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Panchkula News: शोरायुक्त पानी बनी मजबूरी, क्लोरीनेशन नहीं होने से लगा है बीमारी का भय
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जीएच-41 की सोसाइटी। संवाद
पंचकूला। सेक्टर-20 जीएच-41 के मयूर बिहार को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी में लोग शोरा युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। लोगों के घरों में लगा नलका, ग्रीजर, आरो, वॉशरूम का पाइप लाइन हार्ड वाटर के चलते खराब होने लगे हैं। सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की तरफ से पानी की क्लोरीनेशन भी नहीं की जाती है। इसके अलावा बरसाती पानी की निकासी नहीं होने के चलते हर साल बरसात में लिफ्ट से लेकर सोसाइटी के अंदर पानी भर जाता है। वहीं एन्हांसमेंट से भी सोसाइटी के लोगों को आजतक राहत नहीं मिल पाई है।
पानी के अंदर शोरा आ रहा है। जिसके चलते लगा नलका, ग्रीजर, आरो, बाथरूम का पाइप लाइन खराब होने लगे हैं। यह मामला एचएसवीपी के अधिकारियों के संज्ञान में कई बार लाया गया, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ। - कुलभूषण गांधी, निवासी फ्लैट नंबर-405 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
बरसाती पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने के चलते हर साल बारिश के दिनों में लिफ्ट और सोसाइटी के अंदर दस इंच तक पानी भर जाता है। यह समस्या करीब पांच से सात साल से हैं। इसके समस्या के समाधान पर विभाग को ध्यान देना चाहिए। - मोहिंदर डावर, निवासी फ्लैट नंबर-101 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
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एचएसवीपी ने 2016 में 26,30,120 रुपये का सोसाइटी को नोटिस भेजा था। इसको तय समय में भर दिया। दो साल बाद अप्रैल 2018 में विभाग ने 15 फीसदी लगाकर डुप्लीकेट नोटिस के नाम से एक पत्र सोसाइटी को 3,86,540 रुपये का भेज दिया। नतीजा आज भी करीब 26 लाख रुपये स्टैंडिंग अमाउंट एचएसवीपी की साइट पर दिखा रहा है। सोसाइटी ने कोर्ट में 2018 में एसएसवीपी के खिलाफ केस डाला था। जिसमें एचएसवीपी ने अपनी गलती भी मानी थी। उसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। - योगेंद्र क्वात्रा, सोसाइटी प्रधान, निवासी 103 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
बिना क्लोरीन के पानी की सप्लाई सोसाइटी में की जा रही है। पेयजल में क्लोरीन मिलना सेहत के लिए जरूरी है। पेयजल में क्लोरीन नहीं मिलाई गई तो व्यक्ति के पेट में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं, जिससे दस्त-उल्टी लगना, बुखार टायफाइड, हर तरह का पीलीया, पेट में कीड़े पैदा होना, किडनी, लीवर, चमड़ी की बीमारी के शिकार हो सकते हैं। इस पर एचएसवीपी को ध्यान देना चाहिए। -हरजिंदर सिंह, निवासी 404 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
सेक्टर-20 में पानी का लेबल करीब 350 फुट है। इसलिए पानी में शोरा आ रहा है। इसका एक मात्र एक विकल्प है, भू-जल का दोहन कम किया जाए। रहा सवाल पानी में क्लोरीन की मात्रा का तो सर्दियों में पानी लोग कम इस्तेमाल करते हैं। इसलिए क्लोरीन की मात्र कम डाली जाती है। फिर भी जीएच- 41 के लोगों की शिकायत है, तो जांच कर समस्या का समाधान करवाया जाएगा। - मोहर सिंह, जेई एचएसवीपी पंचकूला।
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पानी के अंदर शोरा आ रहा है। जिसके चलते लगा नलका, ग्रीजर, आरो, बाथरूम का पाइप लाइन खराब होने लगे हैं। यह मामला एचएसवीपी के अधिकारियों के संज्ञान में कई बार लाया गया, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हुआ। - कुलभूषण गांधी, निवासी फ्लैट नंबर-405 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
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बरसाती पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने के चलते हर साल बारिश के दिनों में लिफ्ट और सोसाइटी के अंदर दस इंच तक पानी भर जाता है। यह समस्या करीब पांच से सात साल से हैं। इसके समस्या के समाधान पर विभाग को ध्यान देना चाहिए। - मोहिंदर डावर, निवासी फ्लैट नंबर-101 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
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एचएसवीपी ने 2016 में 26,30,120 रुपये का सोसाइटी को नोटिस भेजा था। इसको तय समय में भर दिया। दो साल बाद अप्रैल 2018 में विभाग ने 15 फीसदी लगाकर डुप्लीकेट नोटिस के नाम से एक पत्र सोसाइटी को 3,86,540 रुपये का भेज दिया। नतीजा आज भी करीब 26 लाख रुपये स्टैंडिंग अमाउंट एचएसवीपी की साइट पर दिखा रहा है। सोसाइटी ने कोर्ट में 2018 में एसएसवीपी के खिलाफ केस डाला था। जिसमें एचएसवीपी ने अपनी गलती भी मानी थी। उसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। - योगेंद्र क्वात्रा, सोसाइटी प्रधान, निवासी 103 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
बिना क्लोरीन के पानी की सप्लाई सोसाइटी में की जा रही है। पेयजल में क्लोरीन मिलना सेहत के लिए जरूरी है। पेयजल में क्लोरीन नहीं मिलाई गई तो व्यक्ति के पेट में बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं, जिससे दस्त-उल्टी लगना, बुखार टायफाइड, हर तरह का पीलीया, पेट में कीड़े पैदा होना, किडनी, लीवर, चमड़ी की बीमारी के शिकार हो सकते हैं। इस पर एचएसवीपी को ध्यान देना चाहिए। -हरजिंदर सिंह, निवासी 404 मयूर बिहार सेक्टर-20 जीएच-41 पंचकूला।
सेक्टर-20 में पानी का लेबल करीब 350 फुट है। इसलिए पानी में शोरा आ रहा है। इसका एक मात्र एक विकल्प है, भू-जल का दोहन कम किया जाए। रहा सवाल पानी में क्लोरीन की मात्रा का तो सर्दियों में पानी लोग कम इस्तेमाल करते हैं। इसलिए क्लोरीन की मात्र कम डाली जाती है। फिर भी जीएच- 41 के लोगों की शिकायत है, तो जांच कर समस्या का समाधान करवाया जाएगा। - मोहर सिंह, जेई एचएसवीपी पंचकूला।