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सात जातियां बीसी-ए से हटाकर एससी में शामिल
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चंडीगढ़। हरियाणा में सात जातियों को एससी में शामिल किया गया है। अहेरिया, अहेरी, हेरी, डेरी, थोरी और तुरी के साथ ही राय सिख अब एससी माने जाएंगे। सरकार ने इन जातियों को पिछड़ा वर्ग-ए से हटा दिया है। अभी तक यह बीसी-ए में शामिल थीं। केंद्र सरकार इन जातियों को छह मई 2016 को ही पिछड़े वर्ग की सूची से हटाकर एससी की क्रम संख्या एक-ए में शामिल कर चुकी है।
हरियाणा ने केंद्र के फैसले के छह साल बाद अपनी सूची में संशोधन किया है। हरियाणा एससी-बीसी कल्याण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर मंडलायुक्तों, डीसी को सूचना भेज दी है। जल्द होने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर सरकार ने जातियों की श्रेणी को लेकर स्थिति साफ कर दी। अहेरिया, अहेरी, हेरी, डेरी, थोरी और तुरी जातियां अब हरियाणा की अनुसूचित जाति की सूची में क्रम संख्या एक-ए में रहेंगी।
राय सिख को अनुसूचित जाति की क्रम संख्या 29-ए में शामिल किया गया है। इसी तरह सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति की सूची में क्रम आठ पर स्थित भांजरा और पिछड़े वर्ग-ए की सूची में क्रम संख्या 58 पर अंकित, बांजरा और बंजारा दोनों ही अलग-अलग जातियां हैं। प्रदेश में अनुसूचित जाति की श्रेणी में 37, पिछड़ा वर्ग-ए में 71 और पिछड़ा वर्ग बी में 8 जातियां शामिल हैं।
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पिछड़ा वर्ग-ए में शामिल जातियां
कांजर या कंचन, कुर्मी, कुम्हार, प्रजापति, कंबोज, खंघेरा, कुछबंद, लबाना, लखेड़ा, मनिहार, कचेरा, लोहार, पांचाल-ब्राह्मण, मदारी, मोची, मिरासी, नर, नूंगार, नलबंद, पिंजा, पेनजा, रेहर, रेहरा या रे, रायगड़, रीचबंद, शोरगीर, शेरगिरो, सोई, सिंघिकांत, सिंगीवाला, सुनार, जरगर, सोनिक, ठठेरा, तमेरा, तेली, बंजारा, जुलाहा, रहबरी, चरण, चारज (महाब्राह्मण), रंगरेज, लिलगर, नीलगर, लल्लारिक, भर, राजभरी, नेट (मुस्लिम), जंगम, डकौत, धिमार, मल्लाह, कश्यप- राजपूत, कहार, झिवार, धिनवार, खेवत, मेहरा, निषाद, सक्का, भिस्ती, शेख-अब्बासी, धोसाली, दोसाली, फकीर, ग्वारिया, गौरिया या ग्वार, घिरथ, घासी, घसियारा या घोसी, गोरखास, बंजारा, गवाला, गडरिया, पाल, बघेल, गढ़ी लोहार, हज्जाम, नई, नाइस, सेन, जांगड़ा-ब्राह्मण, खाती, सुथार, धीमान-ब्राह्मण, तरखान, बारा, हेंसी, हेसी, बगरिया, बरवाड़, बढ़ई, तंबोली, बरागी, बैरागी, स्वामी साध, बत्तेरा, भरभुंजा, भरभुजा, भट, भातरा, दरपी, रमिया, भुहलिया, लोहार, चंगार, चिरिमार, चांग, चिंबा, छिपी, चिंपा, दरजी, रोहिल्ला, दईया, धोबी, गोवाला, बरहाई, बद्दी, जोगीनाथ, जोगी, नाथ, योगी।
पिछडा़ वर्ग बी
अहीर-यादव, गुर्जर, लोध-लोधा-लोधी, सैनी-शाक्य-कुश्वाहा-मौर्या-कोइरी, मेव, गोसाई- गोस्वामी-गोसैन, बिश्नोइ
एससी
अहेरिया, अहेरी, हेरी, डेरी, थोरी, तुरी, अद धर्मी, कबीरपंथी-जुलाहा, खटीक, कोरी, कोली, मरीजा-मरेच, मजहबी-मजहबी सिख, मेघ-मेघवाल, नट-बदी, ओड, पासी, पेरना, फरेरा, संहाई, संहाल, सांसी-भेदकुट-मनेश, संसोई, सपेला-सपेरा, सरेरा, सिकलीगर-बरीया व सिरकीबंर्द, वाल्मीकि, बंगाली, बरार-बुरार-बेरार, बटवाल-बरवाला, बोरिया-बावरिया, बाजीगर, भांजरा, चनल, दागी, दरेन, देहा-धाया-धेइया, धानक, धोगरी-धांगरी-सिग्गी, डुमना- महाशा-डूम, गगरा, गंधीला-गंदील-गंदोला।
पीपीपी के 24 अगस्त तक के डाटा का होगा उपयोग
