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Highcourt: पिता के स्थान पर अनुकंपा नौकरी पाने तक क्या अविवाहित रहे बेटी, HC ने सरकार के रवैए पर जताई हैरानी

Thu, 03 Aug 2023 08:06 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 03 Aug 2023 08:06 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची का आवेदन बार-बार अलग-अलग कारणों से रद्द किया जाता रहा। इस बीच याची का 2007 में विवाह हुआ और 2013 में तलाक भी हो गया। अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन के समय वह अविवाहित थी।

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Should the daughter remain unmarried until she gets a compassionate job in place of her father: High Court
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

विस्तार

सरकारी कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उसके आश्रितों को तत्काल सहायता के लिए की गई अनुकंपा आधार पर नौकरी की व्यवस्था के मामलों को लेकर सरकार के रवैए पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हैरानी जताई है। कोर्ट ने कहा कि क्या नौकरी मिलने तक बेटी अविवाहित बैठी रहे। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को अनुकंपा के आधार पर नौकरी को लेकर तीन माह के भीतर निर्णय लिया जाए।
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याचिका दाखिल करते हुए रोपड़ निवासी गुरप्रीत कौर ने हाईकोर्ट को बताया कि 2001 में उसके पिता की मौत हो गई थी और तब याची ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। उस दौरान याची का कद छोटा होने के चलते उसे नौकरी नहीं दी जा सकती थी। याची ने तब क्लर्क के पद पर आवेदन कर दिया। 2002 से 2011 तक उसका मामला फाइलों में दबा रहा और इस आधार पर याची का आवेदन खारिज कर दिया गया कि वह ग्रेजुएट नहीं है। इसके बाद याची 2012 में ग्रेजुएट हुई और फिर से आवेदन किया। इसके बाद यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया गया कि याची विवाहित है और पिता पर आश्रित की श्रेणी में नहीं आती है। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में याची का आवेदन बार-बार अलग-अलग कारणों से रद्द किया जाता रहा। इस बीच याची का 2007 में विवाह हुआ और 2013 में तलाक भी हो गया। अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन के समय वह अविवाहित थी और इसके बाद लंबे समय तक उसके आवेदन पर पद रिक्त न होने के चलते विचार ही नहीं किया गया। अब क्या अनुकंपा नौकरी पाने तक मृतक कर्मी की बेटी को अविवाहित ही रहना होगा।

कोर्ट ने कहा कि यह सच है कि किसी भी व्यक्ति को नियुक्ति पाने का पूर्ण अधिकार नहीं है, लेकिन यदि राज्य सरकार द्वारा कोई नीति निर्धारित कर उसे लागू करती है तो मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों में भेदभाव नहीं किया जा सकता। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब याचिका को मंजूर करते हुए अनुकंपा आधार पर नौकरी के उसके दावे पर तीन माह के भीतर फैसला लेने का आदेश दिया है।
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