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Panchkula News: अपराजिता काव्य गोष्ठी में गूंजे नारी सशक्तिकरण और संवेदना के स्वर

Sat, 17 Oct 2026 02:48 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2026 02:48 AM IST
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Voices of women's empowerment and sensitivity resonate at the 'Aparajita' poetry symposium
पंचकूला। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत शुक्रवार को भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नारी सशक्तिकरण, जीवन के संघर्ष, रिश्तों की संवेदना और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ रेणु अजनबी (रेणु) ने भावपूर्ण सरस्वती वंदना से किया। इसके बाद एक-एक कर कवयित्रियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। डॉ. नीलम नारंग ने जिंदगी को नए उत्साह के साथ जीने का संदेश देते हुए सुनाया, तुम देखकर मुस्कुराते रहो, दिलों में प्रीत लुटाते रहो। ना उम्र बीती है, ना इच्छाएं दबी हैं, आओ जिंदगी तुझे नया आगाज दूं। उनकी पंक्तियों ने सकारात्मक सोच और नई शुरुआत की प्रेरणा दी।
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डॉ. संगीता शर्मा कुमुद ने रिश्तों की नजाकत को शब्द देते हुए कहा, बड़ा नाजुक है शीशा दिल का, शीशा टूट जाता है। वहीं दर्शना सुभाष पाहवा की रचना में प्रेम और भावनाओं के विभिन्न रंग नजर आए। रेखा मित्तल ने संघर्ष और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हुए कहा, अपना-अपना युद्ध है सबका, सबको खुद ही लड़ना है। समय के शिलालेख पर निज को स्वयं गढ़ना है। उनकी पंक्तियों ने जीवन में आत्मविश्वास और अपने रास्ते खुद बनाने की प्रेरणा दी।
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गीता गुलाटी ऋतंभरा ने सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हुए कहा, नाम दुनिया में कमाना चाहिए, दुश्मनी दिल से मिटाना चाहिए। कुसुम धीमान ने धरती के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त किया। रेणु अजनबी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से आस्था और मुश्किलों के बीच रास्ता तलाशने की प्रेरणा दी। उनकी पंक्तियां रास्ते बंद हों तो नई राह बनानी होगी, ठोकरों से नई पहचान बनानी होगी संघर्ष के बीच हौसला बनाए रखने का संदेश देती नजर आईं।

गरिमा ने डिजिटल दौर के प्यार को अपनी कविता का विषय बनाया। उन्होंने कहा,डिजिटल प्यार का कैसा रंग निराला है, ऑनलाइन होकर भी दिल ने दिल संभाला है। आरपी. मल्होत्रा की रचना मैं जिंदा हूं, नब्ज टटोल कर देखना है, मैं जिंदा हूं ने जीवन के एहसास और अस्तित्व के सवालों को सामने रखा। कृष्णा गोयल ने माता-पिता के प्रति सम्मान का संदेश देते हुए कहा, मां-बाप से इतनी नफरत न किया कर।

नीरजा शर्मा ने अपनी प्रस्तुति में दूसरों की खैरियत पूछने वाली नारी के भीतर छिपी संवेदनाओं को उजागर किया। राशि श्रीवास्तव ने आशा और उल्लास का संदेश देते हुए अंधकार मिटाकर खुशियों के दीप जलाने की बात कही।


रविंदर कौर बावा की कविता क्या लड़की होना पाप है? ने समाज में बेटियों के प्रति सोच पर सवाल उठाए। वहीं सोनिमा सत्या ने मुस्कुराहट के पीछे छिपे संघर्ष को शब्द देते हुए कहा, हर मुस्कुराहट की वजह खुशी नहीं होती, कुछ मुस्कुराहटें हिम्मत की निशानी भी होती हैं।
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