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-सेक्टर-छह निवासी कुलबीर सुखदेव नगर स्थित जितेंद्रा अस्पताल में कराया था अपनी पत्नी का ऑपरेशन
Updated Fri, 11 Aug 2017 12:40 AM IST
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फोटो-31
इलाज में लापरवाही बरतने पर अस्पताल संचालक डॉक्टर पर तीन लाख का जुर्माना
- जिला उपभोक्ता फोरम ने महिला के ऑपरेशन में लापरवाही का दोषी माना
- सेक्टर-छह निवासी कुलबीर ने सुखदेव नगर स्थित अस्पताल पर लगाया था ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप
- चार साल चला केस, लगीं 46 तारीखें, 5500 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत।
जिला उपभोक्ता फोरम ने सुखदेव नगर स्थित अस्पताल के संचालक डॉक्टर को महिला के ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का दोषी पाया है। उपभोक्ता फोरम ने अस्पताल संचालक पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने पर 5500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि अस्पताल पर लगाया जुर्माना इंश्योरेंस कंपनी देगी। महिला के पति ने डॉक्टर के खिलाफ पांच साल तक लंबी लड़ाई लड़ी। चार साल में उपभोक्ता फोरम ने मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान 46 तारीखें पड़ीं।
अस्पताल संचालक डॉक्टर पर आरोप है कि उसने महिला के पित्ते की थैली में पथरी के ऑपरेशन में लापरवाही बरती। ऑपरेशन के दौरान उसकी एक नस कट गई। डॉक्टर ने नस जोड़ने या उनको बताने की बजाय उसको क्लिप लगाकर ब्लॉक कर दिया। महिला का दिल्ली के एक अस्पताल में दोबारा ऑपरेशन कराना पड़ा। इसमें करीब सात लाख रुपये खर्च हुए। अस्पताल संचालक ने इस फैसले पर आगे अपील करने की बात कही है।
जिला उपभोक्ता फोरम के प्रेजीडेंट सुमीर सिंह ने निर्मल निवासी सेक्टर-छह हुडा की शिकायत पर तथ्यों के आधार पर जितेंद्र अस्पताल के संचालक डॉ. जितेंद्र व डॉ. प्रतिभा शर्मा की लापरवाही माना है। उपभोक्ता फोरम ने अपने फैसले में कहा कि डॉ. जितेंद्र ने शिकायतकर्ता के इलाज में लापरवाही बरती है। जिसके चलते उसको शारीरिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। फोरम ने मामले को देखते हुए अब तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं यह भी स्पष्ट किया कि डॉक्टर द्वारा इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी थी। जो 13 अगस्त 2011 से 12 अगस्त 2012 तक लागू थी। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनी इस जुर्माने को भरेगी। इंश्योरेंस कंपनी को 45 दिन के अंदर पीड़ित को यह राशि देनी होगी। इंश्योरेंस कंपनी को इसके बाद नौ रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से ब्याज देना होगा। फार्म ने इस मामले में शिकायतकर्ता को मानसिक रूप से परेशान करने के मामले में 5500 रुपये का जुर्माना लगाया।
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उपभोक्ता फोरम में मिली तारीख पर तारीख
महिला निर्मल देवी के पति कुलबीर सिंह ने अस्पताल संचालक के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के अलावा मेडिकल काउंसिल में भी शिकायत दी। उन्होंने इसके बाद जिला उपभोक्ता फोरम में 14 अक्तूबर 2013 को केस लगाया। फोरम ने इस मामले में शिकायतकर्ता, अस्पताल संचालक डॉक्टर व इंश्योरेंस कंपनी के वकील का पक्ष जाना। फार्म ने इस मामले में तारीख पर तारीख दी और मेडिकल पहलुओं की बारीकी को जाना। फार्म ने इस मामले में करीब 46 तारीख के बाद 28 जुलाई को फैसला दिया और नौ जुलाई को पीड़ित को फैसले की कॉपी उपलब्ध कराई।
यह है मामला
