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दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक सिमरजीत बैंस के खिलाफ आरोप तय करने पर क्यों न लगा दें रोक: हाईकोर्ट
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एक गवाह की गवाही व आईपीएस अश्विनी गुटयाल की रिपोर्ट याची को न सौंपने का है आरोप
बैंस की याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कमलप्रीत सिंह की गवाही व पूर्व में जांच कर रही आईपीएस अश्विनी गुटयाल की जांच रिपोर्ट की प्रति याची को न सौंपने का आरोप लगाया है। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही पूछा है कि क्यों न इस मामले में आरोप तय करने पर रोक लगा दी जाए।
एक महिला की शिकायत पर लुधियाना की जिला अदालत ने सिमरजीत सिंह बैंस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के अनुरूप लुधियाना के डिवीजन-6 के पुलिस थाने में सिमरजीत बैंस के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले के ट्रायल में शामिल नहीं होने पर अदालत ने उन्हें भगोड़ा करार दे दिया था और बैंस ने 11 जुलाई को अदालत में समर्पण कर दिया था। इस मामले में सिमरजीत बैंस ने पहले लुधियाना की अदालत से नियमित जमानत दिए जाने की मांग की थी जिसे 9 सितंबर को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद बैंस ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नियमित जमानत दिए जाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने आरोपी बैंस को नियमित जमानत का लाभ दे दिया था।
अब बैंस ने कहा है कि एक गवाह की गवाही व पूर्व में जांच कर रही आईपीएस अधिकारी की रिपोर्ट उन्हें मुहैया नहीं करवाई गई है जबकि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट सभी हाईकोर्ट को आदेश जारी कर चुका है। हाईकोर्ट इसके बाद अपने नियमों में संशोधन भी कर चुका है। पंजाब सरकार ने याची की दलीलों का विरोध नहीं किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने अब इन दस्तावेजों को याचिकाकर्ता को सौंपने की मांग पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। साथ ही यह पूछा है कि इस मामले में आरोप तय करने पर क्यों न रोक लगा दी जाए। कोर्ट ने याची को आदेश दिया है कि इस केस के बारे में शिकायतकर्ता को पूरी जानकारी सौंपी जाए ताकि वह चाहे तो याचिका का विरोध कर सके।
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बैंस की याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। दुष्कर्म के आरोपों का सामना कर रहे पूर्व विधायक सिमरजीत सिंह बैंस की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कमलप्रीत सिंह की गवाही व पूर्व में जांच कर रही आईपीएस अश्विनी गुटयाल की जांच रिपोर्ट की प्रति याची को न सौंपने का आरोप लगाया है। याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही पूछा है कि क्यों न इस मामले में आरोप तय करने पर रोक लगा दी जाए।
एक महिला की शिकायत पर लुधियाना की जिला अदालत ने सिमरजीत सिंह बैंस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। आदेश के अनुरूप लुधियाना के डिवीजन-6 के पुलिस थाने में सिमरजीत बैंस के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले के ट्रायल में शामिल नहीं होने पर अदालत ने उन्हें भगोड़ा करार दे दिया था और बैंस ने 11 जुलाई को अदालत में समर्पण कर दिया था। इस मामले में सिमरजीत बैंस ने पहले लुधियाना की अदालत से नियमित जमानत दिए जाने की मांग की थी जिसे 9 सितंबर को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद बैंस ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नियमित जमानत दिए जाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने आरोपी बैंस को नियमित जमानत का लाभ दे दिया था।
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अब बैंस ने कहा है कि एक गवाह की गवाही व पूर्व में जांच कर रही आईपीएस अधिकारी की रिपोर्ट उन्हें मुहैया नहीं करवाई गई है जबकि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट सभी हाईकोर्ट को आदेश जारी कर चुका है। हाईकोर्ट इसके बाद अपने नियमों में संशोधन भी कर चुका है। पंजाब सरकार ने याची की दलीलों का विरोध नहीं किया। इसके बाद हाईकोर्ट ने अब इन दस्तावेजों को याचिकाकर्ता को सौंपने की मांग पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। साथ ही यह पूछा है कि इस मामले में आरोप तय करने पर क्यों न रोक लगा दी जाए। कोर्ट ने याची को आदेश दिया है कि इस केस के बारे में शिकायतकर्ता को पूरी जानकारी सौंपी जाए ताकि वह चाहे तो याचिका का विरोध कर सके।
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