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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ऑटोमोबाइल शोरूम के दो सर्विस सेंटर समेत 6 डाईंग यूनिट को बंद करने व गुप्ता इंटरनेशनल को कारण
Updated Sat, 04 Aug 2018 12:44 AM IST
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दो सर्विस सेंटर समेत छह डाइंग यूनिट को बंद करने के निर्देश
-केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड ने अब तक 20 डाइंग यूनिटों व दो सर्विस सेंटर को बंद करने और 25 को दिया है कारण बताओ नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पानीपत में प्रदूषण फैलने वाले डाइंग हाउस में और अधिक सख्त हो गया है। बोर्ड ने जिले की दो ऑटोमोबाइल कंपनी के शोरूम समेत छह और डाइंग यूनिटों को बंद करने व गुप्ता इंटरनेशनल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इससे पहले बोर्ड पानीपत थर्मल पावर स्टेशन को भी 31 दिसंबर 2019 तक सभी मानक पूरे करने के निर्देश देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।
दो माह में केंद्रीय बोर्ड पानीपत में ऑटोमोबाइल कंपनी के सर्विस सेंटर समेत 22 यूनिटों को बंद करने व 25 को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है। जिले में 800 से अधिक डाइंग यूनिट चल रही हैं। जबकि प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड के पास महज 415 यूनिट ही रजिस्टर्ड हैं। ये 415 यूनिट सेक्टर 25 व सेक्टर 29 के पार्ट टू में हैं।
42 एमएलडी पानी रोज निकल रहा डाइंग यूनिट से
सेक्टर-29 में स्थित सवा 400 डाइंग यूनिट से हर रोज 42 एमएलडी पानी निकलता है, जबकि सेक्टर-29 में एक ही एसटीपी है। इसकी क्षमता 21 एमएलटी है। ये प्लांट भी फेल हो चुका है, इसमें से पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बह रहा है। इसलिए सीवर ओवरफ्लो हो रहे हैं और पानी सड़कों पर बह रहा है। काफी डाइंग यूनिट ने प्लॉटों में ही केमिकल युक्त पानी छोड़ दिया है।
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31 अगस्त को होगा नए एसटीपी का उद्घाटन
सेक्टर-29 में बन रहे नए एसटीपी को बनने में अभी दो माह लगेंगे। प्रशासन ने इसको तैयार करने का ठेका दिल्ली की कंपनी को दिया है। यहां पर 18 एकड़ में सीईटीपी बन रहा है। 42 करोड़ में ये प्लांट बनकर तैयार हुआ है। एक अप्रैल तक ये प्लांट बनकर तैयार होना था, लेकिन प्लांट के ऊपर से गुजर रही 33 हजार केवी की बिजली की लाइन को हटाने में काफी समय लगा। अब इसको 31 अगस्त तक पूरा करना है। इसकी क्षमता 21 एमएलडी है। जो पानी बचेगा उसको ड्रेन में छोड़ दिया जाएगा।
यहां चल रही हैं 400 से अधिक डाइंग यूनिट
डाहर, काबड़ी रोड, सिवाह, उझा, जाटल रोड, मतलौडा, नौल्था व इसराना समेत काफ ी गांवों में 400 से अधिक डाइंग यूनिट चल रही हैं। इन्होंने प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी नहीं ली है। बोर्ड ने अब तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इस कारण ग्रामीण आंचल का पानी भी खराब हो रहा है।
सरकार पहले डाइंग यूनिट को सुविधा दे
सरकार को डाइंग उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। पहले डाइंग यूनिट को सुविधा मिलनी चाहिए। सरकार ने इनको यहां बसाया है। अब सेक्टर-29 में एसटीपी की क्षमता काफी कम है। इस कारण सड़कों पर पानी बह रहा है। नए प्लांट के शुरू होने के बाद ये परेशानी दूर होगी।
-भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन पानीपत
नया प्लांट तैयार होने के बाद ही समस्या का हल होगा
सरकार को डाइंग यूनिट संचालकों का सहयोग करना चाहिए। सरकार को अपनी व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए। प्लांट को तैयार करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। प्लांट तैयार हो चुका है। इसकी कैपेसिटी 21 एमएलडी है। केमिकलयुक्त पानी को छोड़ने की बड़ी समस्या थी। अब ये समस्या दूर हो जाएगी।
-विनोद खंडेलवाल, चैंबर ऑफ कामर्स प्रधान
जिन उद्योगों को बंद करने के निर्देश आए हैं उन पर कार्रवाई : चहल
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड के आदेश पर डाइंग यूनिटों को सील किया जा रहा है। इन यूनिटों के सैंपल फेल हो चुके हैं। जिन उद्योगों को नोटिस जारी किया गया है उनसे जवाब मांगा जा रहा है। नियमित डाइंग यूनिट की जांच की जा रही है।