कुलबीर सिंह निवासी सेक्टर-छह ने जिला उपभोक्ता फोरम में दी शिकायत में बताया कि उसकी पत्नी निर्मल देवी की पित्त की थैली में पथरी थी। उसने जितेंद्रा अस्पताल में अपनी पत्नी का 18 मई 2012 को ऑपरेशन कराया था। डॉक्टर ने उसको 20 मई को छुट्टी दे दी थी। उसको घर जाते ही परेशानी होने लगी। वह अपनी पत्नी को लेकर जितेंद्रा अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर ने गैस की शिकायत बताकर दवाई दे दी। उसकी पत्नी को दर्द में किसी तरह का आराम नहीं मिला। वे कई बार डॉक्टर से मिलने गए, लेकिन उनको मिलने तक का समय नहीं दिया गया। वह अपनी पत्नी के इलाज के लिए कई अस्पतालों में गया। उसकी पत्नी को पीलिया, खुजली व सांस की बीमारी हो गई। वे आखिरकार एआईआईएमएस नई दिल्ली में पहुंचे। यहां पर चेकअप में ऑपरेशन के वक्त लापरवाही सामने आई। डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान लीवर के पास से सीबीडी नस कट गई थी। कुलबीर सिंह ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने उनको इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी। अस्पताल के डॉक्टरों ने रिपोर्ट में दिया कि नस को अंदर से क्लिप लगाकर बंद कर दिया था। इससे मरीज की धीरे-धीरे मौत भी हो सकती थी। एआईआईएमएस में दो अप्रैल 2013 को ऑपरेशन किया गया। इसमें उसका करीब सात लाख रुपये खर्च आया है और तीन माह तक नौकरी से छुट्टी भी लेनी पड़ी। यहीं नहीं अस्पताल संचालक डॉक्टर की लापरवाही व अनदेखी के चलते उसको मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
वर्जन
मरीज का अस्पताल में बेहतर ढंग से इलाज किया गया था। उसने इन सबके बाद दिल्ली में इलाज कराया। मैंने जिला उपभोक्ता फोरम चल रहे मामले की सुनवाई दूसरी जगह कराने की अपील की थी। वे इस केस की स्टेट कंज्यूमर फोरम में अपील करेंगे।
- डॉ. जितेंद्र कुमार, संचालक, जितेंद्रा अस्पताल पानीपत।
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इलाज में लापरवाही बरतने पर अस्पताल संचालक डॉक्टर पर तीन लाख का जुर्माना
- जिला उपभोक्ता फोरम ने महिला के ऑपरेशन में लापरवाही का दोषी माना
- सेक्टर-छह निवासी कुलबीर ने सुखदेव नगर स्थित अस्पताल पर लगाया था ऑपरेशन में लापरवाही का आरोप
- चार साल चला केस, लगीं 46 तारीखें, 5500 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत।
जिला उपभोक्ता फोरम ने सुखदेव नगर स्थित अस्पताल के संचालक डॉक्टर को महिला के ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का दोषी पाया है। उपभोक्ता फोरम ने अस्पताल संचालक पर तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा पीड़ित को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने पर 5500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि अस्पताल पर लगाया जुर्माना इंश्योरेंस कंपनी देगी। महिला के पति ने डॉक्टर के खिलाफ पांच साल तक लंबी लड़ाई लड़ी। चार साल में उपभोक्ता फोरम ने मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान 46 तारीखें पड़ीं।
अस्पताल संचालक डॉक्टर पर आरोप है कि उसने महिला के पित्ते की थैली में पथरी के ऑपरेशन में लापरवाही बरती। ऑपरेशन के दौरान उसकी एक नस कट गई। डॉक्टर ने नस जोड़ने या उनको बताने की बजाय उसको क्लिप लगाकर ब्लॉक कर दिया। महिला का दिल्ली के एक अस्पताल में दोबारा ऑपरेशन कराना पड़ा। इसमें करीब सात लाख रुपये खर्च हुए। अस्पताल संचालक ने इस फैसले पर आगे अपील करने की बात कही है।
