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Panchkula News: अदालत ने दिए शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश
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पंचकूला। सीबीआई की विशेष अदालत में रविवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रहे नपुंसकता मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा पुलिस और सीबीआई अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के आदेश दिए।
अदालत में सुनवाई के दौरान कोर्ट अहलमद को डाकिया के माध्यम से एक सीलबंद लिफाफा प्राप्त हुआ जिसमें निर्देश दिया गया कि आवेदन की प्रति जांच अधिकारी (एचआईओ) को सौंपी जाए। अदालत ने आदेश दिया कि अधिकारी संबंधित पुलिस अधीक्षक और एडीजीपी हिसार रेंज से समन्वय कर शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
शिकायतकर्ता के वकील ने पिछली सुनवाई (2 अगस्त) के दौरान अदालत को बताया था कि उनके मुवक्किल और परिवार को पिछले 10-12 वर्षों से सुरक्षा मिली हुई थी लेकिन 24 मई 2025 को बिना किसी कारण के सुरक्षा हटा ली गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गुरमीत राम रहीम सिंह के इशारे पर कुछ डॉक्टरों की मिलीभगत से उसे और करीब 400 साधुओं को ईश्वर प्राप्ति के नाम पर बंध्याकरण का शिकार बनाया गया था।
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सीबीआई ने इस मामले में 7 जनवरी 2015 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें धारा 120-बी, 326, 417 और 506 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था। इस केस में डॉ. एमपी सिंह और डॉ. पंकज गर्ग सह-अभियुक्त हैं। 30 अक्तूबर को गुरमीत राम रहीम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेशी दी। इस दौरान दो गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में कम से कम दो और गवाहों को सबूतों के लिए तलब किया जाए।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता का बयान अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 20 नवंबर को दर्ज किया जाएगा जिसकी तारीख दो माह पहले ही तय की जा चुकी है। अदालत ने शिकायतकर्ता के जिरह के लिए 20 नवंबर और दो अन्य गवाहों के जिरह के लिए 21 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है।
अदालत में सुनवाई के दौरान कोर्ट अहलमद को डाकिया के माध्यम से एक सीलबंद लिफाफा प्राप्त हुआ जिसमें निर्देश दिया गया कि आवेदन की प्रति जांच अधिकारी (एचआईओ) को सौंपी जाए। अदालत ने आदेश दिया कि अधिकारी संबंधित पुलिस अधीक्षक और एडीजीपी हिसार रेंज से समन्वय कर शिकायतकर्ता के परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं।
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शिकायतकर्ता के वकील ने पिछली सुनवाई (2 अगस्त) के दौरान अदालत को बताया था कि उनके मुवक्किल और परिवार को पिछले 10-12 वर्षों से सुरक्षा मिली हुई थी लेकिन 24 मई 2025 को बिना किसी कारण के सुरक्षा हटा ली गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गुरमीत राम रहीम सिंह के इशारे पर कुछ डॉक्टरों की मिलीभगत से उसे और करीब 400 साधुओं को ईश्वर प्राप्ति के नाम पर बंध्याकरण का शिकार बनाया गया था।
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सीबीआई ने इस मामले में 7 जनवरी 2015 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें धारा 120-बी, 326, 417 और 506 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया था। इस केस में डॉ. एमपी सिंह और डॉ. पंकज गर्ग सह-अभियुक्त हैं। 30 अक्तूबर को गुरमीत राम रहीम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेशी दी। इस दौरान दो गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में कम से कम दो और गवाहों को सबूतों के लिए तलब किया जाए।
सीबीआई ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता का बयान अमेरिका से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये 20 नवंबर को दर्ज किया जाएगा जिसकी तारीख दो माह पहले ही तय की जा चुकी है। अदालत ने शिकायतकर्ता के जिरह के लिए 20 नवंबर और दो अन्य गवाहों के जिरह के लिए 21 नवंबर की तारीख मुकर्रर की है।