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वन क्षेत्र में नहीं गिने जाएंगे खेतों में लगे पेड़

Tue, 05 Jul 2022 01:42 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 05 Jul 2022 01:42 AM IST
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Trees planted in the fields will not be counted in the forest area
चंडीगढ़। हरियाणा के किसान अपने खेतों में बेझिझक पौधे लगा सकते हैं। पेड़ लगे खेत वन क्षेत्र नहीं कहलाएंगे। वन विभाग ने किसानों को यह यकीन दिलाने के लिए पत्र जारी किया है। अरावली और शिवालिक क्षेत्र को छोड़कर पूरे प्रदेश में खेतों में पौधे लगाने, पेड़ काटने, लकड़ी बेचने और उसके परिवहन पर पूरी छूट रहेगी। हालांकि, यह सुविधा केवल किसानों के लिए ही है।
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अरावली और शिवालिक के पहाड़ी क्षेत्र में मौजूद खेती की जमीन में भी वन विभाग ने सफेदा, पापुलर और बकैन के पेड़ों को पीएलपीए यानी पंजाब लैंड प्रीजर्वेशन एक्ट से बाहर रखा हुआ है। वन विभाग ने किसानों को कहा है कि वे अपने खेतों में अधिक से अधिक इमारती और अन्य पौधे लगाएं। इससे वह कृषि के साथ ही कृषि-वानिकी में उतरकर अधिक कमाई कर सकते हैं। अधिक पौधे लगाकर पेड़ तैयार करने से पारिस्थितिकी तंत्र तो मजबूत होगा ही आर्थिक समृद्धि भी आएगी।
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वन मंत्री कंवर पाल गुर्जर का कहना है कि कृषि-वानिकी को बढ़ावा देकर लकड़ी की मांग और आपूर्ति के अंतर को कम किया जा सकता है। किसानों के अपने खेतों में अधिक से अधिक पौधे लगाने पर पेड़ तैयार होंगे, जिनसे जलाने वाली लकड़ी, चारा, इमारती लकड़ी मिलेगी। वन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वनों पर दबाव कम होगा। वन क्षेत्र के बाहर से ही लकड़ी की अधिकांश मांग पूरी हो सकेगी। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में भी कृषि-वानिकी सहायक सिद्ध होगी। वन संपदा के बढ़ने से पर्यावरण में कार्बन का प्रभाव भी कम होगा। वन मंत्री ने किसानों से आग्रह किया है कि वे बिना डरे अपने खेतों में अधिक से अधिक पौधे लगाएं।
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