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134ए : निजी स्कूल अब एडमिशन कर रहे रद्द
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पानीपत। शिक्षा नियमवली 134ए के तहत अपने बच्चों का दाखिला आवंटित स्कूलों में करवाने को लेकर अभिभावकों की मुश्किलें लगातार बढ़ी हुई हैं। जहां अब तक कुछ प्रमुख निजी स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों को दाखिला देने में बहानेबाजी की जा रही थी, वहीं अब कुछ निजी स्कूलों द्वारा बच्चों का दाखिला रद्द किया जा रहा है।
इसके पीछे निजी विद्यालयों द्वारा संबंधित विद्यार्थी की पारिवारिक आय को निर्धारित सीमा से अधिक बताया जा रहा है। वहीं, कुछ निजी स्कूलों द्वारा नोटिस चिपकाए जाने की सूचना है जिसमें कहा जा रहा है कि विद्यार्थी अथवा अभिभावक द्वारा दाखिले के लिए स्कूल से संपर्क ही नहीं किया गया। नियम 134ए के तहत अलॉट निजी स्कूलों में दाखिले की अंतिम तिथि 15 जनवरी है और तिथि बढ़ाए जाने पर भी संशय है।
इससे अभिभावकों की परेशानियां बढ़ गई हैं। वहीं, आक्रोशित अभिभावकों ने अब निजी स्कूलों के खिलाफ लामबंद होने की तैयारी कर ली है। अभिभावकों का कहना है कि शनिवार को अभिभावक संबंधित निजी स्कूलों के बाहर एकत्रित होकर स्कूल के गेट पर धरना देंगे। वहीं, अभिभावकों द्वारा शिक्षा अधिकारियों तथा निजी स्कूलों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
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निजी स्कूलों पर मकानों की जांच का भी आरोप
अभिभावकों का आरोप है कि कुछ निजी स्कूल बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। निजी स्कूलों के कर्मचारी अभिभावकों के घर जाते हैं तथा फोटो व वीडियोग्राफी कर रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार यह जरूरी नहीं है कि जिस घर में मोटरसाइकिल या फ्रिज है तो वह अमीर है। ऐसे संसाधन किस्तों पर अथवा पुराने भी खरीदे जा सकते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को एंड्रायड फोन भी खरीदकर देने पड़े हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि वह साधन संपन्न है।
मनचाहे स्कूल में नंबर न आने पर भी पीछे हटे अभिभावक
कुछ अभिभावक ऐसे भी हैं जिनके बच्चों का नंबर मनचाहे स्कूल में नहीं हुआ। एक स्कूल में सीटें पूरी होने पर उनके लिए आसपास का दूसरा स्कूल आवंटित किया गया। मनचाहे स्कूल में नंबर न पड़ने पर भी अभिभावकों ने आवंटित स्कूल में दाखिला कराने से अपने हाथ पीछे खींचे। अभिभावक दिनेश ने बताया कि उसकी 7 साल की बेटी का नंबर करीब 8 किलोमीटर दूर एक निजी स्कूल में पड़ा, लेकिन इतनी छोटी बच्ची को दूर भेजना मुनासिब नहीं समझा।
तीन सदस्यीय कमेटी भी कर रही जांच
दाखिला प्रक्रिया को लेकर निजी स्कूलों और अभिभावकों के बीच जारी खींचतान के बीच सरकार की ओर से जिलास्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए थे। गठित कमेटी द्वारा अभिभावकों की आय की जांच भी की जा रही हैं। वहीं, शिक्षा विभाग भी उन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है जो बेवजह बच्चों को दाखिला देने से बचने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करने बारे भी लिख सकता है।
अभिभावक निजी स्कूलों में जाकर अपने बच्चों को दाखिला दिलाएं। यदि कोई स्कूल दाखिला नहीं देगा तो शिक्षा निदेशालय को स्कूल के खिलाफ कार्रवाई के बारे में लिखा जाएगा। गठित कमेटी द्वारा जांच की जा रही है। निजी स्कूलों को भी चाहिए कि वे बच्चों के जो दस्तावेज मान्य हैं, वहीं लें। अभिभावकों को दाखिले के नाम पर परेशान न किया जाए।
