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हालात : पेरिस बना न स्मार्ट सिटी, पुरानी पहचान भी नहीं बची

Sat, 26 Feb 2022 01:26 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 01:26 AM IST
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Situation: Paris has not become a smart city, even the old identity is not left
पंचकूला। मैं शिवालिक की तलहटी में बसा पंचकूला हूं। आपको अपनी पीड़ा से अवगत कराना चाहता हूं। मेरा जन्म पांच मई 1972 को हुआ था। मुझको किसी ने हरियाणा का पेरिस कहा तो किसी ने स्मार्ट सिटी में शामिल करवाने की कवायद की। मैं न तो पेरिस और न ही स्मार्ट सिटी बन सका। इस प्रयास में मेरी पुरानी पहचान भी जाती रही।
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42 वर्षों में कई सरकारें आईं और गईं, पर मेरा दर्द किसी ने नहीं समझा। नवंबर 2021 में विस अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने स्वच्छ, स्वास्थ्य पूर्ण सुविधायुक्त अच्छे पर्यावरण में जीने के सात सरोकार से जुड़े फार्मूले (अतिक्रमण, स्लम, लावारिस पशु, गली के कुत्तों, ड्रग, प्रदूषण, प्लास्टिक) की राह दिखाई, तो थोड़ी उम्मीद जगी। तीन माह बाद भी सातों सरोकार बैठकों तक ही सीमित रह गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष और अधिकारी रणनीति बनाते हैं कि स्मार्ट सिटी की राह आसान करने के लिए पंचकूला की तस्वीर बदलनी होगी, लेकिन सरोकारों से जुड़े फार्मूले पर अमल करना तो दूर अभी तक सार्थक प्रयास भी शुरू नहीं हो पाए हैं। इन तस्वीरों से यहां रहने वाले लोगों की भी परेशानी समझ सकते हैं।
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सरोकार 1: अतिक्रमण
शहर के सेक्टरों, बाजारों और अन्य क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराना।
अतिक्रमण विंग की लापरवाही से पंचकूला अतिक्रमण के जाल में फंसता जा रहा है। सेक्टर-11, 7, 8, 9, 20 में दुकानदारों ने बरामदों तक में अतिक्रमण कर रखा है। रेहड़ी फड़ी वालों ने भी बरामदे के सामने की जगह पर अतिक्रमण कर रखा है। अब हालात यह हैं कि रात के समय कोई मार्केट से निकल तक नहीं सकता, जबकि अतिक्रमण विंग की कार्रवाई जारी है। एक तरफ अतिक्रमण हटाने के नाम पर खानापूर्ति की जाती है, तो दूसरी तरफ कब्जा दोबारा हो जाता है।
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सरोकार 2: स्लम बस्तियां
स्लम बस्तियाें के पुनर्वास के लिए पंचकूला सेक्टर-20 और 28 में फ्लैट बनाया जाना था, लेकिन यह प्रोजेक्ट अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाया है।
पंचकूला के शहरी क्षेत्र में स्लम बस्तियां स्मार्ट सिटी की राह का रोड़ा हैं। यहां कई जगहों पर सरकारी जमीनों पर हजारों की तादात में लोगों ने झुग्गियां बनाकर डेरा जमा लिया है। इनके झुग्गी झोपड़ी के पुनर्वास के लिए कोई ठोस कदम आजतक नहीं उठाया गया। इनमें इंदिरा कालोनी, राजीव कालोनी, मद्रासी कालोनी, मनसा देवी कांप्लेक्स में मेडिकल कॉलेज की साइट बसी झुग्गियां शामिल हैं। इसके अलावा सेक्टरों के बीच में सेक्टर-14, 21 में खाली प्लाटों के बीच बनी झुग्गियां शामिल हैं। इन्हें हटाने के लिए पहले इनका पुनर्वास करना जरूरी है।
सरोकार 3: लावारिस पशु
