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चंदे के पैसे से गांव के शमसान का कराया विकास
Updated Tue, 08 May 2018 12:05 AM IST
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उमेश त्यागी
बापौली। जिले के उझा गांव की पंचायत ने एक नई मिसाल पेश की है। यहां की पंचायत सरकार से आर्थिक मदद का इंतजार नहीं करती है। ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव से चंदा एकत्र कर एक-एक रुपये इकट्ठा करके यहां की पंचायत विकास कार्य करवा रही है। आज खुद के पैसों से श्मशान घाट का निर्माण, उसमें कमरा निर्माण, संस्कार के शेड और श्मशान के अंदर तीन सौ पौधे लगा कर हरियाली की गई है। इसमें गांव के ही अर्जुन उसके अंदर हर रोज सुबह-शाम चार घंटे पौधे की नुलाई, पानी देने संबंधी देखरेख कर रहे हैं। एक ऐसा पार्क तालाब की सफाई और स्कूल में स्टाफ के लिए एक कमरे तक का निर्माण हो चुका है और अन्य विकास कार्य भी ग्रामीण पैसा इकट्ठा करके खुद कर रहे हैं।
सिस्टम से मिलने वाली मदद के इंतजार करने वालों के सामने गांव उझा की पंचायत और ग्रामीणों ने एक मिसाल कायम की है। सरपंच धर्मबीर रावल इंसा ने बताया कि कुछ साल पहले तक गांव में श्मशान घाट तक का रास्ता नहीं था। गांव के लोगों ने शपथ ली की किसी की प्रशासन व सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद का इंतजार नहीं करेंगे। थोड़े थोड़े पैसे इकट्ठे करके यहां के लोगों ने विकास करवाना शुरू कर दिया। यहां तक कि स्कूल में स्टाफ के लिए बैठने तक का कमरा नहीं था। टीचर्स की प्रॉब्लम देखते हुए ग्रामीणों ने पैसा एकत्रित किया और स्कूल पूर्व इंचार्ज से मिल कर स्कूल में कमरा बनवा दिया। गांव के तालाब की हालत भी कुछ ऐसी थी लेकिन ग्रामीणों ने इसका भी समाधान खुद निकाल दिया । इस समय था जब गाव के श्मशान में लावारिस जानवर घूमते थे लेकिन आज पूरी काया बदल चुकी है। गांव की तस्वीर बदलती देख अब सिस्टम भी गांव की मदद करने को तैयार हो गया है। अर्जुन, गांव के लोगों का का कहना है कि हर बात के लिए सरकार को दोष नहीं देना चाहिए अगर स्वयं मिलकर काम करे तो पूरी तस्वीर बदल सकती है। जिस तरह उझा गांव की तस्वीर बदल रही है। पंचायत के साथ गांव के विकास में सहयोग करने वाले अर्जुनलाल, कृष्ण, भोपाल, सुरेश, देशराज, हरपाल, दलबीर, राजबीर, रकम, ईसपाल, रिशीपाल आदि रहे।
फोटो संख्या- 37
चंदे के पैसे से पंचायत पेश कर रही विकास की मिसाल
श्मशान घाट का निर्माण, कमरा निर्माण, संस्कार के शेड और श्मशान के अंदर तीन सौ पौधे लगा कर की हरियाली
बापौली। जिले के उझा गांव की पंचायत ने एक नई मिसाल पेश की है। यहां की पंचायत सरकार से आर्थिक मदद का इंतजार नहीं करती है। ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव से चंदा एकत्र कर एक-एक रुपये इकट्ठा करके यहां की पंचायत विकास कार्य करवा रही है। आज खुद के पैसों से श्मशान घाट का निर्माण, उसमें कमरा निर्माण, संस्कार के शेड और श्मशान के अंदर तीन सौ पौधे लगा कर हरियाली की गई है। इसमें गांव के ही अर्जुन उसके अंदर हर रोज सुबह-शाम चार घंटे पौधे की नुलाई, पानी देने संबंधी देखरेख कर रहे हैं। एक ऐसा पार्क तालाब की सफाई और स्कूल में स्टाफ के लिए एक कमरे तक का निर्माण हो चुका है और अन्य विकास कार्य भी ग्रामीण पैसा इकट्ठा करके खुद कर रहे हैं।
सिस्टम से मिलने वाली मदद के इंतजार करने वालों के सामने गांव उझा की पंचायत और ग्रामीणों ने एक मिसाल कायम की है। सरपंच धर्मबीर रावल इंसा ने बताया कि कुछ साल पहले तक गांव में श्मशान घाट तक का रास्ता नहीं था। गांव के लोगों ने शपथ ली की किसी की प्रशासन व सरकार की ओर से मिलने वाली आर्थिक मदद का इंतजार नहीं करेंगे। थोड़े थोड़े पैसे इकट्ठे करके यहां के लोगों ने विकास करवाना शुरू कर दिया। यहां तक कि स्कूल में स्टाफ के लिए बैठने तक का कमरा नहीं था। टीचर्स की प्रॉब्लम देखते हुए ग्रामीणों ने पैसा एकत्रित किया और स्कूल पूर्व इंचार्ज से मिल कर स्कूल में कमरा बनवा दिया। गांव के तालाब की हालत भी कुछ ऐसी थी लेकिन ग्रामीणों ने इसका भी समाधान खुद निकाल दिया । इस समय था जब गाव के श्मशान में लावारिस जानवर घूमते थे लेकिन आज पूरी काया बदल चुकी है। गांव की तस्वीर बदलती देख अब सिस्टम भी गांव की मदद करने को तैयार हो गया है। अर्जुन, गांव के लोगों का का कहना है कि हर बात के लिए सरकार को दोष नहीं देना चाहिए अगर स्वयं मिलकर काम करे तो पूरी तस्वीर बदल सकती है। जिस तरह उझा गांव की तस्वीर बदल रही है। पंचायत के साथ गांव के विकास में सहयोग करने वाले अर्जुनलाल, कृष्ण, भोपाल, सुरेश, देशराज, हरपाल, दलबीर, राजबीर, रकम, ईसपाल, रिशीपाल आदि रहे।
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फोटो संख्या- 37
चंदे के पैसे से पंचायत पेश कर रही विकास की मिसाल
श्मशान घाट का निर्माण, कमरा निर्माण, संस्कार के शेड और श्मशान के अंदर तीन सौ पौधे लगा कर की हरियाली