- बृजमोहन गोयल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
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इसके पीछे निजी विद्यालयों द्वारा संबंधित विद्यार्थी की पारिवारिक आय को निर्धारित सीमा से अधिक बताया जा रहा है। वहीं, कुछ निजी स्कूलों द्वारा नोटिस चिपकाए जाने की सूचना है जिसमें कहा जा रहा है कि विद्यार्थी अथवा अभिभावक द्वारा दाखिले के लिए स्कूल से संपर्क ही नहीं किया गया। नियम 134ए के तहत अलॉट निजी स्कूलों में दाखिले की अंतिम तिथि 15 जनवरी है और तिथि बढ़ाए जाने पर भी संशय है।
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इससे अभिभावकों की परेशानियां बढ़ गई हैं। वहीं, आक्रोशित अभिभावकों ने अब निजी स्कूलों के खिलाफ लामबंद होने की तैयारी कर ली है। अभिभावकों का कहना है कि शनिवार को अभिभावक संबंधित निजी स्कूलों के बाहर एकत्रित होकर स्कूल के गेट पर धरना देंगे। वहीं, अभिभावकों द्वारा शिक्षा अधिकारियों तथा निजी स्कूलों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।
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निजी स्कूलों पर मकानों की जांच का भी आरोप
अभिभावकों का आरोप है कि कुछ निजी स्कूल बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। निजी स्कूलों के कर्मचारी अभिभावकों के घर जाते हैं तथा फोटो व वीडियोग्राफी कर रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार यह जरूरी नहीं है कि जिस घर में मोटरसाइकिल या फ्रिज है तो वह अमीर है। ऐसे संसाधन किस्तों पर अथवा पुराने भी खरीदे जा सकते हैं। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए बच्चों को एंड्रायड फोन भी खरीदकर देने पड़े हैं। इसका यह अर्थ नहीं है कि वह साधन संपन्न है।
मनचाहे स्कूल में नंबर न आने पर भी पीछे हटे अभिभावक
कुछ अभिभावक ऐसे भी हैं जिनके बच्चों का नंबर मनचाहे स्कूल में नहीं हुआ। एक स्कूल में सीटें पूरी होने पर उनके लिए आसपास का दूसरा स्कूल आवंटित किया गया। मनचाहे स्कूल में नंबर न पड़ने पर भी अभिभावकों ने आवंटित स्कूल में दाखिला कराने से अपने हाथ पीछे खींचे। अभिभावक दिनेश ने बताया कि उसकी 7 साल की बेटी का नंबर करीब 8 किलोमीटर दूर एक निजी स्कूल में पड़ा, लेकिन इतनी छोटी बच्ची को दूर भेजना मुनासिब नहीं समझा।
तीन सदस्यीय कमेटी भी कर रही जांच
दाखिला प्रक्रिया को लेकर निजी स्कूलों और अभिभावकों के बीच जारी खींचतान के बीच सरकार की ओर से जिलास्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए थे। गठित कमेटी द्वारा अभिभावकों की आय की जांच भी की जा रही हैं। वहीं, शिक्षा विभाग भी उन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है जो बेवजह बच्चों को दाखिला देने से बचने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करने बारे भी लिख सकता है।
अभिभावक निजी स्कूलों में जाकर अपने बच्चों को दाखिला दिलाएं। यदि कोई स्कूल दाखिला नहीं देगा तो शिक्षा निदेशालय को स्कूल के खिलाफ कार्रवाई के बारे में लिखा जाएगा। गठित कमेटी द्वारा जांच की जा रही है। निजी स्कूलों को भी चाहिए कि वे बच्चों के जो दस्तावेज मान्य हैं, वहीं लें। अभिभावकों को दाखिले के नाम पर परेशान न किया जाए।
- बृजमोहन गोयल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।