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10 साल पहले बिना टांकों की सर्जरी करने के लिए आई थी फेको मशीन, बिना सर्जरी के हुई कंडम
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पानीपत। मोतियाबिंद के रोगियों की बिना टांकों की सर्जरी करने के लिए सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 10 साल पहले फेको मशीन दी थी। इस मशीन से उच्च तकनीक के जरिये बिना टांकों की सर्जरी होनी थी, इसके लिए एक सर्जन को ट्रेनिंग भी दी गई थी, लेकिन मरीजों को न तो मशीन का लाभ मिला और सर्जन की ट्रेनिंग। नतीजा यह हुआ कि 15 लाख रुपये की ये फेको मशीन बिना इस्तेमाल के ही कंडम हो गई। अब ये फेको मशीन अस्पताल के स्टोर में पड़ी है। डॉक्टर अब भी टांकों वाली सर्जरी ही कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर सिविल अस्पताल में 2020 में ब्लड बैंक की शुरुआत होनी थी, लेकिन कोरोना के कारण विभाग का ये प्रोजेक्ट भी अटक गया। विभाग की ओर से फ्रीजर व ब्लड सेपरेटर मशीन सिविल अस्पताल को मिली थी, लेकिन ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिला, इसलिए ये मशीनें भी फिलहाल स्टोर में रखी हैं। अब तक ब्लड बैंक की सेवाएं लोगों को नहीं मिल पाई है। लोगों को निजी अस्पतालों के ही चक्कर काटने पड़ते हैं।
पैकिंग से भी नहीं निकली थी मशीन, हो गई कंडम घोषित
2011 में सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 15 लाख रुपये की मशीन उपलब्ध कराई थी। उस वक्त एक आई सर्जन की ट्रेनिंग पर 1 लाख रुपये भी खर्च किए गए थे, लेकिन उस मशीन से एक भी सर्जरी नहीं हुई। नियमों के अनुसार मशीन 2017 में कंडम घोषित कर दी गई, जबकि मशीन को पैकिंग से भी नहीं निकाला गया था।
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पीएम को फेको मशीन की जानकारी नहीं
- फेको मशीन के बारे में जानकारी नहीं, इसके बारे में पता कराया जाएगा। ब्लड बैंक के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है, जैसे ही लाइसेंस मिलेगा, उसे शुरू कर दिया जाएगा।
- संजीव ग्रोवर, पीएमओ, सिविल अस्पताल
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वहीं दूसरी ओर सिविल अस्पताल में 2020 में ब्लड बैंक की शुरुआत होनी थी, लेकिन कोरोना के कारण विभाग का ये प्रोजेक्ट भी अटक गया। विभाग की ओर से फ्रीजर व ब्लड सेपरेटर मशीन सिविल अस्पताल को मिली थी, लेकिन ब्लड बैंक को लाइसेंस नहीं मिला, इसलिए ये मशीनें भी फिलहाल स्टोर में रखी हैं। अब तक ब्लड बैंक की सेवाएं लोगों को नहीं मिल पाई है। लोगों को निजी अस्पतालों के ही चक्कर काटने पड़ते हैं।
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पैकिंग से भी नहीं निकली थी मशीन, हो गई कंडम घोषित
2011 में सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को 15 लाख रुपये की मशीन उपलब्ध कराई थी। उस वक्त एक आई सर्जन की ट्रेनिंग पर 1 लाख रुपये भी खर्च किए गए थे, लेकिन उस मशीन से एक भी सर्जरी नहीं हुई। नियमों के अनुसार मशीन 2017 में कंडम घोषित कर दी गई, जबकि मशीन को पैकिंग से भी नहीं निकाला गया था।
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पीएम को फेको मशीन की जानकारी नहीं
- फेको मशीन के बारे में जानकारी नहीं, इसके बारे में पता कराया जाएगा। ब्लड बैंक के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया है, जैसे ही लाइसेंस मिलेगा, उसे शुरू कर दिया जाएगा।
- संजीव ग्रोवर, पीएमओ, सिविल अस्पताल