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Panchkula News: ट्रायल कोर्ट की अपनाई प्रक्रिया कानून के लिए अज्ञात, जज की टिप्पणियां व एफआईआर रद्द

Sat, 03 Aug 2024 06:39 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 03 Aug 2024 06:39 AM IST
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The procedure followed by the trial court is unknown to the law, judge's comments and FIR canceled
चंडीगढ़। आपराधिक मामले में दोषपूर्ण जांच के लिए चंडीगढ़ पुलिस के जांच अधिकारी व एसएचओ के खिलाफ एसएसपी को एफआईआर दर्ज करने का आदेश कानून के लिए अज्ञात है। हाईकोर्ट ने एफआईआर व आदेश में की गई टिप्पणियों को रद्द करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया। चंडीगढ़ की ट्रायल कोर्ट ने आपराधिक मामले में आरोपी को बरी करते हुए जांच अधिकारी और संबंधित एसएचओ दोनों को अनुचित और दोषपूर्ण जांच के लिए दोषी मानते हुए एसएसपी को आदेश की प्रति भेज कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया था। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि दोषपूर्ण जांच से आरोपियों के संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ।
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आदेश में अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 166-ए (लोक सेवक द्वारा कानून के तहत निर्देश की अवहेलना) और 167 के तहत कार्रवाई शुरू करने को कहा गया था। इसके बाद जांच अधिकारी और एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। तत्कालीन एसएचओ कृपाल सिंह कूनर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए आपत्तिजनक आदेश में पारित अपमानजनक टिप्पणियां, जिसके आधार पर बाद में एफआईआर दर्ज की गई, उसे चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट रूल्स (चैप्टर 1 पार्ट एच रूल 6) के अवलोकन से पता चलता है कि यदि पुलिस अधिकारियों और अन्य अधिकारियों के आचरण की आलोचना की जानी है या किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की जानी है, तो तय प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
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अदालत को फैसले की एक प्रति जिला मजिस्ट्रेट को भेजनी चाहिए, जो इसे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजेंगे। इस मामले में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी और ट्रायल कोर्ट ने अभियुक्तों को बरी करते हुए निर्देश दिया था कि बरी करने के फैसले की एक प्रति एसएसपी चंडीगढ़ को कार्रवाई के लिए भेज दी। ट्रायल कोर्ट की ओर से अपनाई गई यह प्रक्रिया कानून के लिए अज्ञात है। ट्रायल कोर्ट ने नियमों का पालन नहीं किया। ऐसे में हाईकोर्ट ने विवादित निर्देश और पुलिस अधिकारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है।
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