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Panchkula News: खैर तस्करी-आरडीएफ घोटाला.. मंत्री के लिखे पत्र पर रुकी जांच

Mon, 23 Mar 2026 12:21 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:21 AM IST
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Well, the smuggling-RDF scam... the investigation stopped due to the letter written by the minister.
पंचकूला। हरियाणा के मोरनी वन मंडल में खैर तस्करी और फर्जी पौधारोपण से जुड़े घोटाले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। अमर उजाला के हाथ लगे दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि 2022 में शुरू हुई जांच को मंत्री के नाम पर जारी लिखित आदेश के जरिये बीच में ही रोक दिया गया। अब 6 मार्च 2026 को वन मंत्री को भेजे गए पत्र के बाद यह मामला फिर चर्चा में है और यदि जांच दोबारा शुरू होती है तो कई बड़े नामों पर आंच आ सकती है।
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मोरनी-पिंजौर वन मंडल में पौधारोपण और अवैध खैर कटान की जांच के लिए 5 जुलाई 2022 को आदेश जारी हुए थे। जांच टीम ने शुरुआती स्तर पर ही अनियमितताओं के संकेत दिए लेकिन महज आठ दिन बाद 13 जुलाई को मुख्यालय से एक पत्र जारी कर जांच रोकने के निर्देश दे दिए गए। इसमें कहा गया कि वन मंत्री के अनुसार जुलाई से सितंबर तक सभी जांच बंद रखकर पौधों की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए।
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47 फीसदी पौधे ही मिले जिंदा
जांच एवं मूल्यांकन टीम ने करीब 755 हेक्टेयर क्षेत्र में साढ़े आठ लाख पौधे लगाए जाने के दावे की पड़ताल शुरू की थी। शुरुआती 125 हेक्टेयर की जांच में ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ सिर्फ 47 फीसदी पौधे ही जीवित मिले। इससे करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उस समय जांच जारी रहती तो बड़े स्तर पर कार्रवाई संभव थी लेकिन जांच रुकने के बाद मोरनी, पिंजौर और कालका क्षेत्रों में खैर की अवैध कटाई और तस्करी तेज हो गई। फील्ड में तैनात संदिग्ध अधिकारियों को अप्रत्यक्ष रूप से राहत मिल गई।
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विजिलेंस जांच की मांग भी ठंडी पड़ी
तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक (जांच एवं मूल्यांकन) ने मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर विजिलेंस या रिटायर्ड जज से जांच की सिफारिश की थी लेकिन यह मांग भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच को जानबूझकर रोका गया था? क्या अक्तूबर तक का समय सबूत मिटाने के लिए दिया गया? और क्या नए पौधारोपण की आड़ में पुराने घोटाले को दबा दिया गया?
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