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Panchkula News: 50 फुट हवा में उड़ी ताड़का, श्रीराम के बाण से हुई ढेर
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पंचकूला। श्रीराम ने धनुष से बाण छोड़ा तो ताड़का जोरदार झटके के साथ करीब 50 फुट हवा में उछल गई। कुछ पल के इस रोमांचक दृश्य ने मैदान में बैठे दर्शकों को हैरान कर दिया। ताड़का के जमीन पर गिरते ही जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठे। श्री रघुनाथ ड्रामेटिक क्लब और श्रीराम सेवादार ट्रस्ट की रामलीला में रविवार को ताड़का वध का ऐसा ही जीवंत मंचन देखने को मिला। लीला के दौरान रामलीला मैदान में 1500 से अधिक दर्शक मौजूद रहे।
मंचन की शुरुआत मारीच और सुबाहु के उत्पात से हुई। दोनों राक्षस ऋषि-मुनियों को परेशान करते और महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में बाधा डालते हैं। यज्ञ की रक्षा के लिए विश्वामित्र अयोध्या पहुंचकर राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को साथ भेजने का आग्रह करते हैं। गुरु वशिष्ठ की सलाह पर दशरथ दोनों राजकुमारों को विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। वन में ताड़का के आतंक का सामना होने पर श्रीराम धनुष संभालते हैं और बाण चलाकर उसका अंत कर देते हैं। हवा में ताड़का के उछलने का दृश्य देखते ही दर्शकों की निगाहें मंच पर टिक गईं और वध के बाद पूरा मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
भीड़ बढ़ी तो मंगवानी पड़ीं अतिरिक्त कुर्सियां
क्लब के नितिन शर्मा और सुभाष छोकरा तथा ट्रस्ट के राकेश गोयल और मुकेश बंसल ने बताया कि दर्शकों की संख्या अधिक होने के कारण अतिरिक्त कुर्सियां मंगवानी पड़ीं। महासचिव आकाश शर्मा के अनुसार, वॉलंटियर्स ने दर्शकों की सुविधा के लिए लगातार व्यवस्था संभाली।
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बाल श्रीराम की भूमिका पूजन शर्मा, बाल लक्ष्मण की भूमिका गुरु, महर्षि विश्वामित्र की भूमिका पारसनाथ प्रजापति और ताड़का की भूमिका कपिल ने निभाई। निर्देशक मोहित सूरी, सुशील शर्मा और बृजेश कुमार के निर्देशन में कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आगामी मंचन में सीता स्वयंवर, श्रीराम की बारात और वनवास की लीला दिखाई जाएगी। इस अवसर पर संजीव मनचंदा , राज मित्तल ,हरिंदर शर्मा , कीरत सिंह , नरेश मल्होत्रा ,विकास गोयल , पुनीत बंसल , एम आर गोयल , लक्ष्मण खन्ना , विनोद मित्तल , सौरभ नारंग , अशोक नारंग आदि उपस्थित रहे ।
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मंचन की शुरुआत मारीच और सुबाहु के उत्पात से हुई। दोनों राक्षस ऋषि-मुनियों को परेशान करते और महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ में बाधा डालते हैं। यज्ञ की रक्षा के लिए विश्वामित्र अयोध्या पहुंचकर राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को साथ भेजने का आग्रह करते हैं। गुरु वशिष्ठ की सलाह पर दशरथ दोनों राजकुमारों को विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं। वन में ताड़का के आतंक का सामना होने पर श्रीराम धनुष संभालते हैं और बाण चलाकर उसका अंत कर देते हैं। हवा में ताड़का के उछलने का दृश्य देखते ही दर्शकों की निगाहें मंच पर टिक गईं और वध के बाद पूरा मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
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भीड़ बढ़ी तो मंगवानी पड़ीं अतिरिक्त कुर्सियां
क्लब के नितिन शर्मा और सुभाष छोकरा तथा ट्रस्ट के राकेश गोयल और मुकेश बंसल ने बताया कि दर्शकों की संख्या अधिक होने के कारण अतिरिक्त कुर्सियां मंगवानी पड़ीं। महासचिव आकाश शर्मा के अनुसार, वॉलंटियर्स ने दर्शकों की सुविधा के लिए लगातार व्यवस्था संभाली।
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बाल श्रीराम की भूमिका पूजन शर्मा, बाल लक्ष्मण की भूमिका गुरु, महर्षि विश्वामित्र की भूमिका पारसनाथ प्रजापति और ताड़का की भूमिका कपिल ने निभाई। निर्देशक मोहित सूरी, सुशील शर्मा और बृजेश कुमार के निर्देशन में कलाकारों ने प्रस्तुति दी। आगामी मंचन में सीता स्वयंवर, श्रीराम की बारात और वनवास की लीला दिखाई जाएगी। इस अवसर पर संजीव मनचंदा , राज मित्तल ,हरिंदर शर्मा , कीरत सिंह , नरेश मल्होत्रा ,विकास गोयल , पुनीत बंसल , एम आर गोयल , लक्ष्मण खन्ना , विनोद मित्तल , सौरभ नारंग , अशोक नारंग आदि उपस्थित रहे ।