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विरात्रि पर निरजल व्रत रख पूजा करने से मिलेगा पुण्य
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:14 AM IST
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शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का संयोग, भगवान शिव देंगे अक्षय फल
अमर उजाला ब्यूूरो
पानीपत।
आज शिवरात्रि पर्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार शिवरात्रि श्रद्धालुओं के लिए खास संयोग लेकर आई है। इस दिन निर्जल व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी। शिवरात्रि को लेकर शहर के साथ-साथ कस्बों व गांवों में भी मंदिरों को सजाया गया है और विशेष तैयारियां की गई हैं।
पंडितों के अनुसार, शिवरात्रि पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। 13 फरवरी को प्रदोष युक्त चतुर्दशी होने के कारण इस बार महाशिवरात्रि अति उत्तम है। इस दिन प्रदोष व्रत भी है। कहा जाता है कि प्रदोष का व्रत रहने से भगवान शिव की भक्ति का लाख गुना अधिक फल मिलता है। इस बार महाशिवरात्रि के साथ ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इसलिए इस बार की महाशिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है।
इससे अलग, कई स्थानों पर 14 फरवरी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। शिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कांवड़िये भी गंगा जल लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। पंडित के अनुसार, शिवरात्रि को महारात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
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बाक्स
इन चार पहर में कर सकते हैं पूजा
पंडित राजकुमार के अनुसार, भगवान शिव की पूजा करने का शुभ समय चार पहर में है। इन चारों पहर में शिवभक्त भगवान शिव के अराधना फल की प्राप्ति कर सकते हैं। पहला पहर 13 फरवरी शाम 6 बजे से 9 बजे तक, दूसरा रात 9 बजे से 12 बजे तक, तीसरा पहर 14 फरवरी रात 12 बजे से 3 बजे तक है।
भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक करना और बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। पंडित जी के अनुसार, शिव भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखें तो उन्हें बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होगी। इस व्रत में फल ग्रहण कर सकते हैं। श्रद्धालु सुबह शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की अराधना करें और शिव की पूजा में गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर गन्ने के रस आदि से अभिषेक करें। भांग धतूरा अनेक प्रकार के फल व मिष्ठान्न आदि का भोग लगाएं।
बाक्स
कांवड़ लेकर आ रहे हैं शिव भक्त महाशिवरात्रि को लेकर शिव भक्तों में काफी उत्साह है। शिवभक्त हरिद्वार से कांवड़ लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। शहर व आस-पास के क्षेत्र में सामाज सेवियों द्वारा शिविर लगाकर कांवड़ियों की सेवा की जा रही है। कांवड़िये भोलेनाथ के उद्घोष लगाते हुए अपने शहर व गांवों की तरफ जा रहे हैं, जो मंगलवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक करेंगे।।
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अमर उजाला ब्यूूरो
पानीपत।
आज शिवरात्रि पर्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार शिवरात्रि श्रद्धालुओं के लिए खास संयोग लेकर आई है। इस दिन निर्जल व्रत रखने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी। शिवरात्रि को लेकर शहर के साथ-साथ कस्बों व गांवों में भी मंदिरों को सजाया गया है और विशेष तैयारियां की गई हैं।
पंडितों के अनुसार, शिवरात्रि पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। 13 फरवरी को प्रदोष युक्त चतुर्दशी होने के कारण इस बार महाशिवरात्रि अति उत्तम है। इस दिन प्रदोष व्रत भी है। कहा जाता है कि प्रदोष का व्रत रहने से भगवान शिव की भक्ति का लाख गुना अधिक फल मिलता है। इस बार महाशिवरात्रि के साथ ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इसलिए इस बार की महाशिवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है।
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इससे अलग, कई स्थानों पर 14 फरवरी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। शिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कांवड़िये भी गंगा जल लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। पंडित के अनुसार, शिवरात्रि को महारात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे।
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इन चार पहर में कर सकते हैं पूजा
पंडित राजकुमार के अनुसार, भगवान शिव की पूजा करने का शुभ समय चार पहर में है। इन चारों पहर में शिवभक्त भगवान शिव के अराधना फल की प्राप्ति कर सकते हैं। पहला पहर 13 फरवरी शाम 6 बजे से 9 बजे तक, दूसरा रात 9 बजे से 12 बजे तक, तीसरा पहर 14 फरवरी रात 12 बजे से 3 बजे तक है।
भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक करना और बिल्व पत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। पंडित जी के अनुसार, शिव भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखें तो उन्हें बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होगी। इस व्रत में फल ग्रहण कर सकते हैं। श्रद्धालु सुबह शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की अराधना करें और शिव की पूजा में गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर गन्ने के रस आदि से अभिषेक करें। भांग धतूरा अनेक प्रकार के फल व मिष्ठान्न आदि का भोग लगाएं।
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कांवड़ लेकर आ रहे हैं शिव भक्त महाशिवरात्रि को लेकर शिव भक्तों में काफी उत्साह है। शिवभक्त हरिद्वार से कांवड़ लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। शहर व आस-पास के क्षेत्र में सामाज सेवियों द्वारा शिविर लगाकर कांवड़ियों की सेवा की जा रही है। कांवड़िये भोलेनाथ के उद्घोष लगाते हुए अपने शहर व गांवों की तरफ जा रहे हैं, जो मंगलवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक करेंगे।।