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हरियाणा में अभी बिजली कटों से राहत नहीं ः नई कंपनियों से बिजली खरीदने में देरी और पुरानी देने को तैयार नहीं

Sun, 24 Apr 2022 02:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 24 Apr 2022 02:33 AM IST
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There is no relief from power cuts in Haryana yet : delay in buying power from new companies and old ones are not ready to give
चंडीगढ़। हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं को अभी बिजली कटों से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। न तो नई कंपनियों से बिजली खरीदने की की प्रक्रिया में तेजी बरती जा रही है और न ही करार वाली पुरानी कंपनियों से बिजली आपूर्ति शुरू कराने में सरकार को सफलता मिली है। तेज गर्मी के चलते प्रदेश में बिजली की मांग में रोजाना इजाफा हो रहा है, लेकिन आपूर्ति का प्रबंध कहीं से नहीं हो पाया है। अगर हालात यही रहे तो आगामी दिनों में बिजली कटों की संख्या बढ़ सकती है।
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पिछले साल हरियाणा की कुल बिजली क्षमता 12175 हजार मेगावाट थी और जुलाई माह में इतनी ही मांग पहुंच गई थी। हालांकि, पिछले साल प्रदेश में बिजली को लेकर कोई दिक्कत नहीं थी। इस बार कुल क्षमता को बढ़ाकर 13 हजार मेगावाट किया जाना था। लेकिन, एक साल से अडानी पावर ने 1471 मेगावाट और टाटा कंपनी ने 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति बंद कर रखी है। दूसरा, खेदड़ पावर प्लांट की 600 मेगावाट की यूनिट बंद चल रही है। उधर, इस बार गर्मी समय से पहले आने के कारण अप्रैल माह में ही बिजली की खपत पिछले साल के मुकाबले 30 प्रतिशत तक अधिक बढ़ गई। पहले अप्रैल माह में 6500 से 7500 मेगावाट बिजली की मांग रहती थी, लेकिन इस बार आंकड़ा 8600 मेगावाट को पार कर गया है। तमाम व्यवस्था करने के बावजूद 1000 मेगावाट बिजली की कमी पड़ रही है। इसलिए उद्योगों समेत अन्य उपभोक्ताओं पर रोजाना 14 लाख यूनिट तक के कट लगाए जा रहे हैं।
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बिजली विभाग लिख चुका पत्र, 25 को होगी सुनवाई
मध्यप्रदेश की बिजली कंपनी से 500 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए बिजली विभाग ने सप्ताह पहले हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग को पत्र लिखकर अनुमति मांगी थी। लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। आयोग इस मामले में 25 अप्रैल को सुनवाई करेगा, इसके बाद ही तय होगा कि खरीद पर कोई निर्णय होगा।
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विदेशी कोयले के रेट पर है विवाद
अडानी और टाटा कंपनी विदेशी कोयले की बढ़ी कीमतें चाह रही हैं। कंपनियों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में विदेशी कोयले के रेट बढ़े हैं, इसलिए बिजली उत्पादन करना भी महंगा हो गया है। इससे कंपनियां घाटे में चली गई है। इसे पूरा करने के लिए कोयले की बढ़ी दरें प्रदेश को देनी होगी। हालांकि, प्रदेश सरकार पहले ही इससे इनकार कर चुकी है। अभी बीच का रास्ता निकलाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ये कब सिरे चढ़ पाएंगे, कोई बता नहीं पा रहा है।

अभी स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। मात्र 1 प्रतिशत कट लगाए जा रहे हैं। नई बिजली खरीद को भी प्रक्रिया जारी है। अडानी और टाटा कंपनियों से बातचीत चल रही है, उम्मीद है कि जल्द ही मामला सुलझ जाएगा और सुचारू रूप से बिजली मिल सकेगी।
- पीके दास, एसीएस, बिजली निगम।
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