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Panchkula News: रिश्वत में गवाह के विरोधाभासी बयानों पर दोबारा होगी पूछताछ
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पंचकूला। चार्टर्ड अकाउंटेंट आशीष सिंगला से जुड़े 1.20 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अभियोजन को गवाह सुमित कुमार से दोबारा पूछताछ करने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ट्रैप कार्रवाई और रिश्वत की रकम बरामद होने को लेकर गवाह के बयानों में विरोधाभास सामने आए हैं। ऐसे में इन बिंदुओं पर उससे दोबारा सवाल किए जा सकते हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 मई 2018 को सीबीआई की ट्रैप कार्रवाई के दौरान सुमित कुमार ने केमिकल लगे नोटों को संभालने और आशीष सिंगला के कार्यालय में मेज की दराज से रिश्वत की रकम बरामद होने की बात कही थी। हालांकि, 29 सितंबर 2026 को जिरह के दौरान गवाह ने कहा कि वह आरोपी के कार्यालय के अंदर गया ही नहीं था और बाहर मौजूद था। उसने शिकायतकर्ता विजेंद्र को सीबीआई टीम को रकम सौंपते हुए देखने से भी इन्कार कर दिया। गवाह के बयानों में आए इस अंतर के बाद अभियोजन ने दोबारा पूछताछ की अनुमति मांगी थी। बचाव पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए तर्क दिया कि इसके जरिए अभियोजन अपने मामले की कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गवाह से दोबारा पूछताछ की अनुमति दे दी। साथ ही बचाव पक्ष को भी दोबारा जिरह करने का अवसर देने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाह के किस बयान पर भरोसा किया जाना चाहिए, इसका निर्णय मुकदमे के अंतिम मूल्यांकन के समय किया जाएगा।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 मई 2018 को सीबीआई की ट्रैप कार्रवाई के दौरान सुमित कुमार ने केमिकल लगे नोटों को संभालने और आशीष सिंगला के कार्यालय में मेज की दराज से रिश्वत की रकम बरामद होने की बात कही थी। हालांकि, 29 सितंबर 2026 को जिरह के दौरान गवाह ने कहा कि वह आरोपी के कार्यालय के अंदर गया ही नहीं था और बाहर मौजूद था। उसने शिकायतकर्ता विजेंद्र को सीबीआई टीम को रकम सौंपते हुए देखने से भी इन्कार कर दिया। गवाह के बयानों में आए इस अंतर के बाद अभियोजन ने दोबारा पूछताछ की अनुमति मांगी थी। बचाव पक्ष ने अर्जी का विरोध करते हुए तर्क दिया कि इसके जरिए अभियोजन अपने मामले की कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गवाह से दोबारा पूछताछ की अनुमति दे दी। साथ ही बचाव पक्ष को भी दोबारा जिरह करने का अवसर देने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाह के किस बयान पर भरोसा किया जाना चाहिए, इसका निर्णय मुकदमे के अंतिम मूल्यांकन के समय किया जाएगा।
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