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गीता के संदेशों को अपनाकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं : कटारिया
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पंचकूला। राजकीय स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय सेक्टर-14 में आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के दूसरे दिन गीता की शिक्षाएं विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। विभिन्न वक्ताओं ने जीवन में गीता के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य वक्ता एसडीएम चंद्रकांत कटारिया ने संबोधित करते हुए कहा कि गीता के संदेशों को जीवन में अपनाकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया संदेश कर्म करो, फल की चिंता मत करो हमें यह सिखाता है कि हमें फल की चिंता किए बिना निस्वार्थ भाव से अपना कर्म करना चाहिए। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष बंतो कटारिया ने विद्यार्थियों को गीता के संदेश घर-घर तक ले जाने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित रामदिया शास्त्री ने कहा कि महाभारत के युद्ध प्रारंभ होने पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मोहजाल से निकालने के लिए जिन श्लोकों का सार प्रस्तुत किया, वह हम सभी के लिए अमृत समान है। अरुणा आसफ अली राजकीय महाविद्यालय, कालका के डाॅ. प्रदीप ने कहा कि गीता महाभारत का अंश है। मनुष्य को अपने गुणों को समझकर स्वयं को ईश्वर के अनुकूल बनाना चाहिए।
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राजकीय महाविद्यालय, बरवाला के प्रिंसिपल डाॅ. नरेंद्र सिवाच ने कहा कि गीता का मूल-मंत्र कर्म प्रधान है। कर्म समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए। गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया है कि वही कर्म करो जिसमें स्वार्थ निहित न हो।
माता मनसा देवी संस्कृत महाविद्यालय, पंचकूला के डाॅ. राजबीर कौशिक ने कहा कि गीता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। भगवद्गीता के संदेशों को जीवन में अपनाकर हम सुख, समृद्धि और संतोष प्राप्त कर सकते हैं।
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मुख्य वक्ता एसडीएम चंद्रकांत कटारिया ने संबोधित करते हुए कहा कि गीता के संदेशों को जीवन में अपनाकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया संदेश कर्म करो, फल की चिंता मत करो हमें यह सिखाता है कि हमें फल की चिंता किए बिना निस्वार्थ भाव से अपना कर्म करना चाहिए। प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष बंतो कटारिया ने विद्यार्थियों को गीता के संदेश घर-घर तक ले जाने का आह्वान किया।
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राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित रामदिया शास्त्री ने कहा कि महाभारत के युद्ध प्रारंभ होने पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मोहजाल से निकालने के लिए जिन श्लोकों का सार प्रस्तुत किया, वह हम सभी के लिए अमृत समान है। अरुणा आसफ अली राजकीय महाविद्यालय, कालका के डाॅ. प्रदीप ने कहा कि गीता महाभारत का अंश है। मनुष्य को अपने गुणों को समझकर स्वयं को ईश्वर के अनुकूल बनाना चाहिए।
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राजकीय महाविद्यालय, बरवाला के प्रिंसिपल डाॅ. नरेंद्र सिवाच ने कहा कि गीता का मूल-मंत्र कर्म प्रधान है। कर्म समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए। गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने यही संदेश दिया है कि वही कर्म करो जिसमें स्वार्थ निहित न हो।
माता मनसा देवी संस्कृत महाविद्यालय, पंचकूला के डाॅ. राजबीर कौशिक ने कहा कि गीता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। भगवद्गीता के संदेशों को जीवन में अपनाकर हम सुख, समृद्धि और संतोष प्राप्त कर सकते हैं।