पंचकूला को लावारिस पशु मुक्त घोषित कर दिया है।
पंचकूला में वर्ष-2021 मेें 20 वार्डों में करीब 1700 लावारिस पशु हैं। इसकी संख्या अब बढ़ चुकी है। यह संख्या वर्ष 2019 में करीब 803 थे। पंचकूला में लावारिस पशु पंजाब और चंडीगढ़ के बार्डर एरिया से अधिक आ रहे हैं। पंचकूला को लावारिस पशुओं से मुक्त करने के लिए सुखदर्शनपुर में एक गोशाला का निर्माण भी किया गया है। उसमें करीब 5.6 करोड़ की लागत आई, फिर भी लावारिस पशु शहरों में घूम रहे हैं।
सरोकार 4: लावारिस कुत्ते
शहर को लावारिस कुत्तों से मुक्त कराना। शहर के लोगों को इनके आतंक से निजात दिलाना।
लावारिस कुत्तों के लिए पंचकूला के गांव सुखदर्शनपुर में 4.70 करोड़ रुपये की लागत से चार एकड़ में कैनल हाउस तैयार किया गया है। दुविधा यह है कि इस कैनल हाउस में कुत्ते रखे ही नहीं जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के कानून के अनुसार शहर से कुत्तों को केवल स्टरलाइजेशन के लिए ले जा सकते हैं, इसके बाद उनको वापस वहीं छोड़ना होगा, जहां से ले गए थे। केवल उन कुत्तों को पकड़ा जाएगा, जो लोगों को रोजाना काट रहे हैं या फिर रेबीज के शिकार हो चुके हैं। पंचकूला में वर्ष 2019 में करीब सात हजार कुत्ते थे, जबकि अब करीब पांच हजार हैं। लावारिस कुत्तों की संख्या में कमी आई है।
सरोकार 5: नशा
जिले को नशा मुक्त कर युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालना।
पंचकूला के इंदिरा और राजीव कालोनी में खुलेआम नशा बिक रहा है, इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष ने कमेटी भी बनाई थी, लेकिन इस प्रोजेक्ट पर भी सही तरीके से अब तक काम शुरू नहीं हो पाया है। नतीजा पंचकूला की कालोनियों में खुलेआम अवैध शराब, सुल्फा और गांजा बिक रहा है।
सरोकार 6: प्रदूषण
शहर को प्रदूषण मुक्त करना। इसमें वायु और जल प्रदूषण मुक्त है।
हिमाचल के सिरमौर से घग्गर नदी साफ और स्वच्छ जल लेकर निकलती है, लेकिन जैसे ही वह हरियाणा में प्रवेश करती है तो उसके पानी का रंग बदलने लगता है। पंचकूला में कुछ ठीक रहता है, लेकिन इसके बाद से जैसे-जैसे नदी आगे बढ़ती है तो पानी का रंग काला होता चला जाता है। इसका कारण है नदी में फ्लो बनाने के नाम पर छोड़ा जा रहा ड्रेनों का दूषित पानी।
सरोकार 7: प्लास्टिक मुक्त अभियान
शहर को प्लास्टिक मुक्त कराना। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ लोगों को जागरूक करना।
मंडी हो या मार्केट सभी जगह प्लास्टिक में ही ग्राहकों को सामान दिया जा रहा है। नगर निगम ने कुछ प्रयास जरूर किए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं।

सात सरोकार (अतिक्रमण, स्लम, लावारिस पशु, स्ट्रीट डॉग, नशा, प्रदूषण, प्लास्टिक से मुक्त करने का संकल्प) के लिए तीन नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा हूं। विभागीय अधिकारी प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन पंचकूला को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए एक इच्छाशक्ति के साथ प्रयास करने की जरूरत है। इसमें पंचकूला के नागरिकों का भी सहयोग जरूरी है। - ज्ञानचंद गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष हरियाणा।
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