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अपने फुटबाल के खेल के दम पर बनी रीतू रानी कोच
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पंचकूला। शहर के पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज सेक्टर-1 की पूर्व बीपीएड की छात्रा रीतू रानी अब झज्जर जिले में गांव भंभेवा में बतौर फुटबॉल कोच नियुक्त हो चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 2019 में साउथ एशियन गेम्स में फुटबॉल में स्वर्ण पदक जीता है। इसके बाद अब उन्हें झज्जर में बतौर कोच की तैनाती मिली है। वह गांव के लड़के और लड़कियों को बतौर फुटबॉल कोच ट्रेनिंग दे रही हैं। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत करके वह भारत की फुटबॉल टीम में खेली हैं। इसके लिए वे सेक्टर-3 ताऊ देवी लाल स्टेडियम में लगातार प्रेक्टिस करती रही हैं। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न फुटबॉल के मुकाबलों में अपना नाम चमकाया है।
रीतू रानी ने बताया कि बच्चे फिट रहने के लिए फुटबॉल खेलते हैं। उन्हें और उनके अभिभावकों को इसके लिए अपना नजरिया बदलना होगा। फुटबॉल खेल को अपना प्रोफेशन बनाकर आज के युवा आगे जा सकते हैं। इसलिए खेल में सभी को दिलचस्पी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सेक्टर-3 ताऊ देवीलाल स्टेडियम में फुटबॉल खेल की प्रेक्टिस करती थीं। उनके पिता सतबीर सिंह किसान हैं और मां रोशनी देवी हाउस वाइफ हैं। इसके बाद उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया। इसलिए आज वह इस मुकाम पर पहुंच सकी हैं।
फुटबॉल कोच रीतू ने बताया कि उनकी कोच पूजा नरवाल ने उनका हमेशा उत्साह बढ़ाया है। इसी वजह से उन्होंने अच्छा खेलकर यह मुकाम हासिल किया है। उनका कहना है कि लोगों केे फुटबॉल के खेल के प्रति और जागरूक होना होगा। अभी हमारे देश में विभिन्न जगह पर जागरूकता नहीं होने के कारण लोग इस खेल को कम खेलते हैं। मेरी अभिभावकों से अपील है कि वह अपने बच्चों को फुटबॉल सहित अन्य खेलों में भी खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
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रीतू रानी ने बताया कि बच्चे फिट रहने के लिए फुटबॉल खेलते हैं। उन्हें और उनके अभिभावकों को इसके लिए अपना नजरिया बदलना होगा। फुटबॉल खेल को अपना प्रोफेशन बनाकर आज के युवा आगे जा सकते हैं। इसलिए खेल में सभी को दिलचस्पी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सेक्टर-3 ताऊ देवीलाल स्टेडियम में फुटबॉल खेल की प्रेक्टिस करती थीं। उनके पिता सतबीर सिंह किसान हैं और मां रोशनी देवी हाउस वाइफ हैं। इसके बाद उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया। इसलिए आज वह इस मुकाम पर पहुंच सकी हैं।
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फुटबॉल कोच रीतू ने बताया कि उनकी कोच पूजा नरवाल ने उनका हमेशा उत्साह बढ़ाया है। इसी वजह से उन्होंने अच्छा खेलकर यह मुकाम हासिल किया है। उनका कहना है कि लोगों केे फुटबॉल के खेल के प्रति और जागरूक होना होगा। अभी हमारे देश में विभिन्न जगह पर जागरूकता नहीं होने के कारण लोग इस खेल को कम खेलते हैं। मेरी अभिभावकों से अपील है कि वह अपने बच्चों को फुटबॉल सहित अन्य खेलों में भी खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
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