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Panchkula News: चार दिन डिजिटल अरेस्ट कर सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर से ठगे 1.06 करोड़ रुपये
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आरोपी ने स्वयं को मुंबई पुलिस का एसआई बताकर महिला को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का डर दिखाया
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। चार दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर से 1.06 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है। आरोपी ने पुलिस अधिकारी बनकर ठगी को अंजाम दिया। आरोपी ने खुद को मुंबई पुलिस का एसआई बताकर मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में महिला प्रोफेसर के दस्तावेज मिलने पर जांच की बात कही। इसके अलावा युवती के नाम पर फर्जी तरीके से 10 लाख रुपये का लोन लेकर ठगी करने का दूसरा मामला भी साइबर पुलिस ने दर्ज किया है। साइबर पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है।
साइबर पुलिस के अनुसार, सेक्टर-4 निवासी महिला ने बताया कि वह शिमला यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। 6 सितंबर 2024 को अपने घर पर थीं। उसी दौरान दोपहर करीब 12 बजे अज्ञात मोबाइल नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने स्वयं को मुंबई पुलिस का सब इंस्पेक्टर बताया हेमराज बताया। उसने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पटेल नाम के व्यक्ति को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके पास से कुछ दस्तावेज मिले हैं। उसमें उनके भी दस्तावेज हैं। आरोपी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई कर गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। आरोपी ने इस संदर्भ में फर्जी कोर्ट का ऑर्डर भेजा। ऑर्डर देखकर महिला डर गई। इसके बाद आरोपी ने महिला को धमकाकर कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक वह डिजिटल अरेस्ट हैं। वह इस मामले में किसी से भी बात नहीं करेंगी। अगर घर से बाहर जाना है तो उनसे पूछ कर ही जाएंगी। महिला ने डर के कारण यह मामला किसी से साझा नहीं किया। अगले दिन दोबारा वीडियो कॉल कर दो आरोपियों ने कहा कि पटेल से रिकवर नकदी में कुछ जाली नोट मिले हैं। वे सारे नोट उनके हैं। इसके बाद आरोपी ने महिला से 90 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा ताकि जमा रुपयों में नोटों की एंट्री देखकर उसकी जांच कर सकें। अगर नोट जाली निकलता है तो रुपया सरकार जब्त कर लेगी और नहीं निकला तो पूरा रुपया वापस कर दिया जाएगा। महिला ने बैंक जाकर 90 लाख रुपये आरटीजीएस से बताए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। उसके दो दिन बाद 16 लाख रुपये और ट्रांसफर किए। महिला चार दिन तक साइबर ठग के जाल में फंसी रही। पांचवें दिन परेशान होकर अपने जानकार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ठगी का पता चला। इसके बाद साइबर पुलिस में शिकायत दी गई।
किसी भी अनजान कॉल से बचें। कोई अपने आप को अधिकारी बताकर डराता है तो फोन काटकर उसकी जांच करें और अपने परिजनों या किसी जानकार को बताएं। पुलिस में शिकायत दें। कोई भी इंटेलिजेंस एजेंसी इस तरह के कॉल या मैसेज नहीं करती है। किसी अनजान व्यक्ति के साथ कोई ओटीपी शेयर न करें और न ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक करें। ऐसे फोन आने पर सावधान रहें। डिजिटल अरेस्ट कर ठगी की गई है तो हेल्पलाइन नंबर 1930 व वेबसाइट पर शिकायत करे सकते हैं। अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल न उठाएं। गिरफ्तारी का कोई डर दिखाए तो इस पर विश्वास न करें। उक्त दोनों मामलों की जांच की जा रही है। - मुनीष शर्मा, एसएचओ, साइबर थाना
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। चार दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर से 1.06 करोड़ रुपये ठगने का मामला सामने आया है। आरोपी ने पुलिस अधिकारी बनकर ठगी को अंजाम दिया। आरोपी ने खुद को मुंबई पुलिस का एसआई बताकर मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में महिला प्रोफेसर के दस्तावेज मिलने पर जांच की बात कही। इसके अलावा युवती के नाम पर फर्जी तरीके से 10 लाख रुपये का लोन लेकर ठगी करने का दूसरा मामला भी साइबर पुलिस ने दर्ज किया है। साइबर पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है।
साइबर पुलिस के अनुसार, सेक्टर-4 निवासी महिला ने बताया कि वह शिमला यूनिवर्सिटी से सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं। 6 सितंबर 2024 को अपने घर पर थीं। उसी दौरान दोपहर करीब 12 बजे अज्ञात मोबाइल नंबर से वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने स्वयं को मुंबई पुलिस का सब इंस्पेक्टर बताया हेमराज बताया। उसने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पटेल नाम के व्यक्ति को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके पास से कुछ दस्तावेज मिले हैं। उसमें उनके भी दस्तावेज हैं। आरोपी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई कर गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। आरोपी ने इस संदर्भ में फर्जी कोर्ट का ऑर्डर भेजा। ऑर्डर देखकर महिला डर गई। इसके बाद आरोपी ने महिला को धमकाकर कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक वह डिजिटल अरेस्ट हैं। वह इस मामले में किसी से भी बात नहीं करेंगी। अगर घर से बाहर जाना है तो उनसे पूछ कर ही जाएंगी। महिला ने डर के कारण यह मामला किसी से साझा नहीं किया। अगले दिन दोबारा वीडियो कॉल कर दो आरोपियों ने कहा कि पटेल से रिकवर नकदी में कुछ जाली नोट मिले हैं। वे सारे नोट उनके हैं। इसके बाद आरोपी ने महिला से 90 लाख रुपये ट्रांसफर करने को कहा ताकि जमा रुपयों में नोटों की एंट्री देखकर उसकी जांच कर सकें। अगर नोट जाली निकलता है तो रुपया सरकार जब्त कर लेगी और नहीं निकला तो पूरा रुपया वापस कर दिया जाएगा। महिला ने बैंक जाकर 90 लाख रुपये आरटीजीएस से बताए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। उसके दो दिन बाद 16 लाख रुपये और ट्रांसफर किए। महिला चार दिन तक साइबर ठग के जाल में फंसी रही। पांचवें दिन परेशान होकर अपने जानकार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद ठगी का पता चला। इसके बाद साइबर पुलिस में शिकायत दी गई।
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किसी भी अनजान कॉल से बचें। कोई अपने आप को अधिकारी बताकर डराता है तो फोन काटकर उसकी जांच करें और अपने परिजनों या किसी जानकार को बताएं। पुलिस में शिकायत दें। कोई भी इंटेलिजेंस एजेंसी इस तरह के कॉल या मैसेज नहीं करती है। किसी अनजान व्यक्ति के साथ कोई ओटीपी शेयर न करें और न ही किसी अनजान लिंक पर क्लिक करें। ऐसे फोन आने पर सावधान रहें। डिजिटल अरेस्ट कर ठगी की गई है तो हेल्पलाइन नंबर 1930 व वेबसाइट पर शिकायत करे सकते हैं। अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल न उठाएं। गिरफ्तारी का कोई डर दिखाए तो इस पर विश्वास न करें। उक्त दोनों मामलों की जांच की जा रही है। - मुनीष शर्मा, एसएचओ, साइबर थाना
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