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संसाधनों की कमी से जूझ रहे सफाई कर्मी, कैसे स्वच्छ होगा शहर
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कालका। शहर को स्वच्छ रखने के लिए मौजूदा समय में सफाई कर्मचारियों के पास पूरे संसाधन उपलब्ध नहीं है। बावजूद इसके संसाधनों के अभाव में सफाई कर्मचारी शहर स्वच्छ रखने का प्रयास कर रहे हैं।
एक तरफ तो सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर देश में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने का संदेश देती है। वहीं, दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि सफाई कर्मचारियों के पास संसाधनों का अभाव है। कालका में करीब कच्चे-पक्के मिलाकर करीब 80 सफाई कर्मचारियों पर शहर की सफाई का जिम्मा है। जबकि शहर में सफाई व्यवस्था को मेनटेन रखने के लिए और शहर की जनसंख्या के हिसाब से यह आंकड़ा कुछ भी नहीं है। अभी भी शहर में कम से कम 100 सफाई कर्मचारियों की और जरूरत है ताकि शहर को पूरी तरह गंदगी मुक्त किया जा सके।
हाथ रेहड़ी और रिक्शा की भी कमी
नाम न छापने की सूरत में नगर परिषद के सफाई कर्मचारी ने बताया कि सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाली हाथ रेहड़ी और रिक्शा भी केवल नामात्र ही बचे हैं जिनसे वह जैसे-जैसे काम चला रहे हैं। नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों के पास केवल छह हाथ रेहड़ी और करीब इतने ही रिक्शा हैं जिनकी मदद से वह पूरे शहर की गंदगी उठाते हैं। वहीं, सही मायने में देखा जाए तो कम से कम 40 हाथ रेहड़ी व 25 के लगभग रिक्शा इन सफाई कर्मचारियों के पास होने चाहिए ताकि यह काम सही तरीके से कर सकें।
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एक रिक्शा पर तीन से चार कर्मचारी करते हैं काम
सफाई कर्मचारियों ने बताया कि एक रिक्शा पर एक समय में तीन से चार कर्मचारी काम करते हैं ताकि ज्यादा एरिया कवर किया जा सके। कम रिक्शा होने के चलते एक रिक्शे से ही कई गलियों को कवर करना पड़ता है। ऐसे में कई बार तीन या चार कर्मचारी रिक्शा के साथ होते हैं जोकि अपने-अपने एरिया की गंदगी को रिक्शा पर ढोकर उक्त जगह को स्वच्छ रखने में सहयोग करते हैं।
क्या बोले लोग व अधिकारी
सरकार के दावे हो रहे फेल : प्रदीप चौधरी
सरकार वैसे तो बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सफाई कर्मचारी दिन-रात शहर को स्वच्छ करने में जुटे रहते हैं। जान की परवाह किए बिना यह सभी योद्धा कोरोनाकाल में भी अपनी सेवाएं निरंतर देते रहे, लेकिन वर्तमान समय में इनके पास शहर को स्वच्छ रखने के लिए पूरे साधन भी नहीं हैं जोकि सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रशनचिह्न लगा रहे हैं। इस बारे में उपायुक्त पंचकूला से मुलाकात कर संसाधनों की कमी को दूर करने का पूरा प्रयास करेंगे।
-प्रदीप चौधरी, कालका विधायक
कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधा मिले : हर्ष कुमार
सरकार विकास के दावे करती है लेकिन यह हमारे कोरोना योद्धाओं को संसाधन तक उपलब्ध करवाने में भी फेल है। शहर में सफाई व्यवस्था के लिए महिला और पुरुष कर्मचारी सफाई का काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, जोकि सरकार के बेमिसाल सालों की पोल खोल रही है। सरकार को सफाई कर्मचारियों की संसाधनों की कमी दूर कर पिछले लंबे समय से इनकी जो मांगें हैं वह भी जल्द पूरी करनी चाहिए।
-हर्ष कुमार, समाज सेवी
कोट्स...
