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चंडीगढ़ : दुश्मन से लोहा लेने में हरियाणा के युवा रणबांकुरे थे सबसे आगे, कारगिल में प्रदेश के 74 जवानों ने दी थी शहादत

Tue, 26 Jul 2022 01:24 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 26 Jul 2022 01:24 AM IST
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The youth of Haryana were at the forefront of taking on the enemy
चंडीगढ़। कारगिल युद्ध में हरियाणा के युवा रणबांकुरे दुश्मन से लोहा लेने वालों में सबसे आगे थे। युवा सैनिकों के जज्बे और बहादुरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह युद्ध के लिए पहली पंक्ति में खड़े थे। 18 से 23 साल तक के इन जवानों के हौसलों के आगे दुश्मनों ने घुटने टेक दिए थे। इस युद्ध में हरियाणा के 74 रणबांकुरे शहीद हुए थे जिसमें में 25 युवा सैनिक थे।
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वर्ष 1999 में हुए ऑपरेशन विजय में हरियाणा के जवानों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया था। युद्ध में हरियाणा की भागीदारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समय प्रदेश के सभी 18 जिले से जवानों ने शहादत पाई थी। झज्जर से 11, भिवानी से 10, महेंद्रगढ़ से 9, रोहतक से 8, फरीदाबाद-सोनीपत से 5-5, पानीपत से 4, फतेहाबाद, यमुनानगर, रेवाड़ी और गुरुग्राम से 3-3, करनाल, हिसार, पंचकूला से 2-2, अंबाला, सिरसा, कुरुक्षेत्र और जींद जिले से 1-1 जवान शहीद हुआ था। इनके अलावा, काफी संख्या में जवान घायल भी हुए थे। गौरतलब है कि आज भी देश की सेना में हर दसवां जवान हरियाणा का है, वहीं इनमें बड़ी संख्या में झज्जर, भिवानी, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले के जवान शामिल हैं। हरियाणा के युवाओं में सेना में भर्ती होने का जज्बा है।
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20 साल का शहीद हो गया था मनजीत सिंह
अंबाला के गांव कांसपुर निवासी सिपाही मनजीत सिंह सेना में सबसे कम उम्र के शहीद हैं। मात्र 20 साल की उम्र ने सिंह ने द्रास क्षेत्र में शहादत पाई थी। 23 फरवरी, 1998 में वह 8 सिख रेजीमेंट अल्फा कम्पनी में भर्ती हुए। भर्ती होने के करीब डेढ़ वर्ष बाद ही मनजीत सिंह युद्ध में चले गए। 7 जून, 1999 को टाइगर हिल में कई दुश्मनों को मारने के बाद वह गोली लगने से शहीद हो गए। इसी प्रकार, राइफलमैन प्रवेश कुमार 21 साल में वीरगति को प्राप्त हुए। चौगामा करनाल के गांव निवासी प्रवेश ने बड़ी बहादुरी से दुश्मनों का सामना किया। इसी प्रकार, 21 साल के सिपाही संजीव कुमार निवासी कुरुक्षेत्र, करनाल के गांव बल्ला निवासी 23 साल के सिपाही गुलाब सिंह, कैप्टन अमित वर्मा, राइफल मैन आशीष कुमार समेत अन्य जवान 25 साल से नीचे उम्र के थे। नारनौंद के गांव मिलकपुर के पवित्र सिंह ने बहादुरी दिखाते हुए दुश्मन दल के 11 सैनिकों को मारकर वीरगति प्राप्त की थी।
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