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हालात : प्राइवेट स्कूलों की निजी प्रकाशकों से यारी, अभिभावक को महंगी पड़ रही बच्चों की पढ़ाई

Mon, 04 Apr 2022 01:24 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 04 Apr 2022 01:24 AM IST
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Situation: Friendship with private publishers of private schools, parents are getting costly for their children's education
पंचकूला। शिक्षा सत्र शुरू होते ही निजी स्कूलों की मनमानी का खेल शुरू हो गया है। स्कूल संचालक निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवा रहे हैं। अभिभावक न चाहते हुए भी महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हैं। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से सब निराश हैं। निजी स्कूल प्रबंधन की मनमानी का आलम यह है कि अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों पर किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए भेजा जाता है। अभिभावकों की परेशानी यह है कि जो किताबें स्कूल प्रबंधन लगवाता है, वह केवल कुछ ही दुकानों पर मिलती हैं। इस कारण स्कूल प्रबंधन के इशारों पर चलना उनकी मजबूरी हो गई है।
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कमीशन के इस खेल में प्रकाशक, स्कूल संचालक, विक्रेता चांदी कूट रहे हैं। निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें भी हर वर्ष बदल दी जाती हैं। इस कारण पुरानी पुरानी किताबें लेने का विकल्प भी धरा रह जाता है। शहर के निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें ही लगवाई जा रही हैं। एक बच्चे के पिता जितेंद्र धीमान ने बताया कि अभिभावकों को कहा जाता है कि यदि सरकार और विभाग की बात सुनेंगे तो बच्चे पिछड़ जाएंगे। प्रतियोगिता की दौड़ में बच्चे पीछे न रह जाएं, इसलिए ही यह किताबें लगवाई जा रही हैं।
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हर साल प्राइवेट स्कूल बदल देते हैं किताबें
प्राइवेट स्कूल एनसीईआरटी की किताबें नहीं लगाते हैं। इस कारण किताबें खरीदने में 38 सौ रुपये खर्च करना पड़ा है। ड्रेस और बैग सहित सात हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो जाता है। इस पर कोई सुनवाई नहीं होती है। - नरेंद्र सिंह, अभिभावक, हंसराज पब्लिक स्कूल
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निजी प्रकाशक के अलावा नहीं मिलती किताबें
चुनिंदा दुकानों पर ही निजी प्रकाशकों की किताबें मिलती हैं। इस कारण उन्हीं दुकानों से किताबें खरीदनी पड़ती हैं। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले बेटे की किताबें खरीदने के लिए टोकन लेकर एक घंटे इंतजार करना पड़ा। इसके बाद किताबें मिली हैं। इस बार किताबें अधिक महंगी मिल रही हैं। -प्रिंस कुमार, अभिभावक, द गुरुकुल स्कूल
तीस फीसदी अधिक हो गए दाम
किताबें तीस फीसदी महंगी हो गई हैं। इस बार बेटे की पांचवीं कक्षा की किताबें पांच हजार रुपये में मिली हैं। किताबों और ड्रेस पर दस हजार रुपये खर्च करने पड़े हैं। निजी प्रकाशकों और स्कूल प्रबंधन की मनमानी जारी है। हमें अधिक पैसे खर्च कर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। - रवि कुमार, अभिभावक, द गुरुकुल स्कूल
शिकायत देने के बाद भी कार्रवाई नहीं
एनसीईआरटी की किताबें ही प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाए जाने का प्रावधान है। इसके बाद निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावकों को महंगे दामों पर बेची जाती हैं। इसकी शिकायत डीईओ सहित सभी जगह की जा चुकी है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावकों से निजी स्कूल संचालक लूट कर रहे हैं। - मनीष बांगड़, प्रेसिडेंट, पंचकूला पेरेंट्स एसोसिएशन

यह किताबों के दाम में है फर्क
कक्षा एनसीईआरटी निजी प्रकाशक
नर्सरी 400 1500
पहली से पांचवीं तक 850 4000
छठी से आठवीं तक 950 4500
10वीं से 12वीं तक 1350 7000
प्राइवेट स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें चलाई जा रही हैं। इस तरह की शिकायतें आई हैं। निजी स्कूलों में जल्द ही टीम बनाकर विजिट किया जाएगा। अगर निजी प्रकाशकों की किताबें पाई जाएंगी तो स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। - उर्मिला देवी, डीईओ, पंचकूला शिक्षा विभाग
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