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Panchkula News: महिलाएं डरें नहीं, आवाज उठाएं और घरवाले उनका साथ दें
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। महिलाएं अपने साथ होने वाले अत्याचारों से डरे नहीं वरन आवाज उठाएं। इसमें घर वाले भी उनका साथ दें। यह बात अमर उजाला की अपराजिता कार्यक्रम में एडवोकेट अनीश गुप्ता ने महिलाओं को जागरूक करते हुए कही। सेक्टर-25 के निजी रेस्टोरेंट में शहर की महिलाओं को महिला सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकार के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ अगर किसी प्रकार की असुरक्षा होती है, तो वह अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग कर सकती है। उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। छेड़छाड़ होने पर घर वालों को बात दबाने की जगह उनका समर्थन कर शिकायत देनी चाहिए।
महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए। अगर वह अपने हक के प्रति जागरूक होंगी तो वह अपने लिए आवाज भी उठाएंगी। महिलाओं ने भी बेबाकी से इस दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को रात में निकलने में डर बना रहता है। पुलिस की तरफ से भी उनकी मदद की जानी चाहिए, जिससे कि वे डरे नहीं। मार्केट, स्कूल सहित सभी जगह पुलिस तैनात होनी चाहिए। इसके साथ ही महिलाओं के सम्मान का पाठ भी स्कूल सहित सभी स्तर पर पढ़ाया जाना चाहिए। इस दौरान स्वीटी शर्मा, दीपा शर्मा, सेजस वर्मा, कुसुम लता, भागवानी देवी, डॉ. सुचेता साहनी कुंडू, पुष्पा सिगरोहा, भारती कौशिक, मनिंदर कौर, संगीता चौहान, कुसुम शर्मा, कृष्णा सिगरोहा, अमिता धीमान सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।
सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग होनी चाहिए
महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। अगर महिलाएं पहले से ट्रेंड होंगी तो उन्हें मुश्किल का सामना करने में आसानी होगी। यह आज के समय में बहुत जरूरी है। इसके लिए स्कूल की तरह सरकार को महिलाओं के लिए भी कार्यक्रम चलाना चाहिए। - भारती कौशिक, महिला
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महिलाओं का साथ घर वाले दें
अगर किसी बच्ची, महिला के साथ कोई गलत काम हुआ है, तो घरवालों को उसका साथ देना चाहिए। गलत काम होने के बाद महिला पर दबाव नहीं होना चाहिए। बदलते समय के साथ लोगों में यह जागरूकता भी आई है। जागरूकता सभी जगह पर आनी चाहिए। -कुसुम धीमान, महिला
महिलाएं किसी से कमजोर नहीं
महिलाएं किसी से कमजोर नहीं हैं। लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए। अगर लोग अपनी सोच में महिला का सम्मान करना सीखेंगे तो क्राइम हर हाल में कम होगा और महिलाएं सुरक्षित होंगी। लोग महिलाओं को कमतर नहीं आंके। - पुष्पा सिगरोहा, महिला
अपने अधिकारों का पता होना चाहिए
महिलाओं को सुरक्षित उनके हक रख सकते हैं। उनको डरने की बजाय अपने अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए। अगर किसी महिला के साथ कोई ज्यादती होती है, तो उन्हें डरना नहीं चाहिए बल्कि उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए। -डॉ. सुचेता साहनी कुंडू, महिला
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पंचकूला। महिलाएं अपने साथ होने वाले अत्याचारों से डरे नहीं वरन आवाज उठाएं। इसमें घर वाले भी उनका साथ दें। यह बात अमर उजाला की अपराजिता कार्यक्रम में एडवोकेट अनीश गुप्ता ने महिलाओं को जागरूक करते हुए कही। सेक्टर-25 के निजी रेस्टोरेंट में शहर की महिलाओं को महिला सुरक्षा और उनके कानूनी अधिकार के बारे में जागरूक किया गया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ अगर किसी प्रकार की असुरक्षा होती है, तो वह अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग कर सकती है। उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होना बहुत जरूरी है। छेड़छाड़ होने पर घर वालों को बात दबाने की जगह उनका समर्थन कर शिकायत देनी चाहिए।
महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए। अगर वह अपने हक के प्रति जागरूक होंगी तो वह अपने लिए आवाज भी उठाएंगी। महिलाओं ने भी बेबाकी से इस दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को रात में निकलने में डर बना रहता है। पुलिस की तरफ से भी उनकी मदद की जानी चाहिए, जिससे कि वे डरे नहीं। मार्केट, स्कूल सहित सभी जगह पुलिस तैनात होनी चाहिए। इसके साथ ही महिलाओं के सम्मान का पाठ भी स्कूल सहित सभी स्तर पर पढ़ाया जाना चाहिए। इस दौरान स्वीटी शर्मा, दीपा शर्मा, सेजस वर्मा, कुसुम लता, भागवानी देवी, डॉ. सुचेता साहनी कुंडू, पुष्पा सिगरोहा, भारती कौशिक, मनिंदर कौर, संगीता चौहान, कुसुम शर्मा, कृष्णा सिगरोहा, अमिता धीमान सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं।
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सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग होनी चाहिए
महिलाओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। अगर महिलाएं पहले से ट्रेंड होंगी तो उन्हें मुश्किल का सामना करने में आसानी होगी। यह आज के समय में बहुत जरूरी है। इसके लिए स्कूल की तरह सरकार को महिलाओं के लिए भी कार्यक्रम चलाना चाहिए। - भारती कौशिक, महिला
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महिलाओं का साथ घर वाले दें
अगर किसी बच्ची, महिला के साथ कोई गलत काम हुआ है, तो घरवालों को उसका साथ देना चाहिए। गलत काम होने के बाद महिला पर दबाव नहीं होना चाहिए। बदलते समय के साथ लोगों में यह जागरूकता भी आई है। जागरूकता सभी जगह पर आनी चाहिए। -कुसुम धीमान, महिला
महिलाएं किसी से कमजोर नहीं
महिलाएं किसी से कमजोर नहीं हैं। लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए। अगर लोग अपनी सोच में महिला का सम्मान करना सीखेंगे तो क्राइम हर हाल में कम होगा और महिलाएं सुरक्षित होंगी। लोग महिलाओं को कमतर नहीं आंके। - पुष्पा सिगरोहा, महिला
अपने अधिकारों का पता होना चाहिए
महिलाओं को सुरक्षित उनके हक रख सकते हैं। उनको डरने की बजाय अपने अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए। अगर किसी महिला के साथ कोई ज्यादती होती है, तो उन्हें डरना नहीं चाहिए बल्कि उनका डटकर मुकाबला करना चाहिए। -डॉ. सुचेता साहनी कुंडू, महिला