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Panchkula News: निर्भया फ्रेमवर्क के तहत बसों में लगेगा वीएलटीडी, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को दी जानकारी
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को बताया है कि राज्य में निर्भया फ्रेमवर्क के तहत व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) परियोजना को पूर्ण रूप से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए कार्यान्वयन एजेंसी का चयन, बैक एंड सिस्टम का विकास और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना की जा चुकी है। याचिका बसों के तय समय-सारिणी के अनुसार शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित करने के लिए दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी की पीठ के समक्ष हुई।
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि वीएलटीडी परियोजना के लागू होने से बसों की लाइव ट्रैकिंग संभव होगी। किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना, अपराध या रूट से विचलन की स्थिति में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से वाहन की लोकेशन तुरंत प्राप्त की जा सकेगी, जिससे प्रतिक्रिया समय में कमी आएगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि कुछ बस ऑपरेटर और पनसप कर्मचारी निर्धारित समय से पहले बसें चलाकर अन्य ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसी को लेकर अदालत से समय-सारिणी के पालन के निर्देश मांगे गए थे।
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राज्य परिवहन आयुक्त परनीत शेरगिल (आईएएस) द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि एडवांस्ड कंप्यूटिंग विकास केंद्र (सी-डैक) को परियोजना का कार्यान्वयन एजेंसी चुना गया है। बैक एंड एप्लीकेशन विकसित की जा चुकी है और वाहनों की निगरानी के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है।
एक जनवरी के बाद पंजीकृत होने वाले सभी नए यात्री वाणिज्यिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन तभी किया जाएगा, जब उनमें वीएलटीडी डिवाइस की स्थापना और बीएसएनएल कॉमन लेयर के माध्यम से सफल टैगिंग सुनिश्चित कर ली जाएगी।
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सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि वीएलटीडी परियोजना के लागू होने से बसों की लाइव ट्रैकिंग संभव होगी। किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना, अपराध या रूट से विचलन की स्थिति में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से वाहन की लोकेशन तुरंत प्राप्त की जा सकेगी, जिससे प्रतिक्रिया समय में कमी आएगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
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याचिकाकर्ता का आरोप था कि कुछ बस ऑपरेटर और पनसप कर्मचारी निर्धारित समय से पहले बसें चलाकर अन्य ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसी को लेकर अदालत से समय-सारिणी के पालन के निर्देश मांगे गए थे।
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राज्य परिवहन आयुक्त परनीत शेरगिल (आईएएस) द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि एडवांस्ड कंप्यूटिंग विकास केंद्र (सी-डैक) को परियोजना का कार्यान्वयन एजेंसी चुना गया है। बैक एंड एप्लीकेशन विकसित की जा चुकी है और वाहनों की निगरानी के लिए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है।
एक जनवरी के बाद पंजीकृत होने वाले सभी नए यात्री वाणिज्यिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन तभी किया जाएगा, जब उनमें वीएलटीडी डिवाइस की स्थापना और बीएसएनएल कॉमन लेयर के माध्यम से सफल टैगिंग सुनिश्चित कर ली जाएगी।