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-जिले के करीब 130 अस्पतालों के करीब 430 डॉक्टर हड़ताल पर रहे
Updated Sat, 16 Dec 2017 12:23 AM IST
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निजी अस्पताल रहे बंद, सरकारी अस्पतालों में भीड़, मरीज रहे परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिले के प्राइवेट अस्पताल संचालक आईएमए के आह्वान पर शुक्रवार को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में उतर आए और एक दिन की हड़ताल रखकर रोष प्रकट किया। हड़ताल में 130 निजी अस्पतालों के 430 डॉक्टर शामिल हुए। प्राइवेट अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी तक बंद रखी। ऐसे में मरीजों को इलाज को लेकर इधर उधर चक्कर काटने पड़े। वहीं आईएमए ने जीटी रोड पर जुलूस निकालने के दौरान एक मिनट तक बस स्टैंड के बाहर खड़े होकर रोष प्रकट किया और एडीसी के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
आईएमए के बैनर तले डॉक्टर शुक्रवार सुबह हड़ताल कर स्काईलार्क रिसॉर्ट में जुटे। यहां आईएमए के प्रधान डॉ. श्याम कालड़ा ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के बारे में विस्तार से बताया और इसके लागू होने पर अस्पतालों के सामने आने वाली परेशानियों को बताया। डॉक्टर एक्ट को लागू करने पर अफसोस व्यक्त किया। डॉक्टर यहां से जुलूस के रूप में जीटी रोड, सिविल अस्पताल व बस स्टैंड पर पहुंचे। डॉक्टरों ने बस स्टैंड के बाहर जीटी रोड पर एक मिनट खड़े होकर रोष प्रकट किया। वे यहां से प्रदर्शन करते बीएसएनएल यू-टर्न से वापस होकर लघु सचिवालय पहुंचे। आईएमए के एडीसी राजीव मेहता के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। डॉक्टर इसके बाद शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी के आवास पर पहुंचे।
इसलिए किया विरोध
डॉक्टर बोले- ऐसे तो अस्पतालों पर लटक जाएंगे ताले
डॉ. डीके सिंह, डॉ. आरपी जिंदल व डॉ. पंकज मुटनेजा ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता को सरकारी खर्च पर स्वास्थ्य सेवाएं देने में विफल हो चुकी है। इसलिए यह काला एक्ट लागू किया गया है। वहीं यह एक्ट निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉर्पोरेट अस्पतालों के दबाव में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू कर रही है। इस एक्ट का सीधा हमला आम आदमी के उपचार पर है। ऐसे में निजी अस्पतालों पर ताले लटक जाएंगे।
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हर रोज होती है एक हजार की ओपीडी
जिले में 130 प्राइवेट अस्पताल हैं। यहां पर हर रोज करीब एक हजार ओपीडी होती है, लेकिन शुक्रवार को प्राइवेट अस्पतालों में एक भी ओपीडी नहीं हुई। वहीं इमरजेंसी के मरीजों का भी इलाज नहीं किया गया। अस्पतालों में केवल पहले सेे उपचाराधीन मरीजों का इलाज किया गया। शहर के एक निजी अस्पताल में चाकू लगने से घायल युवक को लाया गया, लेकिन अस्पताल ने उसको दाखिल करने से साफ इनकार कर दिया। मॉडल टाउन स्थित एक अस्पताल में हड़ताल के दौरान पांच मरीज इमरजेंसी में पहुंचे, लेकिन उनको अंदर दाखिल तक नहीं होने दिया गया।
सिविल अस्पताल में कुर्सी पर नहीं मिले कई चिकित्सक
सिविल अस्पताल में शुक्रवार को प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल के चलते ओपीडी तक नहीं संभल पाई। सिविल अस्पताल के कई डॉक्टर अपनी सीट पर भी नहीं मिले। ऐसे में मरीजों को ओपीडी की पर्ची बनवाने के बाद भी डॉक्टरों को तलाश कर इलाज कराना पड़ा। वहीं एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल से लौटने के बाद भी अस्पताल में इलाज बेहतर नहीं हो पाया। सिविल अस्पताल से रेफर कर मरीजों को परिजन अंदर व बाहर ले जाते रहे। अस्पताल से मरीजों को पीजीआई खानपुर व रोहतक रेफर कर दिया गया, लेकिन परिजन वहां ले जाने की बजाय प्राइवेट में ही ले जाने के प्रबंध करते रहे। सड़क हादसों में घायल कई मरीज स्ट्रेचर पर लेकर परिजन घूमते रहे।
प्राइवेट अस्पताल संचालक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। सिविल अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी में हर संभव इलाज दिया गया। अस्पताल में मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी गई।
डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ, पानीपत।
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। जिले के प्राइवेट अस्पताल संचालक आईएमए के आह्वान पर शुक्रवार को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में उतर आए और एक दिन की हड़ताल रखकर रोष प्रकट किया। हड़ताल में 130 निजी अस्पतालों के 430 डॉक्टर शामिल हुए। प्राइवेट अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी तक बंद रखी। ऐसे में मरीजों को इलाज को लेकर इधर उधर चक्कर काटने पड़े। वहीं आईएमए ने जीटी रोड पर जुलूस निकालने के दौरान एक मिनट तक बस स्टैंड के बाहर खड़े होकर रोष प्रकट किया और एडीसी के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
आईएमए के बैनर तले डॉक्टर शुक्रवार सुबह हड़ताल कर स्काईलार्क रिसॉर्ट में जुटे। यहां आईएमए के प्रधान डॉ. श्याम कालड़ा ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के बारे में विस्तार से बताया और इसके लागू होने पर अस्पतालों के सामने आने वाली परेशानियों को बताया। डॉक्टर एक्ट को लागू करने पर अफसोस व्यक्त किया। डॉक्टर यहां से जुलूस के रूप में जीटी रोड, सिविल अस्पताल व बस स्टैंड पर पहुंचे। डॉक्टरों ने बस स्टैंड के बाहर जीटी रोड पर एक मिनट खड़े होकर रोष प्रकट किया। वे यहां से प्रदर्शन करते बीएसएनएल यू-टर्न से वापस होकर लघु सचिवालय पहुंचे। आईएमए के एडीसी राजीव मेहता के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। डॉक्टर इसके बाद शहरी विधायक रोहिता रेवड़ी के आवास पर पहुंचे।
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इसलिए किया विरोध
डॉक्टर बोले- ऐसे तो अस्पतालों पर लटक जाएंगे ताले
डॉ. डीके सिंह, डॉ. आरपी जिंदल व डॉ. पंकज मुटनेजा ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता को सरकारी खर्च पर स्वास्थ्य सेवाएं देने में विफल हो चुकी है। इसलिए यह काला एक्ट लागू किया गया है। वहीं यह एक्ट निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉर्पोरेट अस्पतालों के दबाव में क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू कर रही है। इस एक्ट का सीधा हमला आम आदमी के उपचार पर है। ऐसे में निजी अस्पतालों पर ताले लटक जाएंगे।
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हर रोज होती है एक हजार की ओपीडी
जिले में 130 प्राइवेट अस्पताल हैं। यहां पर हर रोज करीब एक हजार ओपीडी होती है, लेकिन शुक्रवार को प्राइवेट अस्पतालों में एक भी ओपीडी नहीं हुई। वहीं इमरजेंसी के मरीजों का भी इलाज नहीं किया गया। अस्पतालों में केवल पहले सेे उपचाराधीन मरीजों का इलाज किया गया। शहर के एक निजी अस्पताल में चाकू लगने से घायल युवक को लाया गया, लेकिन अस्पताल ने उसको दाखिल करने से साफ इनकार कर दिया। मॉडल टाउन स्थित एक अस्पताल में हड़ताल के दौरान पांच मरीज इमरजेंसी में पहुंचे, लेकिन उनको अंदर दाखिल तक नहीं होने दिया गया।
सिविल अस्पताल में कुर्सी पर नहीं मिले कई चिकित्सक
सिविल अस्पताल में शुक्रवार को प्राइवेट अस्पतालों की हड़ताल के चलते ओपीडी तक नहीं संभल पाई। सिविल अस्पताल के कई डॉक्टर अपनी सीट पर भी नहीं मिले। ऐसे में मरीजों को ओपीडी की पर्ची बनवाने के बाद भी डॉक्टरों को तलाश कर इलाज कराना पड़ा। वहीं एनएचएम कर्मचारियों के हड़ताल से लौटने के बाद भी अस्पताल में इलाज बेहतर नहीं हो पाया। सिविल अस्पताल से रेफर कर मरीजों को परिजन अंदर व बाहर ले जाते रहे। अस्पताल से मरीजों को पीजीआई खानपुर व रोहतक रेफर कर दिया गया, लेकिन परिजन वहां ले जाने की बजाय प्राइवेट में ही ले जाने के प्रबंध करते रहे। सड़क हादसों में घायल कई मरीज स्ट्रेचर पर लेकर परिजन घूमते रहे।
प्राइवेट अस्पताल संचालक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर थे। सिविल अस्पताल में ओपीडी व इमरजेंसी में हर संभव इलाज दिया गया। अस्पताल में मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी गई।
डॉ. संतलाल वर्मा, सीएमओ, पानीपत।