-भूपेंद्र चहल, जिला अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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दो सर्विस सेंटर समेत छह डाइंग यूनिट को बंद करने के निर्देश
-केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड ने अब तक 20 डाइंग यूनिटों व दो सर्विस सेंटर को बंद करने और 25 को दिया है कारण बताओ नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पानीपत में प्रदूषण फैलने वाले डाइंग हाउस में और अधिक सख्त हो गया है। बोर्ड ने जिले की दो ऑटोमोबाइल कंपनी के शोरूम समेत छह और डाइंग यूनिटों को बंद करने व गुप्ता इंटरनेशनल को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इससे पहले बोर्ड पानीपत थर्मल पावर स्टेशन को भी 31 दिसंबर 2019 तक सभी मानक पूरे करने के निर्देश देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।
दो माह में केंद्रीय बोर्ड पानीपत में ऑटोमोबाइल कंपनी के सर्विस सेंटर समेत 22 यूनिटों को बंद करने व 25 को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है। जिले में 800 से अधिक डाइंग यूनिट चल रही हैं। जबकि प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड के पास महज 415 यूनिट ही रजिस्टर्ड हैं। ये 415 यूनिट सेक्टर 25 व सेक्टर 29 के पार्ट टू में हैं।
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42 एमएलडी पानी रोज निकल रहा डाइंग यूनिट से
सेक्टर-29 में स्थित सवा 400 डाइंग यूनिट से हर रोज 42 एमएलडी पानी निकलता है, जबकि सेक्टर-29 में एक ही एसटीपी है। इसकी क्षमता 21 एमएलटी है। ये प्लांट भी फेल हो चुका है, इसमें से पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बह रहा है। इसलिए सीवर ओवरफ्लो हो रहे हैं और पानी सड़कों पर बह रहा है। काफी डाइंग यूनिट ने प्लॉटों में ही केमिकल युक्त पानी छोड़ दिया है।
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31 अगस्त को होगा नए एसटीपी का उद्घाटन
सेक्टर-29 में बन रहे नए एसटीपी को बनने में अभी दो माह लगेंगे। प्रशासन ने इसको तैयार करने का ठेका दिल्ली की कंपनी को दिया है। यहां पर 18 एकड़ में सीईटीपी बन रहा है। 42 करोड़ में ये प्लांट बनकर तैयार हुआ है। एक अप्रैल तक ये प्लांट बनकर तैयार होना था, लेकिन प्लांट के ऊपर से गुजर रही 33 हजार केवी की बिजली की लाइन को हटाने में काफी समय लगा। अब इसको 31 अगस्त तक पूरा करना है। इसकी क्षमता 21 एमएलडी है। जो पानी बचेगा उसको ड्रेन में छोड़ दिया जाएगा।
यहां चल रही हैं 400 से अधिक डाइंग यूनिट
डाहर, काबड़ी रोड, सिवाह, उझा, जाटल रोड, मतलौडा, नौल्था व इसराना समेत काफ ी गांवों में 400 से अधिक डाइंग यूनिट चल रही हैं। इन्होंने प्रदूषण नियंत्रण विभाग से एनओसी नहीं ली है। बोर्ड ने अब तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की है। इस कारण ग्रामीण आंचल का पानी भी खराब हो रहा है।
सरकार पहले डाइंग यूनिट को सुविधा दे
सरकार को डाइंग उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। पहले डाइंग यूनिट को सुविधा मिलनी चाहिए। सरकार ने इनको यहां बसाया है। अब सेक्टर-29 में एसटीपी की क्षमता काफी कम है। इस कारण सड़कों पर पानी बह रहा है। नए प्लांट के शुरू होने के बाद ये परेशानी दूर होगी।
-भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन पानीपत
नया प्लांट तैयार होने के बाद ही समस्या का हल होगा
सरकार को डाइंग यूनिट संचालकों का सहयोग करना चाहिए। सरकार को अपनी व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए। प्लांट को तैयार करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया गया है। प्लांट तैयार हो चुका है। इसकी कैपेसिटी 21 एमएलडी है। केमिकलयुक्त पानी को छोड़ने की बड़ी समस्या थी। अब ये समस्या दूर हो जाएगी।
-विनोद खंडेलवाल, चैंबर ऑफ कामर्स प्रधान
जिन उद्योगों को बंद करने के निर्देश आए हैं उन पर कार्रवाई : चहल
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड के आदेश पर डाइंग यूनिटों को सील किया जा रहा है। इन यूनिटों के सैंपल फेल हो चुके हैं। जिन उद्योगों को नोटिस जारी किया गया है उनसे जवाब मांगा जा रहा है। नियमित डाइंग यूनिट की जांच की जा रही है।
-भूपेंद्र चहल, जिला अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड