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सरकारी स्कूलों में होगा निपुण बाल रामायण का मंचन
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चंडीगढ़। हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग सभी प्राइमरी सरकारी स्कूलों में निपुण बाल रामायण प्रतियोगिता का मंचन करने जा रहा है। रोल प्ले और शुद्ध उच्चारण से बच्चों की संवाद दक्षता को बेहतर बनाया जाएगा। रामायण के पात्रों के जरिये नैतिक और बौद्धिक स्तर को सुधारने के लिए 11 नवंबर को निपुण बाल रामायण का मंचन होगा। विभाग की ओर से बाल रामायण के पात्रों और उनकी भूमिका की जानकारी बच्चों और अध्यापकों के साथ सांझा कर दी गई है। प्राइमरी स्कूलों में 26 अक्तूबर से 10 नवम्बर तक रामायण के पात्रों और उनके किरदार की रिहर्सल करवाई जाएगी।
अध्यापकों को रामलीला मंचन की 3 से 4 मिनट की वीडियो बनाकर ट्विटर और फेसबुक के जरिये हैशटैग निपुण हरियाणा, निपुण रामायण पर डालनी होगी। बाल रामायण का जो मंचन सबसे अच्छा होगा, उसे निपुण हरियाणा के आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक पेज पर प्रचारित और प्रसारित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने बताया कि 6वीं क्लास में हिंदी पाठ्यक्रम में बाल रामायण लागू की गई है। यह बच्चों में भाषा शिक्षण के प्रति रुचि पैदा करने और अनुभव से सीखने का अवसर, भाषा के कौशल को समझने के लिए किया है। बाल रामायण रिहर्सल में न केवल माता-पिता का सहयोग लिया जाएगा, बल्कि समुदाय की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। रामलीला मंचन की खास बात यह है कि इसमें केवल पहली से पांचवी कक्षा के छात्रों को ही शामिल किया गया है। कक्षा पहली से तीसरी के छात्रों को छोटे संवाद के जरिये रामायण से जोड़ने की कोशिश की गई है।
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अध्यापकों को रामलीला मंचन की 3 से 4 मिनट की वीडियो बनाकर ट्विटर और फेसबुक के जरिये हैशटैग निपुण हरियाणा, निपुण रामायण पर डालनी होगी। बाल रामायण का जो मंचन सबसे अच्छा होगा, उसे निपुण हरियाणा के आधिकारिक ट्विटर और फेसबुक पेज पर प्रचारित और प्रसारित किया जाएगा। शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने बताया कि 6वीं क्लास में हिंदी पाठ्यक्रम में बाल रामायण लागू की गई है। यह बच्चों में भाषा शिक्षण के प्रति रुचि पैदा करने और अनुभव से सीखने का अवसर, भाषा के कौशल को समझने के लिए किया है। बाल रामायण रिहर्सल में न केवल माता-पिता का सहयोग लिया जाएगा, बल्कि समुदाय की भी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। रामलीला मंचन की खास बात यह है कि इसमें केवल पहली से पांचवी कक्षा के छात्रों को ही शामिल किया गया है। कक्षा पहली से तीसरी के छात्रों को छोटे संवाद के जरिये रामायण से जोड़ने की कोशिश की गई है।
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