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प्रधान अदलखा और उपप्रधान कंसल की नियुक्ति को लेकर भी है विवाद
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चंडीगढ़। भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के प्रधान धनेश अदलखा और उप प्रधान सोहन लाल कंसल की नियुक्ति को लेकर भी विवाद है। काउंसिल के सदस्यों का आरोप है कि दोनों पदाधिकारी नियमों के खिलाफ काउंसिल पर कब्जा जमाए हुए हैं। नियमों के तहत इनकी नियुक्ति अवैध है। इस मामले में सदस्यों ने मुख्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य मंत्री तक को शिकायत की थी, लेकिन इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
काउंसिल के सदस्यों अरुण पराशर, बीबी सिंगल, केसी गोयल, रविंद्र चोपड़ा, सुरिंद्र सालवान ने बताया कि 1 मार्च, 2019 को काउंसिल की मीटिंग बुलाई गई। उस मीटिंग की कार्रवाई में काउंसिल प्रधान व उपप्रधान के चुनाव के बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया, लेकिन 1 मार्च, 2019 की मीटिंग कि जो भी कार्रवाई सरकार को भेजी गई उसमें केवल सात ही सदस्य हाजिर दिखाए गए। सरकार को गुमराह करते हुए लिखा गया कि काउंसिल के कुल 12 सदस्य में से 7 की सहमति से धनेश अदलखा को प्रधान व सोहन लाल कंसल को उपप्रधान चुना गया।
सदस्यों का कहना है कि धनेश अदलखा को हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद के सदस्य के रूप में नामित होने के बाद 17 मार्च 2020 के बाद अध्यक्ष के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया था। तब से अध्यक्ष के रूप में अवैध तौर पर काबिज हैं। सोहन लाल को राज्य द्वारा 6 मार्च 2019 के बाद न तो अध्यक्ष के रूप में और न ही उपाध्यक्ष के रूप में अधिसूचित किया गया था। हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद नियम 1951 (नियम 141) के अनुसार, बैंक पर सभी चेक पर हस्ताक्षर अध्यक्ष या और रजिस्ट्रार करते हैं, लेकिन धनेश अदलखा ने यह पावर रजिस्ट्रार के बजाय अपने और सोहन कंसल के पास ही रखी हुई थी। इसी प्रकार, पूर्व प्रधान केसी गोयल का आरोप है कि 25 जुलाई 2019 को हाईकोर्ट नेरजिस्ट्रार सहित पूरे स्टाफ की नियुक्ति को रद्द कर दिया था। इसके बाद कभी भी सरकार ने इन कर्मचारियों को रखने के संबंध में अनुमति नहीं दी। फिर भी इनको नौकरी पर रखा गया।
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सदस्यों ने तीन माह पहले सरकार को बताया था पंजीकरण के नाम पर चल रहा रिश्वत का खेल
हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के सदस्यों ने तीन माह पहले काउंसिल के पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए 50 से 80 हजार रिश्वत वसूली जा रही है। इस मामले में सरकार ने आईएएस अधिकारी प्रभजोत सिंह को जांच सौंपी थी। आईएएस अधिकारी ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि काउंसिल में कोई पारदर्शिता नहीं है और यहां पर काफी संख्या में पंजीकरण लंबित पड़े हैं। रिपोर्ट के बाद सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। काउंसिल सदस्य रविंद्र चोपड़ा, पूर्व रजिस्ट्रार एवं सदस्य अरुण पराशर, सुरिंद्र सालवान, पंचकूला सेक्टर-10 निवासी भाजपा नेता बीबी सिंगल, पूर्व प्रधान कृष्ण चंद गोयल की हस्ताक्षरयुक्त यह चिट्ठी सरकार को दी थी। इस चिट्ठी में सीधे तौर पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स पर हस्ताक्षर करने वाले चेयरमैन धनेश अदलखा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। पत्र में आरोप लगाया था कि अदलखा ने पूरी काउंसिल पर कब्जा जमा लिया है और बिना उनकी अनुमति के कोई फाइल नहीं निकल रही है। इतना ही नहीं रजिस्ट्रार का काम भी खुद ही संभाल लिया है।
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काउंसिल के सदस्यों अरुण पराशर, बीबी सिंगल, केसी गोयल, रविंद्र चोपड़ा, सुरिंद्र सालवान ने बताया कि 1 मार्च, 2019 को काउंसिल की मीटिंग बुलाई गई। उस मीटिंग की कार्रवाई में काउंसिल प्रधान व उपप्रधान के चुनाव के बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया, लेकिन 1 मार्च, 2019 की मीटिंग कि जो भी कार्रवाई सरकार को भेजी गई उसमें केवल सात ही सदस्य हाजिर दिखाए गए। सरकार को गुमराह करते हुए लिखा गया कि काउंसिल के कुल 12 सदस्य में से 7 की सहमति से धनेश अदलखा को प्रधान व सोहन लाल कंसल को उपप्रधान चुना गया।
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सदस्यों का कहना है कि धनेश अदलखा को हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद के सदस्य के रूप में नामित होने के बाद 17 मार्च 2020 के बाद अध्यक्ष के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया था। तब से अध्यक्ष के रूप में अवैध तौर पर काबिज हैं। सोहन लाल को राज्य द्वारा 6 मार्च 2019 के बाद न तो अध्यक्ष के रूप में और न ही उपाध्यक्ष के रूप में अधिसूचित किया गया था। हरियाणा राज्य फार्मेसी परिषद नियम 1951 (नियम 141) के अनुसार, बैंक पर सभी चेक पर हस्ताक्षर अध्यक्ष या और रजिस्ट्रार करते हैं, लेकिन धनेश अदलखा ने यह पावर रजिस्ट्रार के बजाय अपने और सोहन कंसल के पास ही रखी हुई थी। इसी प्रकार, पूर्व प्रधान केसी गोयल का आरोप है कि 25 जुलाई 2019 को हाईकोर्ट नेरजिस्ट्रार सहित पूरे स्टाफ की नियुक्ति को रद्द कर दिया था। इसके बाद कभी भी सरकार ने इन कर्मचारियों को रखने के संबंध में अनुमति नहीं दी। फिर भी इनको नौकरी पर रखा गया।
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सदस्यों ने तीन माह पहले सरकार को बताया था पंजीकरण के नाम पर चल रहा रिश्वत का खेल
हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के सदस्यों ने तीन माह पहले काउंसिल के पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए 50 से 80 हजार रिश्वत वसूली जा रही है। इस मामले में सरकार ने आईएएस अधिकारी प्रभजोत सिंह को जांच सौंपी थी। आईएएस अधिकारी ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि काउंसिल में कोई पारदर्शिता नहीं है और यहां पर काफी संख्या में पंजीकरण लंबित पड़े हैं। रिपोर्ट के बाद सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। काउंसिल सदस्य रविंद्र चोपड़ा, पूर्व रजिस्ट्रार एवं सदस्य अरुण पराशर, सुरिंद्र सालवान, पंचकूला सेक्टर-10 निवासी भाजपा नेता बीबी सिंगल, पूर्व प्रधान कृष्ण चंद गोयल की हस्ताक्षरयुक्त यह चिट्ठी सरकार को दी थी। इस चिट्ठी में सीधे तौर पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स पर हस्ताक्षर करने वाले चेयरमैन धनेश अदलखा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। पत्र में आरोप लगाया था कि अदलखा ने पूरी काउंसिल पर कब्जा जमा लिया है और बिना उनकी अनुमति के कोई फाइल नहीं निकल रही है। इतना ही नहीं रजिस्ट्रार का काम भी खुद ही संभाल लिया है।