{"_id":"698a3ec164ec3cb0d30eb15b","slug":"small-age-difference-indicates-consent-20-year-sentence-suspended-for-minor-convicted-in-pocso-case-panchkula-news-c-16-1-pkl1098-944802-2026-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: उम्र का कम अंतर सहमति का संकेत, पोक्सो मामले में दोषी नाबालिग की 20 साल की सजा निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: उम्र का कम अंतर सहमति का संकेत, पोक्सो मामले में दोषी नाबालिग की 20 साल की सजा निलंबित
विज्ञापन
चंडीगढ़। पॉक्सो एक्ट में दोषी नाबालिग युवक की 20 वर्ष की सजा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहते निलंबित कर दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि घटना के समय आरोपी और पीड़िता दोनों नाबालिग थे तथा उनके बीच आयु का अंतर बहुत कम था जो सहमति का संकेत देता है। मामले के तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि कानून की कठोरता और वास्तविक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
पटियाला की अदालत ने याची को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। घटना के समय याची की आयु करीब 17 वर्ष 5 माह थी जबकि पीड़िता की आयु करीब 13 वर्ष 10 माह बताई गई। एफआईआर घटना के लगभग एक माह बाद दर्ज की गई थी जब पीड़िता को आरोपी के साथ देखा गया।
अदालत ने माना कि आपराधिक अपीलों की बड़ी संख्या लंबित होने के कारण इस मामले की अंतिम सुनवाई निकट भविष्य में होना संभव नहीं दिख रहा। परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा निलंबित कर दी। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी अपील की सुनवाई लंबे समय तक नहीं हो पाती तो आरोपी का लगातार जेल में रहना अनजाने में ही अतिरिक्त सजा जैसा प्रभाव डाल सकता है।
विज्ञापन
अदालत ने सख्त शर्तें भी लगाईं कि आरोपी पीड़िता या उसके परिवार से किसी प्रकार का संपर्क नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि यदि संबंध हुआ भी हो तो परिस्थितियां सहमति की ओर इशारा करती हैं। हालांकि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की की सहमति मान्य नहीं होती और ऐसा संबंध वैधानिक दुष्कर्म की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में 18 से 19 डेथ रेफरेंस अंतिम सुनवाई के लिए लंबित हैं, जिन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।
विज्ञापन
पटियाला की अदालत ने याची को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। घटना के समय याची की आयु करीब 17 वर्ष 5 माह थी जबकि पीड़िता की आयु करीब 13 वर्ष 10 माह बताई गई। एफआईआर घटना के लगभग एक माह बाद दर्ज की गई थी जब पीड़िता को आरोपी के साथ देखा गया।
विज्ञापन
अदालत ने माना कि आपराधिक अपीलों की बड़ी संख्या लंबित होने के कारण इस मामले की अंतिम सुनवाई निकट भविष्य में होना संभव नहीं दिख रहा। परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सजा निलंबित कर दी। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी अपील की सुनवाई लंबे समय तक नहीं हो पाती तो आरोपी का लगातार जेल में रहना अनजाने में ही अतिरिक्त सजा जैसा प्रभाव डाल सकता है।
विज्ञापन
अदालत ने सख्त शर्तें भी लगाईं कि आरोपी पीड़िता या उसके परिवार से किसी प्रकार का संपर्क नहीं करेगा। कोर्ट ने कहा कि यदि संबंध हुआ भी हो तो परिस्थितियां सहमति की ओर इशारा करती हैं। हालांकि कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की की सहमति मान्य नहीं होती और ऐसा संबंध वैधानिक दुष्कर्म की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में 18 से 19 डेथ रेफरेंस अंतिम सुनवाई के लिए लंबित हैं, जिन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।