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Kalka: श्री काली माता मंदिर की खोदाई में निकली सुदर्शन चक्रनुमा संरचना, चल रहा नवनिर्माण का काम
Thu, 12 Feb 2026 10:50 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, कालका
संवाद न्यूज एजेंसी, कालका
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 12 Feb 2026 10:50 AM IST
सार
मान्यता है कि द्वापर युग में वनवास और अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कालका में माता की पिंडी की स्थापना की थी। स्थानीय श्रद्धालु खोदाई में निकल रही संरचनाओं को उसी पांडवकालीन इतिहास से जोड़कर देख रहे हैं।
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मंदिर में खोदाई से मिली पुरानी मूर्ति।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
कालका के प्राचीन श्री काली माता मंदिर में चल रहे नवनिर्माण कार्य के दौरान खोदाई में धार्मिक चिह्न और पुरानी मूर्तियां निकलने का मामला सामने आया है। मंगलवार को पिलर निर्माण के लिए की जा रही खोदाई के दौरान सुदर्शन चक्रनुमा एक संरचना मिलने का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बुधवार को विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष नरेश धीमान, दर्शन गिरी महाराज और संजय लहोट सहित शिष्टमंडल मंदिर पहुंचा और खोदाई से निकले धार्मिक चिह्न को दिखाने की मांग की। हालांकि संबंधित संरचना मौके पर नहीं मिली। इस पर उन्होंने कड़ा एतराज जताया। उनका कहना था कि यदि खोदाई में निकले अवशेष सुरक्षित नहीं मिले तो शहरवासियों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।
मंदिर सचिव पृथ्वीराज ने कहा कि जब उक्त धार्मिक चिह्न निकला, उस समय वह मौजूद नहीं थे। खोदाई से निकलने वाला मलबा चंडी माता मंदिर परिसर की खाली जगह पर डलवाया जा रहा था। बाद में कर्मचारियों को निर्देश देकर संबंधित चिह्न को ढूंढ लिया गया है और उसे सुरक्षित रखा गया है।
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मामला संज्ञान में आते ही कर्मचारियों को खोदाई में निकले धार्मिक चिह्न को तलाशने के निर्देश दिए गए थे। दोपहर तक वह चिह्न मिल गया। मंदिर में खोदाई के दौरान पुरानी मूर्तियां और धार्मिक चिह्न निकल रहे हैं जिन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है। इन्हें पुरातत्व विभाग को भी दिखाया जाएगा। -पृथ्वीराज, सचिव, प्राचीन श्री काली माता मंदिर, कालका
मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल पर खोदाई अत्यंत वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। इसे पुरातत्व विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में ही कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्राचीन संरचना को नुकसान न पहुंचे। -संतोष टगरा, स्थानीय निवासी
मंदिर हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। खोदाई में और भी महत्वपूर्ण संरचनाएं निकल सकती हैं। ऐसे में उत्खनन कार्य विशेषज्ञों की निगरानी में होना जरूरी है ताकि ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रह सके। -हरमीत सिंह डिम्मी, स्थानीय निवासी
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बुधवार को विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष नरेश धीमान, दर्शन गिरी महाराज और संजय लहोट सहित शिष्टमंडल मंदिर पहुंचा और खोदाई से निकले धार्मिक चिह्न को दिखाने की मांग की। हालांकि संबंधित संरचना मौके पर नहीं मिली। इस पर उन्होंने कड़ा एतराज जताया। उनका कहना था कि यदि खोदाई में निकले अवशेष सुरक्षित नहीं मिले तो शहरवासियों के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।
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मंदिर सचिव पृथ्वीराज ने कहा कि जब उक्त धार्मिक चिह्न निकला, उस समय वह मौजूद नहीं थे। खोदाई से निकलने वाला मलबा चंडी माता मंदिर परिसर की खाली जगह पर डलवाया जा रहा था। बाद में कर्मचारियों को निर्देश देकर संबंधित चिह्न को ढूंढ लिया गया है और उसे सुरक्षित रखा गया है।
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मामला संज्ञान में आते ही कर्मचारियों को खोदाई में निकले धार्मिक चिह्न को तलाशने के निर्देश दिए गए थे। दोपहर तक वह चिह्न मिल गया। मंदिर में खोदाई के दौरान पुरानी मूर्तियां और धार्मिक चिह्न निकल रहे हैं जिन्हें सुरक्षित रखा जा रहा है। इन्हें पुरातत्व विभाग को भी दिखाया जाएगा। -पृथ्वीराज, सचिव, प्राचीन श्री काली माता मंदिर, कालका
मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थल पर खोदाई अत्यंत वैज्ञानिक प्रक्रिया होती है। इसे पुरातत्व विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में ही कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्राचीन संरचना को नुकसान न पहुंचे। -संतोष टगरा, स्थानीय निवासी
मंदिर हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। खोदाई में और भी महत्वपूर्ण संरचनाएं निकल सकती हैं। ऐसे में उत्खनन कार्य विशेषज्ञों की निगरानी में होना जरूरी है ताकि ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रह सके। -हरमीत सिंह डिम्मी, स्थानीय निवासी