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रोडवेज की हड़ताल का 25 साल पुराना रिकार्ड टूटा, तीन यूनियन नेता रात को गिरफ्तार, आक्रोशित यूनियन नेता जल्द लेंगे कड़ा फैसला

Mon, 29 Oct 2018 12:19 AM IST
Updated Mon, 29 Oct 2018 12:19 AM IST
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रोडवेज की हड़ताल का 25 साल पुराना रिकार्ड टूटा, तीन यूनियन नेता रात को गिरफ्तार, आक्रोशित यूनियन नेता जल्द लेंगे कड़ा फैसला
रोडवेज की हड़ताल का 25 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, तीन यूनियन नेता रात को गिरफ्तार, आक्रोशित यूनियन नेता जल्द लेंगे कड़ा फैसला
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पानीपत। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को 13 दिन पूरे हो चुके हैं, जोकि हरियाणा के इतिहास में दूसरी बार ऐसा हुआ है। 25 साल पहले 1993 में भजनलाल सरकार में हरियाणा के इतिहास की सबसे लंबी स्ट्राइक चली थी, जिसमें तत्काल मुख्यमंत्री भजनलाल ने 13वें दिन सभी हड़ताली कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था व नई भर्ती शुरू कर दी थी, जिसके बाद हड़ताल खुल गई थी। वर्तमान में भी हड़ताल को 13 दिन हो चुके हैं। आज हड़ताल को 14वां दिन है। इतनी लंबी स्ट्राइक चलने के बाद भी सरकार व कर्मचारियों में कोई समझौता नहीं हो पा रहा है। वहीं हड़ताल के 13वें दिन प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाते हुए, कर्मचारी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू कर दी गई। जिससे कर्मचारियों में रोष और अधिक बढ़ गया है। वैसे तो कर्मचारी नेताओं की तरफ से दिये गये समय के हिसाब से आज हड़ताल का अंतिम दिन बनता है, परंतु वर्तमान स्थिति को देखकर लग रहा है कि हड़ताल और अधिक लंबी चल सकती हैं। दोनों पक्षों में से काई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं है।
क्या हुआ था 1993 में :
25 साल पहले 1993 में भजनलाल की सरकार द्वारा 925 निजी बसों को परमिट देने की पॉलिसी बनाई गई थी, जिसके बाद सभी रोडवेज कर्मचारी स्ट्राइक पर चले गये थे। उस समय भी वर्तमान में चल रही हड़ताल की तरह रोडवेज कर्मचारियों के साथ अलग-अलग जनसंगठन साथ आ गये थे। इतनी लंबी हड़ताल को तोड़ने के लिए सरकार ने लगभग 35 हजार कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। साथ में आनन-फानन में नई भर्ती भी चालू कर दी गई थी, जिसके बाद कर्मचारी हड़ताल से लोट आए और सभी को कर्मचारियों को फिर से नौकरी पर बहाल कर दिया गया। उस समय 925 बसों को परमिट देने में सरकार कामयाब रही थी, लेकिन कर्मचारियों की माने तो उस हड़ताल के कारण ही भजनलाल से सत्ता छिनी थी।
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हड़ताल को कमजोर करने के लिए 3 कर्मचारी नेताओं को किया गया रात को गिर तार
प्रशासन द्वारा हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कड़े फैसले लेने शुरू कर दिये हैं। शुक्रवार रात को पुलिस प्रशासन द्वारा पानीपत में तीन यूनियनों के नेताओं को गिर तार कर लिया गया। सभी को उनके घर से ही पुलिस ने गिर तार किया। इंटक प्रधान रिंकु राजा को रात साढ़े सात बजे उनके निवास स्थान इसराना से, एसकेएस प्रधान सुल्तान मलिक को रात साढ़े ग्यारह बजे उनके निवास स्थान लाखुबुआना से व सर्व कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान चरणजीत सिंह को रात दस बजे उनके निवास स्थान नौल्था से गिन तार किया गया। गिर तारी के बाद शनिवार दौपहर 12 बजे उनका मेडिकल करवाकर मधुबन भेज दिया गया।
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कर्मचारी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद कर्मचारियों में रोष :
पुलिस द्वारा कर्मचारी नेताओं को गिर तार करने के बाद कर्मचारियों में रोष हैं। सिविल अस्पताल में एकत्रित हुए कर्मचारियों ने कहा कि वो नेताओं की गिरफ्तारियों के बाद भी कमजोर नहीं पड़ने वाले हैं। कर्मचारी सुभाष व सोमबीर दहिया ने कहा कि सरकार उनके खिलाफ दमनकारी नीति अपना रही है। सरकार का यह कदम सरकार को पतन की तरफ लेकर जा रहा है। उनके नेताओं को गिर तार करने से हड़ताल ठंडी नहीं पड़ने वाली है, इससे आंदोलन और अधिक तेज होगा। हड़ताल खुलवाने का एक ही रास्ता है कि सरकार 720 निजी बसों के परमिट रद्द कर दें। यह पॉलिसी सरकार ने अपने चहेतों के लिए बनाई है।
13वेें दिन हड़ताल का हाल :
13 वें दिन भी हड़ताल पर 189 परिचालक व 139 चालक डटे हुए हैं। इसके अलावा कुछ सबइंस्पेक्टर, स्टेनो, डीआई सैक्सन से कर्मचारी, वर्कशॉप से मकेनिक ज्यों के त्यों स्ट्राइक पर बने हुए है। वहीं डिपो में नई भर्ती करके व बसों का संचालन करके स्थिती सामान्य बनाने के प्रयास जारी है, लेकिन गाड़ी पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। रोजाना 100 से अधिक बसों का संचालन तो किया जा रहा है, लेकिन दोपहर तक लगभग सभी बसें अपना एक- एक चक्कर पूरा करके डिपो में आकर खड़ी हो जाती हैं।

ठेकेदार के माध्यम से लिए गए चालक घटाए, एसपीओ की संख्या भी घटाई:
आउट सोर्सिंग से लिए गये 94 चालकों में से केवल 70 को ही रखा गया है, वहीं निकाले गये चालक इस कार्यवाही से नाराज दिखे। डीआई कपूर चंद ने कहा कि हमारे पास कुछ पुराने चालक आ गये हैं, जिस कारण इनकों निकाल दिया गया हैं। जैसे-जैसे कर्मचारी स्ट्राइक से लोटेंगे इन सबको निकाल दिया जाएगा। वहीं दूसरी और एसपीओ की संख्या भी 84 से 50 पर आ गई है। डिपो द्वारा आउट सोर्सिंग पोलिसी के तहत ठेकेदार के माध्यम से नए परिचालक भर्ती किये जा रहे हैं।
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