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ग्रुप डी के बर्खास्त कर्मचारियों के सामने भूखे मरने की नौबत

Mon, 31 May 2021 01:40 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 31 May 2021 01:40 AM IST
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Starving in front of the dismissed employees of Group D
चंडीगढ़। हरियाणा में बर्खास्त किए गए हजारों ग्रुप डी कर्मचारियों के परिवारों के सामने भूखा मरने की नौबत आ गई है। आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मचारी और उनके परिजन मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। ये अपने बच्चों को भी पढ़ा भी नहीं पा रहे हैं। ग्रुप-डी में नौकरी लगने के बाद सभी कर्मियों को अन्य नौकरियों में सामाजिक आर्थिक आधार पर 5 अंकों का लाभ नहीं मिल पाया, जिससे अनेक कर्मचारी व उनके परिजन क्लर्क, जेई, पुलिस जैसी भर्तियों में 2-3 अंक कम रहने के कारण चयनित नहीं हो पाए।
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सर्व कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री व खेल मंत्री को पत्र लिखकर हरियाणा सरकार की 1993 की खेल ग्रेडेशन नीति के तहत प्राप्त ग्रेडेशन प्रमाण पत्र को मान्यता प्रदान करते हुए बर्खास्त कर्मियों को रिक्त पड़े पदों पर समायोजित करने की मांग की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने बताया कि सरकार ने 18218 ग्रुप डी कर्मियों की भर्ती करने का जोर-शोर से प्रचार किया था, जिसका जींद उप चुनाव व लोकसभा चुनाव में लाभ भी मिला था। अब सरकार उक्त दावों की पोल खुलने पर चुप्पी साधे हुई है।
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हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने अप्रैल 2018 में ग्रुप डी के 18218 पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें 1518 खेल कोटे के पद थे। खेल कोटे के पदों के लिए हरियाणा की खेल ग्रेडेशन नीति के तहत प्रमाण पत्र होना आवश्यक था। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने और लिखित परीक्षा देने के उपरांत कर्मचारी चयन आयोग ने 18218 ग्रुप डी के अभ्यर्थियों का चयन किया। चयन के बाद खेल कोटे में चयनित कर्मचारियों ने जनवरी 2019 में विभिन्न विभागों में नौकरी ज्वाइन कर ली। ज्वाइनिंग के समय भी डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन की गई। लेकिन, ज्वाइनिंग के 6 महीने बाद ही मुख्य सचिव के निर्देश पर खेल कोटे में भर्ती हुए कर्मचारियों को 25 मई 2018 की खेल ग्रेडेशन नीति के तहत प्रमाण पत्र देने के नोटिस जारी किया गया। ऐसा न करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त करने की चेतावनी दी गई। इन आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। माननीय हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कर्मियों के पक्ष में फैसला दिया। सरकार ने फैसले को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने चुनौती दी और डबल बेंच में सरकार के पक्ष में फैसला आ गया। हाईकोर्ट ने एक महीने के अंदर प्रमाण पत्र जमा करवाने का अवसर दिया। इस फैसले के खिलाफ पीड़ित कर्मचारियों ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन वह खारिज हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार के पाले में गेंद है, अगर सरकार चाहे तो 1993 की नीति के तहत प्राप्त ग्रेडेशन प्रमाण पत्र को मान्यता देकर बर्खास्त कर्मचारियों की रिज्वाइनिंग करवा सकती है।
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