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मौसमी डिप्रेशन खतरनाक : डॉक्टर सुबह और शाम सूर्य की रोशनी देने वाला बल्ब जलाने की दे रहे सलाह

Tue, 09 Jan 2024 01:35 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jan 2024 01:35 AM IST
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Seasonal depression is dangerous: Doctors are advising to light a bulb that gives sunlight in the morning and evening
माई सिटी रिपोर्टर
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पंचकूला। सर्दियों में अकेलापन लोगों की उदासी लगातार बढ़ा रहे हैं। यह तनाव ठंड में अकेलापन होने के कारण बढ़ रहा है। अस्पताल के मनोविज्ञान विभाग की ओपीडी में 50 मरीजों की वृद्धि हुई है। डॉक्टरों की तरफ से मरीजों की काउंसिलिंग की जा रही है। लगातार काउंसिलिंग में अकेलापन, धूप नहीं खिलने से अंधेरा होने जैसे और वॉकिंग सहित अन्य दिनचर्या प्रभावित होने से लोगों को परेशानी हो रही है। पंचकूला मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. एमपी शर्मा ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ अधिक समय अकेले रहने से लोगों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वृद्धि हुई है। रोजाना की ओपीडी सौ मरीजों की होती है। जैसे ही ठंड बढ़ी है। इसके बाद 20 से 40 साल के लोगों में इस तरह का तनाव अधिक बढ़ा है। मरीजों को सकारात्मक सोच के साथ तनाव से बचने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों की ओर से अभी धूप नहीं खिलने पर लोगों को सुबह और शाम सूर्य की रोशनी देने वाले बिजली के बल्ब जलाने की सलाह दी जा रही है। इससे पॉजिटिव एनर्जी बनी रहे।
इस तरह केस आ रहे हैं सामने
शहर की रहने वाली सेक्टर-11 की 23 वर्षीय एक युवती अपने माता-पिता के साथ ओपीडी में दिखाने आई। उसे नींद कम आना, खाना अत्यधिक खाना, वजन का बढ़ना, चिड़चिड़ापन, किसी काम में मन न लगना, बात-बात में रोना, सिर में दर्द की समस्या को लेकर मानसिक स्वास्थ्य विभाग में पहुंची। युवती के परिजनों ने बताया कि उसे यह दिक्कत इसी साल की सर्दी के मौसम से है। शुरुआत में उन्हें लगा था कि युवती बहाने बना रही है, लेकिन उसकी परिस्थिति ज्यादा गंभीर हो गई। इसके बाद उसकी काउंसिलिंग की जा रही है। वहीं 25 वर्षीय सेक्टर-12 निवासी युवक में भी इसी तरह की शिकायत पाई गई है। इसके अलावा मरीजों को इनडोर हर दिन व्यायाम करने, पौष्टिक आहार लेने, सोने और जागने का वक्त निर्धारित करने और अपनी दिक्कतों को साझा करने के लिए कहा गया। इसके साथ मरीज को रोज एक लक्ष्य बनाकर काम करने के लिए भी कहा जा रहा है। मरीजों में इंप्रूवमेंट भी सामने आई है।
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यह लक्षण दिखने पर अस्पताल आएं मरीज
पंचकूला मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. एमपी शर्मा ने कहा कि मन उदास रहना, खुशी न महसूस करना, प्रतिदिन के कार्य पहले की तरह न कर पाना, पहले जिन कार्यों को करने में मन लगता था, अब मन न लगना, छोटी-छोटी बातों में गुस्सा या चिड़चिड़ापन होना, रोना आना, भूख कम या ज्यादा लगना, वजन बढ़ना, लोगों से मिलना जुलना कम कर देना, पढ़ाई में मन न लगना शीतकालीन अवसाद के प्रमुख लक्षण हैं। अगर इस तरह के लक्षण हैं तो मरीज को तुरंत अस्पताल लेकर आएं।
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इस तरह से करें बचाव
शीतकालीन अवसाद की समस्या सर्दियों के महीनों में आती है। और बसंत के शुरू होने पर खत्म हो जाती है। इस अवस्था में लोग अपने जीवन को सुखद नहीं महसूस करते है, जिससे रोजमर्रा के कार्य करने में कठिनाई होती है। इससे बचाव के लिए पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है। इसके अलावा सोने के लिए एक समय तय करना चाहिए और अपनी समस्याओं को साझा करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यदि कोई शीतकालीन अवसाद की समस्या से परेशान है तो वह जिला अस्पताल में बने मनकक्ष में काउंसिलिंग के लिए आ सकता है। उन्होंने बताया कि रोजाना 20 लोगों की काउंसिलिंग भी की जा रही है। उन्होंने बताया कि सर्दी के मौसम में ठंड के कारण नर्वस सिस्टम सिकुड़ने लगता है, जिससे दिमाग पर असर पड़ता है। व्यक्ति हाइपोथर्मिया का भी शिकार हो सकता है। यह सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर डिप्रेशन का रूप है। यह डिप्रेशन डाइट को प्रभावित, नींद न आना, भावनात्मक रूप से कमजोर कर देने वाला होता है।
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