हरियाणा सरकार बीसी-ए को पंचायत चुनाव में आरक्षण देने के लिए 24 अगस्त 2020 तक के डाटा का उपयोग करेगा। विकास एवं पंचायत विभाग ने सोमवार को इस संबंध में सभी डीसी को पत्र जारी कर दिया। हालांकि, इस फैसले पर बीसी-ए में विरोध के भी सुर उठने लगे हैं। पीपीपी के तहत अभी प्रदेश की पूरी आबादी की परिवार आईडी नहीं बनी है।
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हरियाणा ने केंद्र के फैसले के छह साल बाद अपनी सूची में संशोधन किया है। हरियाणा एससी-बीसी कल्याण विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर मंडलायुक्तों, डीसी को सूचना भेज दी है। जल्द होने वाले पंचायत चुनाव के मद्देनजर सरकार ने जातियों की श्रेणी को लेकर स्थिति साफ कर दी। अहेरिया, अहेरी, हेरी, डेरी, थोरी और तुरी जातियां अब हरियाणा की अनुसूचित जाति की सूची में क्रम संख्या एक-ए में रहेंगी।
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राय सिख को अनुसूचित जाति की क्रम संख्या 29-ए में शामिल किया गया है। इसी तरह सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति की सूची में क्रम आठ पर स्थित भांजरा और पिछड़े वर्ग-ए की सूची में क्रम संख्या 58 पर अंकित, बांजरा और बंजारा दोनों ही अलग-अलग जातियां हैं। प्रदेश में अनुसूचित जाति की श्रेणी में 37, पिछड़ा वर्ग-ए में 71 और पिछड़ा वर्ग बी में 8 जातियां शामिल हैं।
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पिछड़ा वर्ग-ए में शामिल जातियां
कांजर या कंचन, कुर्मी, कुम्हार, प्रजापति, कंबोज, खंघेरा, कुछबंद, लबाना, लखेड़ा, मनिहार, कचेरा, लोहार, पांचाल-ब्राह्मण, मदारी, मोची, मिरासी, नर, नूंगार, नलबंद, पिंजा, पेनजा, रेहर, रेहरा या रे, रायगड़, रीचबंद, शोरगीर, शेरगिरो, सोई, सिंघिकांत, सिंगीवाला, सुनार, जरगर, सोनिक, ठठेरा, तमेरा, तेली, बंजारा, जुलाहा, रहबरी, चरण, चारज (महाब्राह्मण), रंगरेज, लिलगर, नीलगर, लल्लारिक, भर, राजभरी, नेट (मुस्लिम), जंगम, डकौत, धिमार, मल्लाह, कश्यप- राजपूत, कहार, झिवार, धिनवार, खेवत, मेहरा, निषाद, सक्का, भिस्ती, शेख-अब्बासी, धोसाली, दोसाली, फकीर, ग्वारिया, गौरिया या ग्वार, घिरथ, घासी, घसियारा या घोसी, गोरखास, बंजारा, गवाला, गडरिया, पाल, बघेल, गढ़ी लोहार, हज्जाम, नई, नाइस, सेन, जांगड़ा-ब्राह्मण, खाती, सुथार, धीमान-ब्राह्मण, तरखान, बारा, हेंसी, हेसी, बगरिया, बरवाड़, बढ़ई, तंबोली, बरागी, बैरागी, स्वामी साध, बत्तेरा, भरभुंजा, भरभुजा, भट, भातरा, दरपी, रमिया, भुहलिया, लोहार, चंगार, चिरिमार, चांग, चिंबा, छिपी, चिंपा, दरजी, रोहिल्ला, दईया, धोबी, गोवाला, बरहाई, बद्दी, जोगीनाथ, जोगी, नाथ, योगी।
पिछडा़ वर्ग बी
अहीर-यादव, गुर्जर, लोध-लोधा-लोधी, सैनी-शाक्य-कुश्वाहा-मौर्या-कोइरी, मेव, गोसाई- गोस्वामी-गोसैन, बिश्नोइ
एससी
अहेरिया, अहेरी, हेरी, डेरी, थोरी, तुरी, अद धर्मी, कबीरपंथी-जुलाहा, खटीक, कोरी, कोली, मरीजा-मरेच, मजहबी-मजहबी सिख, मेघ-मेघवाल, नट-बदी, ओड, पासी, पेरना, फरेरा, संहाई, संहाल, सांसी-भेदकुट-मनेश, संसोई, सपेला-सपेरा, सरेरा, सिकलीगर-बरीया व सिरकीबंर्द, वाल्मीकि, बंगाली, बरार-बुरार-बेरार, बटवाल-बरवाला, बोरिया-बावरिया, बाजीगर, भांजरा, चनल, दागी, दरेन, देहा-धाया-धेइया, धानक, धोगरी-धांगरी-सिग्गी, डुमना- महाशा-डूम, गगरा, गंधीला-गंदील-गंदोला।
पीपीपी के 24 अगस्त तक के डाटा का होगा उपयोग
हरियाणा सरकार बीसी-ए को पंचायत चुनाव में आरक्षण देने के लिए 24 अगस्त 2020 तक के डाटा का उपयोग करेगा। विकास एवं पंचायत विभाग ने सोमवार को इस संबंध में सभी डीसी को पत्र जारी कर दिया। हालांकि, इस फैसले पर बीसी-ए में विरोध के भी सुर उठने लगे हैं। पीपीपी के तहत अभी प्रदेश की पूरी आबादी की परिवार आईडी नहीं बनी है।