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पंथ को सतर्क रहने की जरूरत : सरना
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान और शिरोमणि अकाली दल बादल ग्रुप दिल्ली इकाई के प्रधान परमजीत सिंह सरना ने कहा कि पंथ को हरमीत सिंह कालका, जगदीप सिंह काहलों और मनजिंदर सिंह सिरसा जैसे लोगों से, जो केंद्र की एजेंसियों के इशारे पर काम कर रहे हैं, से सतर्क रहने की जरूरत है।
सरना ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हमेशा देश-विदेश की संगतों की भावनाओं के अनुरूप पंथक कार्य करती आई है। वर्तमान में एसजीपीसी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, भाई सती दास जी, भाई मती दास जी और भाई दयाला जी की 350वीं शहादत के उपलक्ष्य में पूरे देश को जोड़ते हुए बड़े नगर कीर्तन और विभिन्न राज्यों में धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी कर चुकी है। जिनमें हर धर्म और सामाजिक संगठन की सहभागिता हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यक्रमों से सिखों की एकजुटता बढ़ने की संभावना देख केंद्र के इशारे पर काम करने वाले दिल्ली कमेटी के प्रधान हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों इसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह 20 दिसंबर 2023 को एसजीपीसी ने 26 लाख संगतों के हस्ताक्षर वाले प्रोफार्मे राष्ट्रपति को सौंपने के लिए निकाले जाने वाले मार्च को रोकने की साजिश भी कालका ने रची थी।
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अमृतसर। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान और शिरोमणि अकाली दल बादल ग्रुप दिल्ली इकाई के प्रधान परमजीत सिंह सरना ने कहा कि पंथ को हरमीत सिंह कालका, जगदीप सिंह काहलों और मनजिंदर सिंह सिरसा जैसे लोगों से, जो केंद्र की एजेंसियों के इशारे पर काम कर रहे हैं, से सतर्क रहने की जरूरत है।
सरना ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हमेशा देश-विदेश की संगतों की भावनाओं के अनुरूप पंथक कार्य करती आई है। वर्तमान में एसजीपीसी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, भाई सती दास जी, भाई मती दास जी और भाई दयाला जी की 350वीं शहादत के उपलक्ष्य में पूरे देश को जोड़ते हुए बड़े नगर कीर्तन और विभिन्न राज्यों में धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारी कर चुकी है। जिनमें हर धर्म और सामाजिक संगठन की सहभागिता हो रही है।
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उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यक्रमों से सिखों की एकजुटता बढ़ने की संभावना देख केंद्र के इशारे पर काम करने वाले दिल्ली कमेटी के प्रधान हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों इसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी तरह 20 दिसंबर 2023 को एसजीपीसी ने 26 लाख संगतों के हस्ताक्षर वाले प्रोफार्मे राष्ट्रपति को सौंपने के लिए निकाले जाने वाले मार्च को रोकने की साजिश भी कालका ने रची थी।
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