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पिता करते हैं भट्ठे पर मजदूरी, खुद नाइट ड्यूटी करते हुए दिन में की पढ़ाई व प्रेक्टिस और आर्थिक हालत पर विजय पाकर थ्रो बॉल में 11

Sun, 13 Jan 2019 01:38 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 13 Jan 2019 01:38 AM IST
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पिता करते हैं भट्ठे पर मजदूरी, खुद नाइट ड्यूटी करते हुए दिन में की पढ़ाई व प्रेक्टिस और आर्थिक हालत पर विजय पाकर थ्रो बॉल में 11
पिता करते हैं भट्ठे पर मजदूरी, खुद नाइट ड्यूटी करते हुए दिन में की पढ़ाई व प्रेक्टिस और आर्थिक हालत पर विजय पाकर थ्रोबॉल में
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पानीपत। हर अच्छे खिलाड़ी की कामयाबी के पीछे संघर्ष की एक कहानी होती है, ऐसी ही एक संघर्ष की कहानी थ्रो बॉल खिलाड़ी सोनू की भी है। सोनू पानीपत के छोटे से गांव भंडारी का रहने वाला है। जो अपनी 24 साल की उम्र में हरियाणा की तरफ से 27 नेशनल प्रतियोगिताएं खेल चुका है। उनके पिता रामकुमार भट्ठे पर मजदूरी करते हैं व उनकी माता राजो देवी हाउस वाइफ है। सोनू के संघर्ष की कहानी बताते हुए कोच रोजश टूर्ण ने बताया कि सोनू एक बेहद गरीब परिवार से संबंध रखते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति से लड़कर, दिन रात मेहनत करके अपने आप को अच्छा खिलाड़ी बनाया। शिवाजी स्टेडियम में चल रही पांचवीं थ्रोबॉल प्रतियोगिता में भी वह पानीपत की तरफ से खेलते हुए सबसे अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। वह 27 नेशनल प्रतियोगिता खेल चुके हैं, जिनमें से नागपुर, पानीपत, कर्नाटक सहित 11 जगहों पर गोल्ड मेडल जीता है। इस वर्ष उनकी पूरी पूरी उम्मीद है कि भारत की टीम में उनका चयन होगा।
पीटीआई मास्टर शमशेर ने सिखाया खेलना :
सोनू ने बताया कि उन्होंने 2007 में खेलना शुरू किया था, उस समय वह सातवीं कक्षा में था। गांव के ही सरकारी स्कूल में पीटीआई मास्टर शमशेर ने स्कूल में बच्चों को थ्रोबॉल खिलाना शुरू किया। एक साल की प्रेक्टिस के बाद ही अंडर - 14 में उनका हरियाणा की टीम में चयन हो गया। नेशनल स्तर पर पहली ही प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
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रात को करी ऑपरेटर की नौकरी, दिन में जारी रखे पढ़ाई व खेल :
दसवीं क्लास के बाद सोनू के सामने उनके घर की आर्थिक स्थिति आ खड़ी हुई। घर में पैसों के अभाव के कारण उनके सामने खेल व पढ़ाई छोड़ने तक की बात आ गई थी, लेकिन वह हिम्मत नहीं हारे और रिफाइनरी में रात को ऑपरेटर की नौकरी करनी शुरू कर दी। सोनू ने ऑपरेटर की नौकरी करते हुए ही अपने खेल की प्रेक्टिस व पढ़ाई जारी रखी। गांव में पढ़ाई पूरी होने के बाद वह शिवाजी स्टेडियम में कोच राजेश टूर्ण के पास ही प्रेक्टिस करने लगे।
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दिल्ली में गेस्ट अध्यापक की कर रहे नौकरी :
सोनू ने बी. पेड़. की पढ़ाई होने तक नाइट ड्यूटी जारी रखी। पढ़ाई पूरी होने के बाद उनका चयन दिल्ली में गेस्ट अध्यापक के पद पर हुआ, जिसके बाद पिछले कुछ माह से वह स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बाद बच्चों के साथ ही खेल की प्रेक्टिस करते हैं।
पहली नजर में ही पहचाना खिलाड़ी में दम है : शमशेर
पीटीआई मास्टर शमशेर ने कहा कि उन्होंने पहली ही नजर में पहचान लिया था कि सोनू एक अच्छा खिलाड़ी व उसमें दम है। वह हमेशा उत्साह के साथ व कुछ सिखने की लगन के साथ प्रेक्टिस करते हैं, जिस कारण वह एक साल की प्रेक्टिस में ही नेशनल प्रतियोगिता खेले।

इस बार हो सकता है भारत की टीम में चयन : टूर्ण
कोच राजेश टूर्ण ने कहा कि सोनू एक अच्छा खिलाड़ी है, वह नेशनल में लगातार बेहद अच्छा खेल रहे हैं। इस बार उनको उम्मीद है कि सोनू का चयन भारत की टीम में हो सकता है।
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