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जो ज्ञान हमें दादा-परदादा से मिला है, वह दूसरों को भी बताना चाहिए : प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री
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पंचकूला। सेक्टर-14 हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी और मीडिया छात्र एसोसिएशन द्वारा अकादमी के महाराजा दाहिर सेन सभागार में जम्मू-कश्मीर के एक अध्ययन यात्रा दल के साथ हरियाणा-कश्मीर संवाद विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। पिछले वर्ष की भांति इस बार भी कश्मीर के छात्रों का एक अध्ययन दल चंडीगढ़ एवं हरियाणा की यात्रा पर चंडीगढ़ आया हुआ है। अंतरराज्यीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अंतर्गत अकादमी द्वारा यह परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं हिमाचल प्रदेश केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो कुलदीप चंद अग्निहोत्री द्वारा की गई।
उन्होंने कहा कि पीर पंजाल जम्मू-कश्मीर को जोड़ता है। उनका कहना है कि अगर किसी समाज की संस्कृति को खत्म करना हो तो उस समाज की मातृभाषा को मार दो। पढ़ने से सोच में वैज्ञानिकता आती है। उनका मत है कि जितना ज्ञान कम होता है उतना अभिमान बढ़ जाता है। ज्ञान की मात्रा का कोई अंत नहीं होता। उनका मानना है कि अंतिम सत्य तक पहुंचने में लाखों साल लगा जाएंगे परंतु तब तक हम नहीं होंगे। जम्मू कश्मीर से पधारे लगभग 65 छात्रों के अध्ययन दल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो ज्ञान हमें दादा परदादा से मिला है उसको हमें दूसरों को भी बताना चाहिए, जिससे यह जानकारी सभी को मिल सके। दुनिया में जितनी भी तरक्की हुई है वह बेसिक आइडिया से हुई है और यह बेसिक आइडिया मातृभाषा से ही आता है। डॉ. अग्निहोत्री ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को सामाजिक विकास एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
छात्र मीडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के छात्रों का यह अध्ययन दल चंडीगढ़ और हरियाणा के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करेगा। इस परिचर्चा में जम्मू-कश्मीर से पधारे अनेक छात्रों ने अपनी कविताओं, गजलों और अपने विचारों व अनुभवों को श्रोताओं के समक्ष साझा किया। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजेंद्र कुमार की ओर से किया गया और परिचर्चा में सैय्यद अब्दुल हनान, दिनेश कुमार तथा प्रदीप शर्मा सहित यात्रा दल के लगभग 65 छात्रों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज करवाई।
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उन्होंने कहा कि पीर पंजाल जम्मू-कश्मीर को जोड़ता है। उनका कहना है कि अगर किसी समाज की संस्कृति को खत्म करना हो तो उस समाज की मातृभाषा को मार दो। पढ़ने से सोच में वैज्ञानिकता आती है। उनका मत है कि जितना ज्ञान कम होता है उतना अभिमान बढ़ जाता है। ज्ञान की मात्रा का कोई अंत नहीं होता। उनका मानना है कि अंतिम सत्य तक पहुंचने में लाखों साल लगा जाएंगे परंतु तब तक हम नहीं होंगे। जम्मू कश्मीर से पधारे लगभग 65 छात्रों के अध्ययन दल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो ज्ञान हमें दादा परदादा से मिला है उसको हमें दूसरों को भी बताना चाहिए, जिससे यह जानकारी सभी को मिल सके। दुनिया में जितनी भी तरक्की हुई है वह बेसिक आइडिया से हुई है और यह बेसिक आइडिया मातृभाषा से ही आता है। डॉ. अग्निहोत्री ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को सामाजिक विकास एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
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छात्र मीडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के छात्रों का यह अध्ययन दल चंडीगढ़ और हरियाणा के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करेगा। इस परिचर्चा में जम्मू-कश्मीर से पधारे अनेक छात्रों ने अपनी कविताओं, गजलों और अपने विचारों व अनुभवों को श्रोताओं के समक्ष साझा किया। इस कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजेंद्र कुमार की ओर से किया गया और परिचर्चा में सैय्यद अब्दुल हनान, दिनेश कुमार तथा प्रदीप शर्मा सहित यात्रा दल के लगभग 65 छात्रों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज करवाई।
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