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जिला उपभोक्ता फोरम के प्रेजीडेंट सुमीर सिंह ने निर्मल निवासी सेक्टर-छह हुडा की शिकायत पर तथ्यों के आधार पर जितेंद्र अस्पताल के संचालक डॉ. जितेंद्र व डॉ. प्रतिभा शर्मा की लापरवाही माना है। उपभोक्ता फोरम ने अपने फैसले में कहा कि डॉ. जितेंद्र ने शिकायतकर्ता के इलाज में लापरवाही बरती है। जिसके चलते उसको शारीरिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। फोरम ने मामले को देखते हुए अब तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं यह भी स्पष्ट किया कि डॉक्टर द्वारा इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी थी। जो 13 अगस्त 2011 से 12 अगस्त 2012 तक लागू थी। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनी इस जुर्माने को भरेगी। इंश्योरेंस कंपनी को 45 दिन के अंदर पीड़ित को यह राशि देनी होगी। इंश्योरेंस कंपनी को इसके बाद नौ रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से ब्याज देना होगा। फार्म ने इस मामले में शिकायतकर्ता को मानसिक रूप से परेशान करने के मामले में 5500 रुपये का जुर्माना लगाया।
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उपभोक्ता फोरम में मिली तारीख पर तारीख
महिला निर्मल देवी के पति कुलबीर सिंह ने अस्पताल संचालक के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग के अलावा मेडिकल काउंसिल में भी शिकायत दी। उन्होंने इसके बाद जिला उपभोक्ता फोरम में 14 अक्तूबर 2013 को केस लगाया। फोरम ने इस मामले में शिकायतकर्ता, अस्पताल संचालक डॉक्टर व इंश्योरेंस कंपनी के वकील का पक्ष जाना। फार्म ने इस मामले में तारीख पर तारीख दी और मेडिकल पहलुओं की बारीकी को जाना। फार्म ने इस मामले में करीब 46 तारीख के बाद 28 जुलाई को फैसला दिया और नौ जुलाई को पीड़ित को फैसले की कॉपी उपलब्ध कराई।
यह है मामला
कुलबीर सिंह निवासी सेक्टर-छह ने जिला उपभोक्ता फोरम में दी शिकायत में बताया कि उसकी पत्नी निर्मल देवी की पित्त की थैली में पथरी थी। उसने जितेंद्रा अस्पताल में अपनी पत्नी का 18 मई 2012 को ऑपरेशन कराया था। डॉक्टर ने उसको 20 मई को छुट्टी दे दी थी। उसको घर जाते ही परेशानी होने लगी। वह अपनी पत्नी को लेकर जितेंद्रा अस्पताल पहुंचा। डॉक्टर ने गैस की शिकायत बताकर दवाई दे दी। उसकी पत्नी को दर्द में किसी तरह का आराम नहीं मिला। वे कई बार डॉक्टर से मिलने गए, लेकिन उनको मिलने तक का समय नहीं दिया गया। वह अपनी पत्नी के इलाज के लिए कई अस्पतालों में गया। उसकी पत्नी को पीलिया, खुजली व सांस की बीमारी हो गई। वे आखिरकार एआईआईएमएस नई दिल्ली में पहुंचे। यहां पर चेकअप में ऑपरेशन के वक्त लापरवाही सामने आई। डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान लीवर के पास से सीबीडी नस कट गई थी। कुलबीर सिंह ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने उनको इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी। अस्पताल के डॉक्टरों ने रिपोर्ट में दिया कि नस को अंदर से क्लिप लगाकर बंद कर दिया था। इससे मरीज की धीरे-धीरे मौत भी हो सकती थी। एआईआईएमएस में दो अप्रैल 2013 को ऑपरेशन किया गया। इसमें उसका करीब सात लाख रुपये खर्च आया है और तीन माह तक नौकरी से छुट्टी भी लेनी पड़ी। यहीं नहीं अस्पताल संचालक डॉक्टर की लापरवाही व अनदेखी के चलते उसको मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
वर्जन
मरीज का अस्पताल में बेहतर ढंग से इलाज किया गया था। उसने इन सबके बाद दिल्ली में इलाज कराया। मैंने जिला उपभोक्ता फोरम चल रहे मामले की सुनवाई दूसरी जगह कराने की अपील की थी। वे इस केस की स्टेट कंज्यूमर फोरम में अपील करेंगे।
- डॉ. जितेंद्र कुमार, संचालक, जितेंद्रा अस्पताल पानीपत।