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तनाव मां की मौत से आया, सेना की सेवा से नहीं, दिव्यांगता पेंशन का हकदार नहीं : हाईकोर्ट

Fri, 25 Oct 2024 02:49 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Oct 2024 02:49 AM IST
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Stress came from mother's death, not from army service, not entitled to disability pension: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पूर्व सैनिक की दिव्यांगता पेंशन देने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची को अवसाद मां की मौत के कारण हुआ था और इसका संबंध सैन्य सेवा से नहीं है। याची की मां की मौत के बाद उसकी सेना की सेवा में रुचि समाप्त हो गई और वह पूजा-पाठ करने लगा था। लुधियाना निवासी सरबजीत सिंह सेना में 6 जनवरी, 1984 को भर्ती हुए थे और अपनी मां की मृत्यु के बाद मानसिक अवसाद का शिकार हो गए। 31 जनवरी, 2008 को उन्हें 30% दिव्यांगता रेटिंग के साथ सेवा से छुट्टी दे दी गई थी। इसके बाद दिव्यांगता पेंशन का दावा उन्होंने किया, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ अपीलेट अथॉरिटी ने भी अपील खारिज कर दी थी। इसके खिलाफ सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के समक्ष याचिका दाखिल की गई, लेकिन 2011 में उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
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इसके बाद उन्होंने 2021 में एएफटी के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को समय पर उचित कदम उठाने चाहिए थे, लेकिन उन्होंने इसे लंबे समय तक टाला। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि बीमारी की शुरुआत सैन्य सेवा की शर्तों का परिणाम नहीं थी, बल्कि याचिकाकर्ता की पारिवारिक परिस्थितियों के कारण हुई थी। हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि बीमारी का सैन्य सेवा से कोई संबंध नहीं था।
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