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पंजाब की मुख्य सचिव को सुरक्षा अधिकारी के साथ सचिवालय में प्रवेश से रोका, मामला गरमाया
Sat, 25 Jul 2020 01:14 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 01:14 PM IST
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चीफ सेक्रेटरी विनी महाजन
- फोटो : फाइल फोटो
पंजाब की मुख्य सचिव को उनके हथियारबंद सुरक्षा अधिकारी के साथ पंजाब सचिवालय में प्रवेश से रोक दिए जाने का मामला गरमा गया है। मुख्य सचिव के विशेष अधिकारी ने सचिवालय की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के कमांडेंट को पत्र खिलकर उन मुलाजिमों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है, जिन्होंने सचिवालय के गेट पर मुख्य सचिव की कार को रोक लिया था।
गौरतलब है कि 21 जुलाई को दोपहर करीब ढाई बजे पंजाब की मुख्य सचिव विनी महाजन अपनी सरकारी कार में जब सचिवालय के मुख्य गेट पर पहुंचीं तो वहां तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने कार में सवार मुख्य सचिव के सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) को हथियारबंद होने के कारण सचिवालय में जाने से रोक दिया।
हालांकि पीएसओ ने ड्यूटी पर तैनात सीआईएसएफ के जवानों को बताया कि उन्हें हथियार लेकर सचिवालय में जाने की राज्य सरकार द्वारा अनुमति प्राप्त है। सीआईएसएफ के जवानों ने उनकी एक न सुनी और उन्हें सचिवालय के मुख्य गेट पर ही रोक लिया और मुख्य सचिव को अपने पीएसओ के बगैर सचिवालय में जाना पड़ा।
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उक्त पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए मुख्य सचिव के विशेष अधिकारी ने सीआईएसएफ के कमांडेंट को लिखे पत्र में कहा है कि सुरक्षा जवानों का व्यवहार अत्यंत गैरपेशेवर है। उन्हें इतनी भी जानकारी नहीं थी कि पीएसओ मुख्य सचिव के साथ नियुक्त हैं और उनके पास अधिकृत अनुमति भी हासिल है।
उन्होंने लिखा कि इस तरह का असभ्य व्यवहार किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। मुख्य सचिव के विशेष अधिकारी की तरफ से पत्र में निर्देश दिया गया है कि दोषी जवानों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए इस संबंधी रिपोर्ट तीन दिन में मुख्य सचिव कार्यालय को प्रस्तुत की जाए।
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गौरतलब है कि 21 जुलाई को दोपहर करीब ढाई बजे पंजाब की मुख्य सचिव विनी महाजन अपनी सरकारी कार में जब सचिवालय के मुख्य गेट पर पहुंचीं तो वहां तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने कार में सवार मुख्य सचिव के सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) को हथियारबंद होने के कारण सचिवालय में जाने से रोक दिया।
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हालांकि पीएसओ ने ड्यूटी पर तैनात सीआईएसएफ के जवानों को बताया कि उन्हें हथियार लेकर सचिवालय में जाने की राज्य सरकार द्वारा अनुमति प्राप्त है। सीआईएसएफ के जवानों ने उनकी एक न सुनी और उन्हें सचिवालय के मुख्य गेट पर ही रोक लिया और मुख्य सचिव को अपने पीएसओ के बगैर सचिवालय में जाना पड़ा।
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उक्त पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए मुख्य सचिव के विशेष अधिकारी ने सीआईएसएफ के कमांडेंट को लिखे पत्र में कहा है कि सुरक्षा जवानों का व्यवहार अत्यंत गैरपेशेवर है। उन्हें इतनी भी जानकारी नहीं थी कि पीएसओ मुख्य सचिव के साथ नियुक्त हैं और उनके पास अधिकृत अनुमति भी हासिल है।
उन्होंने लिखा कि इस तरह का असभ्य व्यवहार किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। मुख्य सचिव के विशेष अधिकारी की तरफ से पत्र में निर्देश दिया गया है कि दोषी जवानों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए इस संबंधी रिपोर्ट तीन दिन में मुख्य सचिव कार्यालय को प्रस्तुत की जाए।