सफाई कर्मचारियों के पास जिन संसाधनों की कमी है। उसका आकलन कर उन्हें वह सामान उपलब्ध करवाया जाएगा।
-ममता शर्मा, नगर परिषद प्रशासक व एसडीएम
सफाई कर्मचारी जिन संसाधनों की कमी है वह उसे पूरा करवाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, ताकि उन्हें काम करने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।
-मदनलाल, सीएसआई
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एक तरफ तो सरकार स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर देश में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने का संदेश देती है। वहीं, दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि सफाई कर्मचारियों के पास संसाधनों का अभाव है। कालका में करीब कच्चे-पक्के मिलाकर करीब 80 सफाई कर्मचारियों पर शहर की सफाई का जिम्मा है। जबकि शहर में सफाई व्यवस्था को मेनटेन रखने के लिए और शहर की जनसंख्या के हिसाब से यह आंकड़ा कुछ भी नहीं है। अभी भी शहर में कम से कम 100 सफाई कर्मचारियों की और जरूरत है ताकि शहर को पूरी तरह गंदगी मुक्त किया जा सके।
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हाथ रेहड़ी और रिक्शा की भी कमी
नाम न छापने की सूरत में नगर परिषद के सफाई कर्मचारी ने बताया कि सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाली हाथ रेहड़ी और रिक्शा भी केवल नामात्र ही बचे हैं जिनसे वह जैसे-जैसे काम चला रहे हैं। नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों के पास केवल छह हाथ रेहड़ी और करीब इतने ही रिक्शा हैं जिनकी मदद से वह पूरे शहर की गंदगी उठाते हैं। वहीं, सही मायने में देखा जाए तो कम से कम 40 हाथ रेहड़ी व 25 के लगभग रिक्शा इन सफाई कर्मचारियों के पास होने चाहिए ताकि यह काम सही तरीके से कर सकें।
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एक रिक्शा पर तीन से चार कर्मचारी करते हैं काम
सफाई कर्मचारियों ने बताया कि एक रिक्शा पर एक समय में तीन से चार कर्मचारी काम करते हैं ताकि ज्यादा एरिया कवर किया जा सके। कम रिक्शा होने के चलते एक रिक्शे से ही कई गलियों को कवर करना पड़ता है। ऐसे में कई बार तीन या चार कर्मचारी रिक्शा के साथ होते हैं जोकि अपने-अपने एरिया की गंदगी को रिक्शा पर ढोकर उक्त जगह को स्वच्छ रखने में सहयोग करते हैं।
क्या बोले लोग व अधिकारी
सरकार के दावे हो रहे फेल : प्रदीप चौधरी
सरकार वैसे तो बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सफाई कर्मचारी दिन-रात शहर को स्वच्छ करने में जुटे रहते हैं। जान की परवाह किए बिना यह सभी योद्धा कोरोनाकाल में भी अपनी सेवाएं निरंतर देते रहे, लेकिन वर्तमान समय में इनके पास शहर को स्वच्छ रखने के लिए पूरे साधन भी नहीं हैं जोकि सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रशनचिह्न लगा रहे हैं। इस बारे में उपायुक्त पंचकूला से मुलाकात कर संसाधनों की कमी को दूर करने का पूरा प्रयास करेंगे।
-प्रदीप चौधरी, कालका विधायक
कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधा मिले : हर्ष कुमार
सरकार विकास के दावे करती है लेकिन यह हमारे कोरोना योद्धाओं को संसाधन तक उपलब्ध करवाने में भी फेल है। शहर में सफाई व्यवस्था के लिए महिला और पुरुष कर्मचारी सफाई का काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है, जोकि सरकार के बेमिसाल सालों की पोल खोल रही है। सरकार को सफाई कर्मचारियों की संसाधनों की कमी दूर कर पिछले लंबे समय से इनकी जो मांगें हैं वह भी जल्द पूरी करनी चाहिए।
-हर्ष कुमार, समाज सेवी
कोट्स...
सफाई कर्मचारियों के पास जिन संसाधनों की कमी है। उसका आकलन कर उन्हें वह सामान उपलब्ध करवाया जाएगा।
-ममता शर्मा, नगर परिषद प्रशासक व एसडीएम
सफाई कर्मचारी जिन संसाधनों की कमी है वह उसे पूरा करवाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं, ताकि उन्हें काम करने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।
-मदनलाल, सीएसआई