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Panchkula News: एनडीपीएस केस में पुलिस की दो अलग-अलग कहानियां, हाईकोर्ट ने जताई चिंता
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने पर गंभीर चिंता जताते हुए पंजाब के डीजीपी को जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में पुलिस की ओर से दो अलग-अलग और विरोधाभासी कहानियां सामने आईं।
जस्टिस एचएस ग्रेवाल ने गुरदासपुर के बटाला में 28 मई 2025 को दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी को नियमित जमानत दे दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी को फंसाया गया है। उन्होंने अदालत में सीसीटीवी फुटेज पेश की जिसमें एक एसयूवी सड़क किनारे खड़ी दिखाई देती है।
इसके बाद पुलिस की टीम वहां पहुंचती है और दो लोगों को एक अन्य वाहन में बैठाकर ले जाती है। अदालत ने राज्य सरकार को फुटेज की जांच कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य का जवाब देखने पर अदालत ने पाया कि पुलिस ने दो अलग-अलग दावे किए हैं। एक ओर कहा गया कि नियमित गश्त के दौरान आरोपी को वाहन से नशीला पदार्थ फेंकते हुए पकड़ा गया। दूसरी ओर कहा गया कि गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी को पकड़ा गया और वाहन के बोनट के अंदर छिपे खांचे से नशीला पदार्थ बरामद किया गया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि आजकल पुलिस कभी-कभी अपनी मर्जी और निजी रंजिश निकालने के लिए निर्दोष लोगों को मामलों में फंसा देती है। अदालत ने कहा कि दोनों कहानियां पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए गढ़ी हुई लगती हैं और आरोपी से कोई बरामदगी नहीं दिखाई देती।
आदेश के अंत में अदालत ने अपने आदेश की प्रति पंजाब के डीजीपी को भेजने का निर्देश देते हुए कहा कि मामले की जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
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जस्टिस एचएस ग्रेवाल ने गुरदासपुर के बटाला में 28 मई 2025 को दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मामले में आरोपी को नियमित जमानत दे दी है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी को फंसाया गया है। उन्होंने अदालत में सीसीटीवी फुटेज पेश की जिसमें एक एसयूवी सड़क किनारे खड़ी दिखाई देती है।
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इसके बाद पुलिस की टीम वहां पहुंचती है और दो लोगों को एक अन्य वाहन में बैठाकर ले जाती है। अदालत ने राज्य सरकार को फुटेज की जांच कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य का जवाब देखने पर अदालत ने पाया कि पुलिस ने दो अलग-अलग दावे किए हैं। एक ओर कहा गया कि नियमित गश्त के दौरान आरोपी को वाहन से नशीला पदार्थ फेंकते हुए पकड़ा गया। दूसरी ओर कहा गया कि गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी को पकड़ा गया और वाहन के बोनट के अंदर छिपे खांचे से नशीला पदार्थ बरामद किया गया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि आजकल पुलिस कभी-कभी अपनी मर्जी और निजी रंजिश निकालने के लिए निर्दोष लोगों को मामलों में फंसा देती है। अदालत ने कहा कि दोनों कहानियां पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए गढ़ी हुई लगती हैं और आरोपी से कोई बरामदगी नहीं दिखाई देती।
आदेश के अंत में अदालत ने अपने आदेश की प्रति पंजाब के डीजीपी को भेजने का निर्देश देते हुए कहा कि मामले की जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।