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रोडवेज की आठ यूनियनों ने प्राइवेट परमिटों के विरोध में किया था चक्का जाम
Updated Wed, 14 Jun 2017 07:47 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। रोडवेज कर्मचारियों की मांगों पर सरकार ने सहमति जताने के बाद यूनियन के पदाधिकारियों के कहने पर रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी। इसके बाद बुधवार को रोडवेज डिपो पानीपत से सुचारु रूप से बसें चलीं। बसों के चलने से लोगों ने राहत महसूस की। हड़ताल के कारण यात्रियों को सफर के लिए अधिक पैसे देने पड़ रहे थे।
रोडवेज की हड़ताल होने के बाद कुछ देर बाद ही मंगलवार को सरकार ने हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल यूनियन के पदाधिकारियों को बातचीत के लिए तीन बजे चंडीगढ़ बुलाया। मीटिंग में यूनियन ने सर्वप्रथम नई पॉलिसी रद्द करने की मांग रखी और प्राइवेट बसों को हरियाणा के किसी भी रोडवेज डिपो में अंदर नहीं जाने का प्रस्ताव रखा। इस पर सरकार ने सहमति जताई। कहा कि नई पॉलिसी में कुछ बदलाव यूनियन के पदाधिकारियों की देखरेख में ही किए जाएंगे। इसके बाद पदाधिकारियों के कहने पर यूनियनों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली और बुधवार से बसें सड़कों पर आ गईं। रोडवेज की आठ यूनियनों ने एकजुट होकर प्राइवेट परमिटों के विरोध में चक्का जाम किया था। चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल अनिश्चित कालीन तक जारी रह सकती है। हड़ताल के कारण हरियाणा रोडवेज की एक भी बस नहीं चली थी। इस कारण हरियाणा के प्रत्येक डिपो को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। हरियाणा के प्रत्येक डिपो की एक दिन कमाई करीब 10 लाख से ऊपर होती है। एक दिन में पानीपत डिपो को ही करीब 12 लाख का नुकसान हुआ है। इस बारे में रोडवेज पानीपत डिपो के जीएम एके डोगरा ने बताया कि सरकार द्वारा यूनियन कर्मचारियों की मांग मान लेने के कारण हड़ताल खत्म हो चुकी है। इसें बाद बुधवार से डिपो की सभी बसें सुचारु रूप से अपने निर्धारित समय पर चल रही हैं।
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पानीपत। रोडवेज कर्मचारियों की मांगों पर सरकार ने सहमति जताने के बाद यूनियन के पदाधिकारियों के कहने पर रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी। इसके बाद बुधवार को रोडवेज डिपो पानीपत से सुचारु रूप से बसें चलीं। बसों के चलने से लोगों ने राहत महसूस की। हड़ताल के कारण यात्रियों को सफर के लिए अधिक पैसे देने पड़ रहे थे।
रोडवेज की हड़ताल होने के बाद कुछ देर बाद ही मंगलवार को सरकार ने हरियाणा रोडवेज कर्मचारी तालमेल यूनियन के पदाधिकारियों को बातचीत के लिए तीन बजे चंडीगढ़ बुलाया। मीटिंग में यूनियन ने सर्वप्रथम नई पॉलिसी रद्द करने की मांग रखी और प्राइवेट बसों को हरियाणा के किसी भी रोडवेज डिपो में अंदर नहीं जाने का प्रस्ताव रखा। इस पर सरकार ने सहमति जताई। कहा कि नई पॉलिसी में कुछ बदलाव यूनियन के पदाधिकारियों की देखरेख में ही किए जाएंगे। इसके बाद पदाधिकारियों के कहने पर यूनियनों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली और बुधवार से बसें सड़कों पर आ गईं। रोडवेज की आठ यूनियनों ने एकजुट होकर प्राइवेट परमिटों के विरोध में चक्का जाम किया था। चेतावनी दी थी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो हड़ताल अनिश्चित कालीन तक जारी रह सकती है। हड़ताल के कारण हरियाणा रोडवेज की एक भी बस नहीं चली थी। इस कारण हरियाणा के प्रत्येक डिपो को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। हरियाणा के प्रत्येक डिपो की एक दिन कमाई करीब 10 लाख से ऊपर होती है। एक दिन में पानीपत डिपो को ही करीब 12 लाख का नुकसान हुआ है। इस बारे में रोडवेज पानीपत डिपो के जीएम एके डोगरा ने बताया कि सरकार द्वारा यूनियन कर्मचारियों की मांग मान लेने के कारण हड़ताल खत्म हो चुकी है। इसें बाद बुधवार से डिपो की सभी बसें सुचारु रूप से अपने निर्धारित समय पर चल रही हैं।
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