ओर से गांव के लिए पांच करोड़ रुपये ग्रांट अलॉट की गई थी। उपायुक्त ने गांव में पांच करोड़ रुपये के विकास कार्य कराने का एस्टीमेट मांगा था। नीरज के परिजनों ने गांव में स्टेडियम निर्माण, स्कूल का अपग्रेडेशन और गांव की सड़कों के साथ अन्य विकास कार्यों के बारे में बताया था। इसके बाद एस्टीमेट बनाकर जिला प्रशासन को सौंपा गया, लेकिन अभी तक कोई बजट प्राप्त नहीं हुआ। -शैलेंद्र, सरपंच