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Panchkula News: मालिकाना हक के बावजूद निजी व्यक्ति को सौंपी ग्रामीणों की जमीन

Thu, 13 Jul 2023 01:42 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Jul 2023 01:42 AM IST
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Villagers land handed over to private person despite ownership
रायपुररानी। बीते 64 सालों से अपने घरों में रह रहे सुल्तानपुर गांव के लोगों को अचानक झटका तब लगा जब उन्हें पता चला कि प्रशासन ने उनके घरों समेत सरकारी जमीन की तकसीम निजी व्यक्ति के हाथों में सौंप दी है। खास बात यह है कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक भूमाफिया ने प्रशासन के साथ मिलकर उनकी निजी व गांव की सरकारी जमीन की तकसीम करवाकर अपने नाम करवा ली है। उन्होंने बताया कि 1962 से यह जमीन ग्रामीणों के नाम है, लेकिन 2020 में कानूनगो द्वारा गैर कानूनी तरीके से सभी इंतकाल तुड़वाए गए व जमीन को एक निजी हाथों में सौंप दिया। इसके बाद लोगों ने हाइकोर्ट का रुख किया व जमीन पर होने वाले कब्जे को रुकवाने के लिए स्टे प्राप्त की। हाइकोर्ट के स्टे के बावजूद भी ग्रामीणों को तहसील कार्यालय द्वारा नोटिस जारी कर कब्जे के लिए लोगों को परेशान किया जा रहा है। इसको लेकर बुधवार को भारी बारिश में गांव के लोग तहसील कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें कोई भी अधिकारी व कानूनगो नहीं मिला। ग्रामवासियों ने कहा है कि यदि इसी तरह से स्टे के बावजूद परेशान किया तो पूरा गांव मुख्यमंत्री निवास पर धरना प्रदर्शन करेगा।
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प्रशासन ने पहले कोरोना काल में जब सब घर थे तब यह गैर कानूनी काम किया था किंतु अब जब सब सब जगह बरसात का कोहराम है तब इस आपदा की घड़ी में भी प्रशासन आपदा को अवसर बना कर कब्जे लेना चाहता है जबकि उन्हें पता है कि जमीन पर हाइकोर्ट द्वारा स्टे लगी हुई है। -रशीद अहमद, ग्रामीण सुल्तानपुर
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एक व्यक्ति के हाथ में पूरे गांव की जमीन बिना किसी की जानकारी के देना तो साफ-साफ नजर आ रहा है कि तहसील कार्यालय के कागजी कार्रवाई करने वाले सभी ने सांठगांठ कर रखी है। -अकरम, पूर्व सरपंच गांव सुल्तानपुर
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गांव के निजी ही नहीं बल्कि सरकारी स्कूल, गली, कुएं व अन्य जमीन भी प्रशासन ने निजी व्यक्ति को सौंप दी है, जो बहुत बड़े भ्रष्टाचार को दिखाता है। इसका विरोध सीएम कार्यालय तक किया जाएगा। -नसीम सरपंच गांव सुल्तानपुर


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सब कुछ होने के बाद भी तहसीलदार व अन्य सभी जिम्मेदार अधिकारियों को पता है कि हाइकोर्ट ने इस कब्जे पर स्टे लगा दी है। इसके बाद भी ग्रामीणों को नोटिस देकर बेवजह परेशान किया जा रहा। इन नोटिस जारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। -शरनजीत सिंह काका, जिला परिषद सदस्य प्रतिनिधि
कोट्स
यदि किसी भी मामले में हाइकोर्ट व अन्य कोर्ट का स्टे है तो किसी भी तरह का नोटिस मान्य नहीं होता है। -कृष्ण कुमार, तहसीलदार


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