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जवानों की मेहनत से मिली सर्वोत्तम ग्रुप केंद्र की ट्राफी
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सुनील थौरप उपमहानिरीक्षक सीआरपीएफ आकाश सेंटर की जानकारी देते।
- फोटो : PKL OFFICE
पिंजौर। केंद्रीय रिजर्व पुलिस के जवानों को जो भी जिम्मेदारी दी जाती है, उसे पूरी लगन से अंजाम तक पहुंचाते हैं। जवानों की मेहनत और लगन की वजह से सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र पिंजौर को सर्वोत्तम ग्रुप केंद्र की ट्राफी से नवाजा जा चुका है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के उपमहानिरीक्षक सुनील थौरप ने पिंजौर में आयोजित एक बैठक में कहा कि बीते वर्ष उन्हें वन विभाग द्वारा पर्यावरण को हराभरा बनाने के लिए मोरनी के पहाड़ी क्षेत्र, यमुनानगर में 25 हजार पौधे लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, परंतु उनके जवानों ने 28 हजार पौधे लगाकर चुनौती को पूरा किया।
उनके जवान अगले पांच साल तक इन पेड़ों की देेखभाल करेंगे साथ-साथ हर साल और नए पौधे रोपित करेंगे। थौरप ने बताया कि इसके अलावा ग्रुप केंद्र पिंजौर में ‘आकाश’ सेंटर का निर्माण करवाया है। जिसका उद्देश्य बौद्धिक अक्षम, अन्य विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए शैक्षिक, चिकित्सा, थैरेपी व हिलिंग की सहायता प्रदान करना है। प्रयोग में लाई गईं सभी वस्तुएं इसी कैंपस से एकत्रित की गई। सेंटर को इस तरह से निर्मित किया है कि बच्चों का खेल-खेल में ही उनके दिमाग की कोशिकाओं, तंत्रिकाओं आदि में समन्वय स्थापित होकर उनका मानसिक विकास हो सके।
उन्होंने बताया कि ग्रुप केंद्र में जवानों को किसी भी प्रकार की असुविधा या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए कैंपस के जवानों के लिए एक एप भी बनाया गया है। इसमें जवान अपनी परेशानी या जरूरत बता सकते हैं, जिसका तुरंत निपटारा किया जाता है। उपमहानिरीक्षक ने बताया कि इसके अलावा जवानों की शौर्य गाथा से कैंपस के बच्चों, जवानों और उनके परिवारों को अवगत करवाने के लिए जवानों की शौर्य गाथा ब्रेवरी वॉल बनाकर उस पर अंकित की गई है ताकि बच्चे और जवान प्रेरणा ले सकें
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उनके जवान अगले पांच साल तक इन पेड़ों की देेखभाल करेंगे साथ-साथ हर साल और नए पौधे रोपित करेंगे। थौरप ने बताया कि इसके अलावा ग्रुप केंद्र पिंजौर में ‘आकाश’ सेंटर का निर्माण करवाया है। जिसका उद्देश्य बौद्धिक अक्षम, अन्य विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए शैक्षिक, चिकित्सा, थैरेपी व हिलिंग की सहायता प्रदान करना है। प्रयोग में लाई गईं सभी वस्तुएं इसी कैंपस से एकत्रित की गई। सेंटर को इस तरह से निर्मित किया है कि बच्चों का खेल-खेल में ही उनके दिमाग की कोशिकाओं, तंत्रिकाओं आदि में समन्वय स्थापित होकर उनका मानसिक विकास हो सके।
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उन्होंने बताया कि ग्रुप केंद्र में जवानों को किसी भी प्रकार की असुविधा या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े इसके लिए कैंपस के जवानों के लिए एक एप भी बनाया गया है। इसमें जवान अपनी परेशानी या जरूरत बता सकते हैं, जिसका तुरंत निपटारा किया जाता है। उपमहानिरीक्षक ने बताया कि इसके अलावा जवानों की शौर्य गाथा से कैंपस के बच्चों, जवानों और उनके परिवारों को अवगत करवाने के लिए जवानों की शौर्य गाथा ब्रेवरी वॉल बनाकर उस पर अंकित की गई है ताकि बच्चे और जवान प्रेरणा ले सकें
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