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Panchkula News: भ्रष्टाचार की परतें उधेड़ेगी सीबीआई, बैंकिंग ट्रांजेक्शन का सरकारी फाइलों से होगा मिलान

Tue, 28 Apr 2026 02:16 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2026 02:16 AM IST
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The CBI will peel back the layers of corruption; banking transactions will be cross-referenced with government files.
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 590 करोड़ घोटाला : हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड, शिक्षा बोर्ड और पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के बीच तालमेल और फंड ट्रांसफर के नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी
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सोने के बाद बेनामी संपत्तियों पर टिकी सीबीआई की नजर, डायरेक्टर फाइनेंस, एचपीजीसीएन अमित दीवान की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर बनाई गई थीं फर्जी कंपनियां
दीपक शाही
पंचकूला। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा के सरकारी खाते से जुड़े 590 करोड़ के घोटाले में सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा की जांच तेजी से बढ़ रही है। जांच एजेंसी का पूरा फोकस अब उस नेक्सस को तोड़ना है जिसने हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड, शिक्षा बोर्ड और पावर कॉर्पोरेशन के फंड को निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। सीबीआई अब बैंकिंग ट्रांजेक्शन का सरकारी फाइलों से मिलान कराएगी ताकि भ्रष्टाचार की हर परत को हर परत को उधेड़ा जा सके। एसीबी ने न्यायिक हिरासत के दौरान कुछ नए सबूत जुटाए हैं। जिनको सीबीआई ने आधार बनाया है। वहीं किस अधिकारी ने फाइल आगे बढ़ाने के बदले कितना कमीशन लिया और पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है। किसको कितना पैसा दिया और किसने कितना गोल्ड लिया। इस एंगल पर भी सीबीआई जांच कर रही है। इसके अलावा पंचकूला और चंडीगढ़ के नामी ज्वैलर्स और बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ जारी है।
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अमित दीवान की मुश्किलें बढ़ीं
घोटाले की आंच अब विभाग के रसूखदारों तक पहुंच गई है। एचपीजीसीएल के डायरेक्टर फाइनेंस अमित दीवान, मार्केटिंग बोर्ड के कंट्रोलर फाइनेंस राजेश सांगवान और शिक्षा बोर्ड के रणधीर सिंह की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अमित दीवान को अंतरिम बेल के बाद 26 अप्रैल को सरेंडर करने के आदेश थे जिसके बाद सीबीआई 5 दिन का रिमांड हासिल करना चाहती है।
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सबूतों के साथ पूछताछ करेगी सीबीआई
सीबीआई रिमांड के दौरान आरोपियों को उन नए डिजिटल और दस्तावेजी सबूतों के साथ आमने-सामने बिठाएगी जो हाल ही में एसीबी ने बरामद किए हैं। जांच एजेंसी जानना चाहती है कि बैंक अधिकारियों को मैनेज करने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया गया और सरकारी फाइलों में हेरफेर किसके आदेश पर हुई। हरियाणा मार्केटिंग बोर्ड, शिक्षा बोर्ड और पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के बीच तालमेल और फंड ट्रांसफर का नेटवर्क क्या है। हिरासत में पूछताछ से न केवल बचे फंड को रिकवर करने में मदद मिलेगी, बल्कि उन अज्ञात चेहरों के नाम भी सामने आएंगे जो कानून की पहुंच से बाहर हैं। सीबीआई पता लगा रही है कि क्या इन अधिकारियों के पास कुछ ऐसी डिजिटल चाबियां या पासवर्ड थे, जिनका उपयोग करके फंड को शेल कंपनियों में डायवर्ट किया गया।

नए खाते और पैसों का खेल
-एक गहरी साजिश के तहत एयू और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में नए खाते खुलवाए थे।
-अन्य खातों से पैसा निकालकर इन बैंक खातों में डाला गया और फिर वहां से सरकारी फंड को शेल कंपनियों में भेज दिया गया।
-जांच में सामने आया है कि बैंक रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई और फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी खजाने में सेंध लगाई गई।
-इन बैंकों में खाते कैसे खुले और पूरे नेटवर्क में बैंक के किन कर्मचारियों की मिलीभगत थी। इसकी जांच सीबीआई कर रही है..।
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